बिहार । बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव परिणाम को बिहार के सियासी समीकरण में बदलाव का संकेत माना जा रहा है। प्रशांत किशोर ने बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाई और राज्य में तीसरे विकल्प के रूप में जनसुराज उभरी है।
पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अपने पारंपरिक गढ़ में पिछड़ने और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की बड़ी जीत के पीछे कई प्रमुख राजनीतिक और संगठनात्मक कारण रहे हैं।
👉प्रशांत किशोर का खुद मैदान में उतरना और आक्रामक रणनीति

प्रशांत किशोर ने इस उपचुनाव को साधारण चुनाव न मानकर खुद प्रत्याशी के रूप में लड़ाई लड़ी। उन्होंने लगभग 250-300 प्रोफेशनल्स और फेलो कार्यकर्ताओं के साथ हर बूथ पर ‘अड्डा’ बनाकर डोर-टू-डोर माइक्रो-मैनेजमेंट किया।
👉एक मजबूत ‘तीसरा विकल्प’
बिहार में लंबे समय से चले आ रहे ‘एनडीए बनाम महागठबंधन’ के ध्रुवीकरण के बीच प्रशांत किशोर ने शहरी मतदाताओं को विकास, शिक्षा, रोजगार और व्यवस्था परिवर्तन के रूप में एक मजबूत ‘तीसरा विकल्प’ पेश किया।
👉भाजपा का मजबूत चेहरा न होना और कैडर में अति-आत्मविश्वास
बांकीपुर सीट पर पिछले कई दशकों से नितिन नवीन और उनके पिता स्व. नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा का मजबूत व्यक्तिगत प्रभाव रहा है। लेकिन नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद भाजपा के पास उस कद का स्थानीय चेहरा नहीं था।
👉प्रत्याशी बदलने से भाजपा कैडर में असमंजस
शुरुआत में घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार का नाम वापस होना और फिर नए प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को उतारने से भाजपा कैडर में शुरुआती असमंजस रहा। साथ ही, गढ़ मानकर अति-आत्मविश्वास में रहने का नुकसान भी भाजपा को उठाना पड़ा।
👉कम मतदान का समीकरण
बांकीपुर उपचुनाव में महज 34.3 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो सामान्य चुनावों से काफी कम था। पिछले 2025 चुनाव में भी भाजपा का पारंपरिक और कोर शहरी मतदाता बड़ी संख्या में वोट देने नहीं निकला, जबकि जन सुराज के समर्पित कैडर ने अपने समर्थकों को बूथ तक पहुंचाने में बाजी मार ली।
👉बुनियादी समस्याओं को लेकर उपेक्षा और असंतोष
बांकीपुर पटना का प्रमुख शहरी क्षेत्र है। जलजमाव, खराब ट्रैफिक व्यवस्था, स्मार्ट सिटी योजनाओं की धीमी रफ्तार और स्थानीय स्तर पर विधायकों की पहुंच को लेकर मतदाताओं के एक बड़े वर्ग खासकर युवाओं और मध्यम वर्ग में लंबे समय से दबी हुई नाराजगी थी। प्रशांत किशोर ने इन नागरिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
👉कोर और साइलेंट वोट बैंक में सेंध
जन सुराज ने पारंपरिक जातिगत और दलीय निष्ठाओं को तोड़ा। भाजपा के पारंपरिक उच्च जाति और व्यापारी वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा, जो मौजूदा व्यवस्था से निरपेक्ष या निराश था, जन सुराज के सुशासन और बदलाव के वादे की तरफ शिफ्ट हो गया।
