ग्लासगो । कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने वाले भारतीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार अपनी इस उपलब्धि के बाद बेहद भावुक नजर आए। यह उनके करियर का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक है।
पदक जीतने के बाद उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह ‘हवा में उड़ रहे हों।’ उन्होंने बताया कि पूरे मुकाबले के दौरान उनके मन में सिर्फ एक ही लक्ष्य था कि हर हाल में पदक जीतना।
👉पदक जीतने के बाद झंडू कुमार का पहला रिएक्शन

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए झंडू कुमार ने कहा, ‘मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं उड़ रहा हूं। यह मेरा पहला मेडल है। पूरे मुकाबले के दौरान मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात चल रही थी कि मुझे मेडल जीतना है। बस जीतना है।’ उन्होंने कहा कि यह पदक उनके लिए सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की मेहनत का परिणाम है जिन्होंने उनके सफर में हर कदम पर उनका साथ दिया।
👉परिवार और सपोर्ट स्टाफ को दिया श्रेय
झंडू कुमार ने अपने परिवार, कोच और सपोर्ट स्टाफ का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि इन्हीं लोगों के विश्वास और सहयोग ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उन्होंने कहा, ‘मैं अपने परिवार और सभी कोचों का बहुत आभारी हूं। उन्होंने मुझे लगातार अभ्यास करने का मौका दिया और हमेशा प्यार व समर्थन दिया। आज मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। भविष्य में इससे भी बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगा।’
👉संघर्ष से सफलता की कहानी
झंडू कुमार की यह उपलब्धि पूरे भारत के लिए खास है। बिहार के रहने वाले झंडू एक सब्जी विक्रेता के बेटे हैं और अपने परिवार की मदद के लिए उन्होंने खुद भी सब्जियां बेचीं। बाद में उन्होंने जीविका के लिए ई-रिक्शा भी चलाया। उन्होंने 181 और 190 किलोग्राम के सफल लिफ्ट लगाए और कुल 130.9 अंक हासिल किए। हालांकि उनका 196 किलोग्राम का अंतिम प्रयास सफल नहीं हो सका।
