मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मामले में बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है.
न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की अवकाशकालीन पीठ ने भोपाल की सत्र अदालत द्वारा 15 मई 2026 को दिए गए जमानत आदेश को गंभीर खामियों से युक्त बताते हुए निरस्त कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि दहेज मृत्यु जैसे गंभीर और संवेदनशील मामलों में साक्ष्यों की गहन जांच अनिवार्य है, लेकिन निचली अदालत ने केस डायरी, गवाहों के बयान और व्हाट्सऐप चैट्स जैसे अहम साक्ष्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया. इस फैसले के बाद गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है और सीबीआई अब आगे की कार्रवाई तेज कर सकती है.
👉हाईकोर्ट का सख्त फैसला, निचली अदालत के आदेश में खामियां

उच्च न्यायालय ने अपने 17 पृष्ठों के विस्तृत आदेश में कहा कि 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा दिया गया अग्रिम जमानत आदेश तथ्यों की अनदेखी पर आधारित था. न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धाराओं 80(2), 85, 3(5) और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धाराओं 3 एवं 4 के तहत गंभीर अपराध बनते हैं. ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देते समय सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों का गहराई से परीक्षण आवश्यक था, जो इस मामले में नहीं किया गया. कोर्ट ने यह भी माना कि केस डायरी, गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्य जैसे व्हाट्सऐप चैट्स का समुचित मूल्यांकन नहीं हुआ.
👉सीबीआई को बनाया गया पक्षकार, जांच पर जोर
इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने खुद को पक्षकार बनाने और संशोधन के लिए आवेदन दायर किया था, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया. राज्य सरकार और सीबीआई दोनों ने कोर्ट में तर्क दिया कि मामला अभी जांच के प्रारंभिक चरण में है और आरोपी से कस्टोडियल इंटरोगेशन (हिरासत में पूछताछ) जरूरी है. कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए माना कि निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी की गिरफ्तारी आवश्यक हो सकती है.
👉शादी के पांच महीनों में मौत
ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह से हुई थी. शादी के कुछ महीनों बाद ही 12 मई 2026 को ट्विशा का शव भोपाल के कटारा हिल्स स्थित घर में फांसी पर लटका मिला. घटना के बाद कटारा हिल्स थाने में दहेज प्रताड़ना और अन्य आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया. मृतका के परिवार ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था.
👉गंभीर आरोप: प्रताड़ना, गर्भपात का दबाव और हिंसा
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि व्हाट्सऐप चैट्स में पति और ससुराल पक्ष द्वारा मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के स्पष्ट संकेत मिले हैं. मृतका के पिता की ओर से दावा किया गया कि ट्विशा पर उसके चरित्र पर संदेह किया जाता था और उसे गर्भपात करवाने के लिए दबाव डाला गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी फांसी के अलावा शरीर पर छह अन्य चोटों के निशान मिले, जबकि एम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि ये चोटें सामान्य प्रक्रिया के दौरान नहीं आईं. इससे मामले को और गंभीर माना गया.
👉जमानत के बाद आचरण पर भी उठे सवाल
हाईकोर्ट ने इस बात को भी गंभीरता से लिया कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद गिरिबाला सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मृतका की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. इसके अलावा, यह भी सामने आया कि वह जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रही थीं. कोर्ट ने कहा कि ऐसे व्यवहार से यह संकेत मिलता है कि आरोपी जांच को प्रभावित कर सकती हैं.
👉दहेज मृत्यु मामलों में सख्ती जरूरी: कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि दहेज मृत्यु एक गंभीर सामाजिक बुराई है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि जमानत आदेश साक्ष्यों की अनदेखी पर आधारित हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है. अदालत ने कहा कि अग्रिम जमानत असाधारण राहत है, जो केवल तभी दी जानी चाहिए जब सभी तथ्यों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन हो.
👉पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया: ‘न्याय मिला’
पीड़िता के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा, “आखिरकार ट्विशा मामले में न्याय मिल गया है.” परिवार लंबे समय से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा था और इस फैसले को उन्होंने बड़ी राहत बताया.
👉गिरफ्तारी की संभावना, जांच तेज होने के आसार
अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद अब गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी किसी भी समय हो सकती है या वे कोर्ट में आत्मसमर्पण कर सकती हैं. सीबीआई अब हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है, जिससे मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं का खुलासा होने की उम्मीद है. वहीं, समर्थ सिंह पहले से ही 29 मई तक सीबीआई रिमांड पर हैं.
