👉जिला पदाधिकारियों की यह मनमानी संगठनात्मक मजबूती को कर सकती है कमजोर
कोरबा-पाली। किसी भी राजनीतिक संगठन की मजबूती का आधार उसके शीर्ष पदाधिकारी पर सक्रिय कार्यकर्ताओं और अधीनस्थ पदाधिकारियों का गहरा विश्वास होता है। लेकिन, जब यही विश्वास मनमानी पर उतारू हो जाए तो संगठन में खींचतान और असमन्वय का बढ़ना शुरू हो जाता है। भारतीय जनता पार्टी में वर्तमान समय में कुछ ऐसा ही चल रहा है।

पहले जिला सूची को लेकर आंतरिक तौर पर विरोध के स्वर उभरे लेकिन संगठन का डंडा की वजह से उभर कर सामने नहीं आ पाए। हालांकि, समय-समय पर जिला संगठन की मनमानी और आपसी गुटबाजी कुछ मौकों पर सामने आ ही जाती है।
भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी के नेतृत्व में भाजपा के सभी अनुषंगी इकाईयों को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने की दिशा में अपने तरीके से काम किया जा रहा है। इसे लेकर कई बार विरोध के स्वर भी सामने आए जिसमें जिले में निवासरत प्रदेश स्तर के सदस्यों की उपेक्षा का भी मामला सामने आया, जब हाल ही में उन्हें महत्वपूर्ण प्रशिक्षण जैसी कार्यशाला में शामिल नहीं किया गया/पूछा नहीं गया। ऐसे अनेक उपेक्षाओं के बीच ताजा घटनाक्रम में पाली भाजपा मंडल के अध्यक्ष और भारतीय जनता युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष की जानकारी बिना ही संशोधित सूची जारी कर देने का मामला गरमाया हुआ है।
दरअसल, 20 अप्रैल 2026 को भारतीय जनता पार्टी प्रदेश संगठन के निर्देशानुसार भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी के अनुमोदन, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष वैभव शर्मा की अनुशंसा से तथा पाली मंडल अध्यक्ष चंद्रशेखर पटेल एवं युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष नीतिश कश्यप की सहमति से युवा मोर्चा पाली मंडल कार्यसमिति की घोषणा की गई थी। इस घोषित सूची को लेकर कहीं किसी तरह का कोई विवाद और आपत्ति नहीं थी लेकिन पदों का संतुलन थोड़ा गड़बड़ाया था,पर सब कुछ ठीक चल रहा था।
इसके एकाएक 40 वें दिन 30 मई को जिला संगठन के ऑफिसियल साइट पर फेसबुक में पाली भाजयुमो मंडल की एक नई सूची अपलोड कर दी गई, जिसके बाद से मंडल ने सवाल पर सवाल दाग दिए हैं। जिला संगठन के प्रति असंतोष का भाव उभर कर सामने आया है। आश्चर्य इस बात का है कि मंडल की नियुक्तियों में भाजपा और भाजयुमो मंडल का अधिकार होता है लेकिन इन दोनों की ही जानकारी के बगैर बिना प्रावधान के ही जिला संगठन ने 20 अप्रैल को जारी सूची में अपने हिसाब से संशोधन कर नाम और पद बदल दिए। इस बदलाव के दौरान एक पदाधिकारी को सूची से ही बाहर कर दिया गया जबकि पद में फेरबदल कर उसे रखा जा सकता था।
अब इस बात को लेकर मंडल के सक्रिय कार्यकर्ताओं सहित बाहर किए गए पदाधिकारी के मन में असंतोष उपजा है। उनके द्वारा मंडल पदाधिकारी से सवाल-जवाब किए जा रहे हैं क्योंकि उनका सीधा वास्ता अपने मंडल के अध्यक्ष से पड़ता है। इस तरह से मंडल अध्यक्षों की अनदेखी करते हुए उनकी जानकारी में दिए बगैर, उनकी सहमति लिए बगैर जिला संगठन द्वारा जारी की गई संशोधित सूची से उन प्रयासों को झटका लगना माना जा रहा है जिसमें संगठन को मजबूत करने की कोशिश चल रही है।
👉 उठे यह सवाल …
पाली भाजयुमो मण्डल में उपाध्यक्ष के 3 और मंत्री के 5 पदों पर नियुक्ति होनी थी। लेकिन 20 अप्रैल को जिला से 4 उपाध्यक्ष और 4 मंत्री घोषित कर दिए गए थे, इसे ही संतुलित कर अब 3 उपाध्यक्ष तीन और 5 मंत्री बनाए गए हैं, किन्तु सक्रिय को बाहर कर कुछ पद भी बदले गए। अब सवाल है कि जब एक उपाध्यक्ष हटाया गया उसे मंत्री पद दे दिया जाना था तो बाकी सब यथावत रहता लेकिन मंडल अध्यक्षों से चर्चा बगैर ही जिस तरह से कार्य किया गया है, उसे मंडल अध्यक्ष स्वीकार नहीं कर रहे। हालांकि भाजयुमो मंडल अध्यक्ष का कहना है की जिला अध्यक्ष से चर्चा करके सब कुछ शार्टआउट हो गया है लेकिन बात जब सक्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन में कोई पद देने की आती है और उसमें भी उसे लंबे इंतजार के बाद उपेक्षित होना पड़ता है तो आपसी चर्चा से उनकी तकलीफ दूर नहीं होती। आज भी पाली मंडल के अनेक सक्रिय कार्यकर्ता हैं जो तन- मन-धन से अपने क्षेत्र में संगठन को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करते हैं,लेकिन वह एक जिम्मेदार पद के लिए मोहताज रह गए हैं।
👉 इधर जिला मंत्री पाली मण्डल में दौरा कर रहीं,उधर नाराजगीं बढ़ रही
वैसे भी, पाली मंडल चुनावों में अपनी अहम भूमिका निभाते आया है और पाली-तानाखार विधानसभा सीट जो कि भाजपा के हाथ से बाहर रही है, उसे कब्जे में लेने की कोशिश यदि भाजपा के नेता कर रहे हैं तो ऐसे में जिला संगठन की ऐसी हरकतें व्यवधान उत्पन्न कर सकती हैं। एक तरफ जब भाजपा जिला मंत्री व पाली मंडल की प्रभारी श्रीमती कमला बरेठ संगठन को मजबूत करने की दिशा में दिन-रात एक कर पाली मंडल के दौरे पर चल रही हैं तो दूसरी तरफ जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी के द्वारा इस तरह से मंडल को भरोसे में लिए बगैर, बिना समन्वय और पाली में मौजूद अन्य पदाधिकारियों से भी बिना चर्चा के, किए गए संशोधन ने जिला संगठन की मनमानी पर सवाल तो उठाया है।
👉 भाजयुमो अध्यक्ष ने जिला पर बात छोड़ी
भाजयुमो जिला अध्यक्ष वैभव शर्मा ने भी इस पूरे मामले में जिला अध्यक्ष पर ही बात छोड़ दी है। वह यह तर्क जरूर दे रहे हैं कि में पूर्व में गलती से जिला के द्वारा सूची घोषणा कर दिया गया था, जिसे निरस्त कर जिला भाजपा के द्वारा नई घोषणा किया गया है और अधिक जानकारी के लिए जिला अध्यक्ष भाजपा से संपर्क कर सकते हैं।
