चुप कराने के लिए हो रहा कानून का इस्तेमाल- पूर्व चीफ जस्टिस शाह, NEET पेपर लीक प्रदर्शन पर भी कही यह बात ..

एजेंसी। दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह ने कहा है कि देश में कानूनों और सरकारी ताकत का इस्तेमाल कर सरकार से असहमति रखने वाले लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है। शाह ने कहा है कि अगर युवा किसी नेता के इस्तीफे की मांग करते हैं तो उन्हें एफआईआर और पुलिस की लाठियों का सामना करना पड़ता है।

शाह ने कहा कि सरकार की आलोचना करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को चुप कराया जा रहा है। शाह शुक्रवार को गोवा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा जस्टिस एचआर खन्ना की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में अपनी बात रख रहे थे।

जस्टिस एपी शाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी लोकतंत्र से जुड़ी है। शाह ने कहा, “आज कार्यकर्ताओं, असंतुष्टों और कार्टूनिस्टों को चुप कराने और परेशान करने के लिए हर तरह के कानूनों और तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर युवा किसी नेता के इस्तीफे की मांग करते हैं तो उन पर एफआईआर दर्ज की जाती है और लाठीचार्ज किया जाता है।”

जस्टिस शाह ने यह भी कहा कि अगर मीडिया संस्थान मौजूदा सरकार की आलोचना करते हैं तो उन पर टैक्स संबंधी मामलों और वित्तीय जांच का दबाव बनाया जाता है।

👉NEET पेपर लीक प्रदर्शन पर भी बोले

NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों ने दिखाया है कि भारत में लोकतंत्र अभी भी जिंदा है जबकि कई लोगों का मानना ​​था कि समाज कमजोर पड़ गया है, विपक्ष बेअसर है और आलोचना के लिए जगह हमेशा के लिए बंद हो गई है।

👉बुलडोजर कार्रवाई पर जताई चिंता

शाह ने बुलडोजर कार्रवाई और एनकाउंटर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “आज बिना मुकदमे के आरोपियों के घरों को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा है… अगर कानून के शासन की जगह बुलडोजर, एनकाउंटर स्क्वैड और सरकारी आयोग ले लेंगे तो अदालतों और न्यायाधीशों की क्या भूमिका रह जाएगी?” पूर्व चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि हमारे देश में इंटरनेट बंद होने की घटनाएं सबसे ज्यादा हो रही हैं।