CG : एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन करवाने की बदली व्यवस्था, अब राजस्व विभाग और सहकारी समिति करेंगे पंजीयन , एक ऋण पुस्तिका में दर्ज सभी लोगों का एग्रीस्टेक पंजीयन अनिवार्य, तभी बेच सकेंगे धान,जानें नई व्यवस्था …

कोरबा । प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन की व्यवस्था में इस साल बदलाव कर दिया गया है। पिछले साल तक कृषि विभाग एग्रीस्टेक पोर्टल में रजिस्ट्रेशन करवा रहा था लेकिन इस बार अब सहकारी समितियां और राजस्व विभाग संयुक्त रूप से पंजीयन करेंगे।नई व्यवस्था के तहत एक ऋणपुस्तिका में दर्ज सभी लोगों के नाम से पंजीयन करवाना होगा ,तभी किसान धान बेच सकेंगे।

31 अक्टूबर तक किसानों को पंजीयन के लिए समय दिया गया है। खास बात यह है कि ऐसी भी व्यवस्था की गई है कि यदि कोई किसान अपने खेत को अधिया या रेगहा में दिया है तो इसे लेने वाले किसान के नाम से भी एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन होगा। इसके लिए संबंधित कृषि भूमि के मालिक और रेगहा लेने वाले किसान के बीच विधिवत एग्रीमेंट पेपर होना चाहिए। कोरबा जिले में पिछले साल खरीफ विपणन वर्ष 2025 26 में 1 लाख 6 हजार 95 9 किसानों ने एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन कराया था, लेकिन पोर्टल में तकनीकी खामियां आने की वजह से डूबान क्षेत्र व वन भूमि में उपार्जित धान को बेचने वाले किसानों को परेशानी उठानी पड़ी।

इस तरह समझें पंजीयन की बदली व्यवस्था👇

👉केस 1 अधिया व रेगहा वालों का ऐसा पंजीयन

यदि कोई किसान की 10 एकड़ जमीन है और वह छत्तीसगढ़ से चाहर रहता है। उसने
अधिया या रेगहा पर कृषि जमीन ली है। तो कृषि जमीन के मालिक और अधिया रेवहा लेने वाले किसान के बीच विधिवत एग्रीमेट की कापी एकी स्टेक पोर्टल में अपलोड करना होगा। इसका सत्यापन राजस्व विभाग से जुड़े पटवारी व अधिकारी करेंगे। जिस खसरा बंबर पर जमीन है उसका भूईयां पोर्टल में अपलोड कर पुष्टि की जाएगी। धान बेचने पर रेगहा व अधिया लेने वाले किसान के खाते में ही पैसा आएगा।

👉केस 2 : एक ऋण पुस्तिका में 4 पंजीयन

बुधराम नामक किसान के चार पुत्र है। बुधराम की मृत्यु हो गई और उनके चारों पुत्रों के नाम पर फावती आ गई लेकिन नामांतरण नहीं हुआ है। उस स्थिति में बुधराम के एक ऋण पुस्तिका में उनके चारों पुत्रों का नाम आएगा। चारों के नाम से एग्रीस्टेक
पोर्टल में पंजीयन करवाया जाएगा।

👉केस 3 : जमीन खरीदी व ब्रिकी पर पंजीयन

यदि गुरुवार नामक किसान ने इस साल अपनी 3 एकड़ कृषि जमीन बेच दी। उसकी जमीन तिहारु नामक किसान ने खरीदी। ऐसे में एग्रीस्टेक पोर्टल में गुरुवार का रकबा कटेगा और तिहारु नए किसान के रूप में दर्ज होगा । इसी तरह यदि कोई किसान जितनी जमीन बेचता है या खरीदता है तो उतना हिस्सा
एग्रीस्टेक में कम या ज्यादा दर्ज करवाना जरूरी है। ऋण पुस्तिका आधार व लिंक मोबाइल नंबर अनिवार्य रहेगा।

👉3 स्थानों पर जमीन तो 1 आईडी

यदि किसी किसान का जमीन तीन स्थानों में है तो एक ही आईडी बनेगा लेकिन खाते में तीन लोगों का नाम दर्ज है तो सभी का यूनिक आईडी बनेगा। नियमानुसार पंजीयन के बाद पंजीकृत किसानों की सूची उपलब्ध कराने शासन स्तर से निर्देश दिए गए है।

👉इस तरह पंजीयन की प्रक्रिया करें किसान

जिन किसानों ने अब तक एग्रीस्टेक पंजीयन वहीं कराया है, उन्हें ऋण पुस्तिका के साथ आधार कार्ड ले जाकर कॉमन सर्विस सेंटर सीएससी में जरूरी प्रोसेस कराना होगा। इसके लिए लिंक मोबाइल नंबर बताना होगा। पहले सिर्फ मुखिया को पंजीयन कराना होता था। जिसके आधार पर समर्थन मूल्य पर धान बेचते थे लेकिन अब उनके सह खातेदारों के नाम भी दर्ज होंगे।

👉सूची ग्राम पंचायत व सेवा सहकारी समिति में चस्पा

एग्रीस्टेक पंजीयन के लिए खातेधारों, सह खातेदारों एवं खाते के सभी खसरा नंबर का पंजीयन अनिवार्य कराना है। छूटे हुए खातेदार, सह खातेदारों, किसानों की सूची बाम पंचायत व समिति में चस्पा होने के साथ-साथ हल्का पटवारी एवं आईओ के पास भी उपलब्ध है। हल्का पटवारी को गांव में तीन बार मुनादी कराने निर्देश दिए गए है। राजस्व व कृषि विभाग के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान बेचने के लिए सभी श्रेणी के किसानों के लिए एग्रीस्टेक(किसान आईडी) पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। जितने भी नाम शामिल हैं, सभी का पंजीयन अनिवार्य किया गया है।

👉रकबा संसोधन व नए पंजीयन डूबान ,वन भूमि में उपार्जित धान की बिक्री के लिए सहकारी समिति का करना होगा रुख,

एग्रीस्टैक पोर्टल में गत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 1 लाख 6 हजार 959 किसान एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत थे। जिसमें से 52 हजार 255 किसानों ने धान बिक्री के लिए पंजीयन कराया था। गत वर्ष धान बिक्री के लिए जिन किसानों ने पंजीयन कराया था वो कैरी फॉरवर्ड हो गए हैं। अगर उन्हें रकबा खसरा संसोधन नहीं कराना है तो उन्हें पुनः पंजीयन की आवश्यकता नहीं होगी। लेकिन रकबा ,खसरा संशोधन कराना है तो उन्हें सहकारी समिति का रुख करना होगा। इसके अलावा डूबान क्षेत्र व वन भूमि क्षेत्र में उपार्जित धान की बिक्री के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन के लिए संबंधित किसान को समिति में आवेदन करना होगा। खाद्य विभाग द्वारा मैपिंग उपरांत एग्रीस्टैक पोर्टल में उनका पंजीयन हो सकेगा,इसके उपरांत भी धान विक्रय हेतु किसान पंजीकृत हो सकेंगे।