नेपाल । नेपाल में भोटे कोशी नदी में आई अचानक भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। बुधवार सुबह रासुवा जिले के रसुवागढ़ी-टिमुरे इलाके में नदी का पानी अचानक बढ़ा और देखते ही देखते कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ का असर रासुवा के अलावा नुवाकोट और धादिंग तक पहुंचा है। सड़कों, पुलों, वाहनों और दूसरी जरूरी सुविधाओं को भारी नुकसान हुआ है। रॉयटर्स के मुताबिक, 150 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 750 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

नेपाल पर्यटन बोर्ड की शुरुआती सूची के मुताबिक 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक हैं। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय पर्यटक और 37 एनआरआई शामिल बताए गए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, पर्यटन बोर्ड ने साफ किया है कि यह शुरुआती सूची है और स्थानीय प्रशासन तथा सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर इसका सत्यापन किया जा रहा है। ऐसे में आंकड़े आगे बढ़ सकते हैं।
👉कैलाश मानसरोवर यात्रियों की भी तलाश

बाढ़ की चपेट में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए यात्रियों के आने की भी जानकारी सामने आई है। काठमांडो की टच कैलाश ट्रैवल्स एंड टूर्स के मुताबिक, करीब 390 तीर्थयात्रियों को बुधवार को सीमा पार करनी थी, जिनमें 93 नेपाली नागरिक थे। बाढ़ के बाद कई यात्रियों से संपर्क नहीं हो सका। ट्रैवल एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन यात्रियों की लोकेशन पता करने और उनसे संपर्क स्थापित करने में जुटे हैं। रासुवा जिले का टिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाका बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित बताया जा रहा है। रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र में सीमा शुल्क परिसर में खड़े कई वाहन और सामान पानी में बह गए। एक नया पुल भी बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो गया। स्याप्रुबेसी, बेत्रावती, मैलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार समेत कई इलाकों में बाढ़ का असर देखा गया है।
धादिंग के गजुरी में भी एक पुल बह गया। चीन के साथ नेपाल के व्यापार के लिए अहम रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र की आधारभूत संरचना को भी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ से नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र को भी बड़ा झटका लगा है। प्रभावित इलाकों में संचालित आठ जलविद्युत परियोजनाओं की कुल क्षमता करीब 354 मेगावाट बताई गई है। इसके अलावा रासुवा और नुवाकोट में निर्माणाधीन पांच परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। इनमें 111 मेगावाट की रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना, 78 मेगावाट की संजेन खोला परियोजना और 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3ए परियोजना शामिल हैं।
👉सेना और पुलिस ने संभाला मोर्चा

बाढ़ के बाद नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान में लगाया गया है। लापता लोगों की तलाश के लिए हेलीकॉप्टर, ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है। नेपाल सेना के मुताबिक, स्याफ्रुबेसी से छह, मैलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। त्रिशूली में आपात चिकित्सा सुविधा भी शुरू की गई है। लोगों से नदी किनारे नहीं जाने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की अपील की गई है।
👉भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही के बाद भारत ने भी मदद की पेशकश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर हादसे में हुई मौतों पर संवेदना जताई और हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया है।भारत की ओर से नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजी जा रही है, जिसमें दवाएं, राशन और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने की तैयारी है। साथ ही बचाव और राहत अभियान में मदद के लिए एनडीआरएफ की टीम भेजने की भी तैयारी की जा रही है।
👉बिहार और यूपी में भी अलर्ट

नेपाल में बाढ़ के बाद भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी चिंता बढ़ गई है। नेपाल की त्रिशूली नदी में पानी बढ़ने के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश में संभावित बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। आशंका है कि नेपाल से आने वाली बाढ़ की लहर आगे चलकर गंडक नदी में पहुंच सकती है। इसके मद्देनजर बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाने और जरूरी तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं।
गंडक बैराज के फाटकों को भी पानी के सुरक्षित निकास को ध्यान में रखते हुए संचालित करने की सलाह दी गई है। नेपाल में भोटे कोशी की बाढ़ ने तबाही का ऐसा मंजर दिखाया है, जिसमें जान-माल के भारी नुकसान के साथ बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने से राहत और बचाव अभियान की चुनौती और बढ़ गई है। सबसे बड़ी चिंता अब लापता भारतीय पर्यटकों और कैलाश मानसरोवर यात्रियों की सुरक्षित वापसी को लेकर है।
