KORBA : चेक बाउंस मामले में अभियुक्त को 1 वर्ष का सश्रम कारावास ,1.50 लाख का अर्थदंड …

कोरबा । माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोरबा, कु. कुमुदनी गर्ग के न्यायालय द्वारा परिवाद प्रकरण क्रमांक 293/2022, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक विरुद्ध रमेश यादव में महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया गया है। प्रकरण में परिवादी बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी की।

प्रकरण में यह सिद्ध हुआ कि अभियुक्त रमेश यादव ने अपने ऋण दायित्व के निर्वहन हेतु ₹1,04,000/- का चेक जारी किया था, जो बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर “निधि अपर्याप्त (Funds Insufficient)” होने के कारण अनादरित हो गया। इसके पश्चात विधिक नोटिस दिए जाने के बावजूद अभियुक्त द्वारा राशि का भुगतान नहीं किया गया।

निर्णय की कंडिका क्रमांक 13 में न्यायालय ने उल्लेख किया है कि अभियुक्त द्वारा अपने ऋण खाते में जमा किए जाने हेतु ₹1,04,000/- का चेक परिवादी बैंक को दिया गया था, जिसे बैंक में प्रस्तुत करने पर निधि अपर्याप्त होने के कारण अनादरित कर दिया गया। न्यायालय ने इस तथ्य को अभियुक्त के विधिक दायित्व का महत्वपूर्ण प्रमाण माना।

वहीं, निर्णय की कंडिका क्रमांक 31 में माननीय न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि परिवादी की ओर से प्रस्तुत परिवाद पत्र एवं समस्त दस्तावेजों के समग्र अवलोकन के पश्चात न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंची कि परिवादी अभियुक्त के विरुद्ध अपने मामले को युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल रहा है। परिणामस्वरूप अभियुक्त रमेश यादव को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत दोषसिद्ध घोषित किया गया।

माननीय न्यायालय ने अभियुक्त को एक वर्ष के सश्रम कारावास तथा ₹1,50,000/- के अर्थदण्ड से दंडित किया है। अर्थदण्ड की राशि परिवादी बैंक को प्रतिकर स्वरूप प्रदान किए जाने का आदेश दिया गया है। साथ ही अर्थदण्ड अदा नहीं किए जाने की स्थिति में अभियुक्त को अतिरिक्त तीन माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
यह निर्णय चेक अनादरण के मामलों में बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता एवं वित्तीय अनुशासन को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।