रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथी शावकों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला खरसिया वन परिक्षेत्र के गुरदा क्षेत्र का है, जहां मांड नदी में एक हाथी शावक का शव मिलने से हड़कंप मच गया। इस घटना के साथ ही पिछले 31 दिनों में जिले में मरने वाले हाथी शावकों की संख्या बढ़कर चार हो गई है, जबकि वर्ष 2026 में अब तक कुल 9 कलभों की मौत दर्ज की जा चुकी है।

ग्रामीणों ने रविवार सुबह मांड नदी में हाथी शावक का शव देखा और इसकी सूचना वन विभाग को दी। मौके पर पहुंची टीम ने शव को बाहर निकालकर जांच शुरू की। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण डूबना माना जा रहा है, लेकिन वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
चिंता की बात यह है कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वहां इन दिनों 40 से अधिक हाथियों का दल विचरण कर रहा है। वन विभाग की निगरानी के बावजूद लगातार हो रही शावकों की मौतें संरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही हैं।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि बीते मई माह में भी जिले में पानी में डूबने से तीन अन्य हाथी शावकों की मौत हो चुकी है। अब एक और कलभ की मौत ने वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रहे मामलों से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर हाथियों के संवेदनशील विचरण क्षेत्रों और जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा एवं निगरानी के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे हैं।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में रायगढ़ जिले में अब तक 9 हाथी शावकों की मौत हो चुकी है। इतनी बड़ी संख्या में हाथी बच्चों की मौत किसी भी वन क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के पारंपरिक मार्गों, नदी-नालों और जलस्रोतों के आसपास विशेष निगरानी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने भी हाथी संरक्षण के लिए ठोस और दीर्घकालिक रणनीति बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हाथियों और उनके शावकों की सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय जांच पर टिकी हैं। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि रायगढ़ में हाथी शावकों की लगातार हो रही मौतें वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर खतरे का संकेत हैं, जिन पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।
