KORBA :दिल्ली में NEET पेपर लीक मामले में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज और कथित बर्बरतापूर्ण रवैये के विरोध में डिप्टी CM साव को NSUI और युवा कांग्रेस ने दिखाए काले झंडे ,प्रतीक पांडे समेत कई नेता हिरासत में …

​कोरबा । दिल्ली में निर्दोष छात्रों पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज और कथित बर्बरतापूर्ण रवैये के विरोध में कोरबा जिले की सियासत गरमा गई है। छत्तीसगढ़ के उप-मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव के कोरबा प्रवास के दौरान युवा कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उग्र प्रदर्शन किया और मंत्री को काले झंडे दिखाए।

​प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए NSUI प्रदेश महासचिव विशाल सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।

👉​मानिकपुर चौकी में बनी अस्थायी जेल

​प्रभारी मंत्री के दौरे को देखते हुए कोरबा पुलिस प्रशासन पहले से ही हाई अलर्ट पर था। जैसे ही कार्यकर्ताओं ने काले झंडे लहराते हुए नारेबाजी शुरू की, मौके पर तैनात पुलिस बल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को अपने कब्जे में ले लिया।

​गिरफ्तारियों की भारी संख्या को देखते हुए मानिकपुर चौकी परिसर को अस्थायी जेल (अस्थाई डिटेंशन सेंटर) में तब्दील कर कार्यकर्ताओं को वहाँ रखा गया।

👉​प्रमुख रूप से गिरफ्तार हुए नेता एवं पदाधिकारी

​इस उग्र प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता पुलिस हिरासत में लिए गए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

​विशाल सिंह (प्रदेश महासचिव, NSUI)

​प्रतीक पांडे

​भानु भगत

​आशीष बंजारे

​नवनीत सिंह

​हर्ष डहरिया

​अरविंद राठौर

​मनोहर

​आनंद चौहान

​महेंद्र सिंह

इनके साथ भारी संख्या में युवा कांग्रेस और NSUI के कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।

​”लोकतंत्र में दमन नहीं, संवाद होना चाहिए”: विशाल सिंह एवं युवा नेता
​अस्थायी जेल में हिरासत के दौरान युवा कांग्रेस और NSUI के नेताओं ने प्रदेश व केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।

👉​NSUI प्रदेश महासचिव विशाल सिंह एवं अन्य नेताओं ने कहा:

“लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और काला झंडा दिखाना एक संवैधानिक अधिकार है। हमारा मकसद दिल्ली में निर्दोष छात्रों पर हुई बर्बरता की ओर सरकार का ध्यान खींचना था। दिल्ली में युवाओं की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया है, जिसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार दमनकारी नीति छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाए।”