CG : घटते जंगल ने बढ़ाई चिंता , मध्य -छत्तीसगढ़ के 8 जिलों में महज 7 से 32 फीसदी बचा वन क्षेत्र

0 जंगलों की कटाई से 41 से 44 डिग्री तक पहुंचा तापमान; हीट स्ट्रोक का खतरा।
0 तापमान कम करने के लिए बढ़ाना होगा जंगलों का रकबा और ‘मिनी फॉरेस्ट’ का दायरा।

बिलासपुर।वैश्विक तापमान (ग्लोबल वॉर्मिंग) और अल-नीनो का असर तो अपनी जगह है, लेकिन छत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी के पीछे स्थानीय कारण सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। घटते वन क्षेत्र, अंधाधुंध शहरीकरण, कंक्रीट की सड़कें और बहुमंजिला इमारतों ने राज्य के 8 जिलों को ‘हीट स्ट्रेस’ और ‘हीट स्ट्रोक’ के डेंजर ज़ोन में धकेल दिया है। मध्य छत्तीसगढ़ के इन जिलों में वन क्षेत्र घटकर महज 7 से 32% रह गया है, जिसके कारण पारा 41 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच खौल रहा है।

अर्बन हीट आइलैंड बन रहे ये शहर वानिकी वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्य छत्तीसगढ़ के ये प्रमुख औद्योगिक और शहरी क्षेत्र अब ‘अर्बन हीट आइलैंड’ (शहरी ऊष्मा द्वीप) में तब्दील हो चुके हैं, जो बेहद चिंताजनक है:

👉बालोद: यहां महज 7% वन क्षेत्र बचा है, जिसके कारण यह 41°C तापमान के साथ सबसे गर्म जिलों की दौड़ में आगे है।

👉बिलासपुर: यहां कंक्रीट की सड़कें, तेज औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण महसूस होने वाला वास्तविक तापमान (Feel Like Temperature) सबसे ज्यादा है।

कोरबा, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार, रायपुर, दुर्ग और भिलाई: इन सभी क्षेत्रों में घटते जंगल और बढ़ते कंक्रीट के जाल ने तापमान को बेकाबू कर दिया है।

👉राहत की मिसाल,उत्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ से सीखें

जहां एक तरफ मध्य छत्तीसगढ़ तप रहा है, वहीं घने जंगलों वाले उत्तरी और दक्षिणी छत्तीसगढ़ के जिले पूरे राज्य के लिए एक आदर्श मिसाल पेश कर रहे हैं।

👉समाधान: अब क्या कदम उठाने होंगे?

​पेड़-पौधे प्रकृति के ‘नेचुरल एयर कंडीशनर’ हैं। एक परिपक्व वृक्ष प्रतिदिन 200 से 400 लीटर पानी वाष्पीकरण के जरिए वायुमंडल में छोड़ता है, जिससे वातावरण ठंडा रहता है।

👉इस संकट से निपटने के लिए ये कदम उठाने होंगे:

  • ​मिनी फॉरेस्ट का निर्माण: खनन (Mining) प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्वनीकरण कर वहां विशेष रूप से छोटे जंगल (Mini Forest) विकसित किए जाएं।
    ​कृषि वानिकी (Agroforestry): किसानों को खेतों में पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं को अनिवार्य किया जाए।
  • ​हरित पट्टी (Green Belt): नदी और नालों के तटों पर सघन वृक्षारोपण कर ग्रीन बेल्ट बनाई जाए ताकि जलस्रोत और प्राकृतिक स्वरूप सुरक्षित रहें।

​ 👉विशेषज्ञ की राय

​”वन क्षेत्र और तापमान के बीच सीधा संबंध है। जिन जिलों में वनावरण अधिक है, वहां वातावरण संतुलित है। कम वन क्षेत्र वाले जिलों में अर्बन हीट आइलैंड का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, खनन क्षेत्रों का पुनर्वनीकरण और शहरी हरित क्षेत्रों (Urban Green Spaces) का विस्तार करना अब समय की सबसे बड़ी मांग है।”

​— अजीत विलियम्स, वैज्ञानिक (वानिकी), बीटीसी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर