CG : हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने गिरफ्तारी और रिमांड की प्रक्रिया में पुलिस की लापरवाही पर जताई नाराजगी, SP से कहा – कानून के अनुसार हो गिरफ्तारी ,चेतावनी नहीं , लापरवाह अफसरों पर हो कड़ी कार्रवाई,जानें पूरा मामला …

बिलासपुर । बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने गिरफ्तारी और रिमांड की प्रक्रिया में पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताई है। नाराज कोर्ट ने कोरबा एसपी से कहा है, यदि कोई पुलिसकर्मी कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो केवल चेतावनी देकर मामले को खत्म नहीं किया जा सकता। ऐसे लापरवाह कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर लगातार नजर रखी जाए, दोबारा गलती होने पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।

👉पढ़िए क्या है मामला?

छत्तीसगढ़ कोरबा जिले के रजगामार निवासी किराना व्यवसायी अजय अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि 29 मार्च 2026 को बालको थाना पुलिस बिना वारंट उनकी दुकान और घर में घुस गई। परिवार के लोगों से मारपीट की और घर में लगे सीसीटीवी का डीवीआर भी निकाल कर ले गई। जब उन्होंने शिकायत की तो कार्रवाई करने के बजाय, उसके परिवार के खिलाफ ही काउंटर एफआईआर दर्ज कर दी।

👉जेएमएफसी ने रिमांड देने से किया इंकार, पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के दिए निर्देश

किराना व्यवसायी के बेटे को गिरफ्तार कर पुलिस जब रिमांड के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोरबा के सामने पेश हुई, तब कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत मानते हुए रिमांड देने से इंकार कर दिया था, कोट ने व्यवसायी पुत्र को जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करने से नाराज कोर्ट ने संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने डीजीपी व एसपी को निर्देशित किया था।

👉नाराज हाई कोर्ट ने एसपी से शपथ पत्र में मांगी थी जानकारी

याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान पुलिस कर्मियों की हठधर्मिता से नाराज कोर्ट ने कोरबा के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया था। कोर्ट के निर्देश पर कोरबा पुलिस अधीक्षक ने शपथ पत्र के साथ जानकारी पेश की। पुलिस अधीक्षक ने बताया, विवेचक हेड कांस्टेबल गुरुवार सिंह ने गिरफ्तारी के समय जरूरी ‘अरेस्ट चेकलिस्ट’ सही तरीके से नहीं भरी और रिमांड के दौरान अदालत में भी उपस्थित नहीं हुआ। इस प्रक्रियागत लापरवाही के कारण उसे 23 जून को कड़ी प्रशासनिक चेतावनी दी गई। एसपी ने कहा कि यह उनकी पहली गलती थी, इसलिए सुधार का अवसर दिया गया है।

👉कोर्ट ने कहा, कानून का पालन करना जरुरी शर्त

डिवीजन बेंच ने कहा, चेतावनी देना पर्याप्त नहीं है। पुलिस को गिरफ्तारी और रिमांड से जुड़े सभी कानूनी प्रावधानों का सख्ती से पालन करना होगा। यह सीधे नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला है। हेड कांस्टेबल गुरुवार सिंह की कार्यप्रणाली पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश एसपी को दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है, यदि भविष्य में हेड कांस्टेबल के खिलाफ ऐसी कोई लापरवाही दोबारा सामने आती है तो बिना किसी नरमी के विभागीय कार्रवाई की जाए।