चंडीगढ़ । चंडीगढ़ में इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर की मौत के मामले में एक अहम जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, मनजीत की ऑटोप्सी रिपोर्ट से पता चला है कि मौत के समय वह करीब 7 हफ्ते की प्रेग्नेंट थीं।
बता दें कि मनजीत का अपहरण करके उन्हें मोरिंडा के पास जंगल वाले इलाके में ले जाकर पेड़ से बांधकर जला दिया गया था।
गंभीर रूप से झुलसने के बाद वह कई हफ्तों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझती रहीं और फिर चंडीगढ़ के PGIMER में सेप्सिस के कारण आखिरकार 26 अगस्त को उनकी मौत हो गई। पीजीआई के प्रवक्ता ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि PGI के रिकॉर्ड में शुरू में कौर की चोट को एलपीजी सिलेंडर लीक से लगी 40 से 45 प्रतिशत जलन बताया गया था।
मनजीत को पहले एक निजी अस्पताल में इलाज के बाद PGIMER रेफर किया गया था। जहां उनका बर्न आईसीयू में इलाज किया गया और उन्हें विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया। प्रवक्ता ने बताया कि डॉक्टरों की पूरी कोशिश के बावजूद उनकी हालत बिगड़ती गई और संक्रमण का असर शरीर के जरूरी अंगों पर पड़ने लगा। उन्हें वेंटिलेटर और दूसरी जरूरी क्रिटिकल केयर दी गई, लेकिन उनकी हालत लगातार खराब होती चली गई।
👉सेक्टर 34 थाने में दर्ज किया गया केस

आखिरकार इस मामले में चंडीगढ़ के सेक्टर 34 थाने में केस दर्ज किया गया है और चंडीगढ़ पुलिस ने जांच अपने हाथ में ले ली है। हालांकि, सेक्टर 34 थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) का कहना है कि पुलिस को करीब दो महीने पुराने मामले की जांच पीछे से शुरू करनी पड़ रही है।
सेक्टर 34 थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर शादी लाल ने कहा, “हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह करीब दो महीने पुराना मामला है। जब तक हमने सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया, तब तक ज़रूरी रिकॉर्डिंग ओवरराइट हो चुकी थी। टोल प्लाजा आम तौर पर सिर्फ 15 दिनों तक ही फुटेज रखते हैं।”
पुलिस के सामने सबसे बड़ी पहेलियों में से एक वह गाड़ी है, जिसमें मनजीत को कथित तौर पर ले जाया गया था। अधिकार क्षेत्र को लेकर दोनों पुलिस विभागों के बीच मामला चलता रहा। चंडीगढ़ पुलिस का कहना है कि अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि मनजीत को ले जाने के लिए किस गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस चंडीगढ़ से मोरिंडा तक का रास्ता भी दोबारा खंगाल रही है।
👉पुलिस के पास नहीं कोई ठोस सुराग

एसएचओ ने कहा, “हम उपलब्ध सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं। हमने सेक्टर 34 और रास्ते के पास की दुकानों और पेट्रोल पंप के फुटेज भी देखे हैं। लेकिन गाड़ी या आरोपी के बारे में कोई साफ सुराग नहीं मिला है। यहां तक कि मां को भी कुछ पता नहीं है। अगर हमें गाड़ी के बारे में पता होता, तो आसानी होती।”
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, “फिलहाल, हमारे पास कोई ठोस सुराग नहीं है। अब मोबाइल फोन ही मदद कर सकता है।” पुलिस अब यह भी जांच सकती है कि डिजिटल सबूत उन कमियों को पूरा करने में कितनी मदद कर सकते हैं, जो सीसीटीवी फुटेज जैसे अहम सबूतों के खत्म हो जाने से पैदा हुई हैं।
फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद इस मामले के सवाल और भी बदल गए हैं। ऑटोप्सी रिपोर्ट ने इस केस में अब तक का सबसे चौंकाने वाला पहलू सामने रखा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कौर लगभग सात हफ्ते की प्रेग्नेंट थीं। कथित हमले के समय वह प्रेग्नेंट थीं और उस दौरान उनका PGIMER में इलाज चल रहा था।
👉क्यों दर्ज नहीं किया गया मनजीत का बयान
मोहाली के SSP हरमंदीप सिंह हंस ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मनजीत का अपहरण सेक्टर 34 में हुआ था और यह मामला चंडीगढ़ पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस मामले में सबसे परेशान करने वाला सवाल यह भी है कि जब मनजीत कथित तौर पर बोलने की स्थिति में थीं, तब उनका बयान क्यों दर्ज नहीं किया गया।
चंडीगढ़ पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, PGIMER में होश में आने के बाद मनजीत अपना बयान देना चाहती थीं। इसके बाद संस्थान ने कथित तौर पर खरड़ पुलिस को इसकी जानकारी दी, लेकिन पुलिसकर्मी पीजीआई नहीं पहुंचे। 26 अगस्त को मनजीत की मौत के बाद अब उनके मुंह से सीधे यह जानने का मौका खत्म हो गया है कि उनके साथ आखिर क्या हुआ था।
उनकी मौत के बाद पुलिस ने उनकी मां कांता देवी का बयान दर्ज किया है और कथित अपहरण और हमले से जुड़ी परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है। इस जांच के पीछे एक ऐसा परिवार है, जिसके पास अब जवाब से ज्यादा सवाल हैं। परिवार अब काफी हद तक पुलिस की जांच पर निर्भर है, ताकि मनजीत की जिंदगी के आखिरी कुछ हफ्तों में उनके साथ क्या हुआ, इसका पता लगाया जा सके।
👉तलाकशुदा थीं मनजीत कौर
मनजीत का तलाक हो चुका था और उनका सात साल का एक बेटा है, जो अपने पिता के साथ रहता है। उनकी मां के अलावा मनजीत का 11 साल का छोटा भाई ही परिवार का दूसरा करीबी सदस्य बताया जा रहा है। जांच कर रही पुलिस गवाहों के बयान, डिजिटल सबूत, उपलब्ध CCTV फुटेज और मनजीत के फोन से हुई बातचीत की जांच कर रही है। इसका मकसद घटना से पहले और उसके आसपास मनजीत की गतिविधियों का पता लगाना और उन लोगों की पहचान करना है, जो उनके संपर्क में थे।
पुलिस मनजीत की सोशल मीडिया एक्टिविटी की भी जांच कर रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उन्हें सोशल मीडिया पर बातचीत को लेकर किसी विवाद या कहासुनी की जानकारी मिली है। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस विवाद का कथित हमले से कोई संबंध था।
चंडीगढ़ पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, “साइबर सेल उनकी ऑनलाइन एक्टिविटी, बातचीत और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड की जांच करेगा। इससे उन लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जिनसे उनका विवाद हो सकता था या जो कथित घटना के समय उनके संपर्क में थे।”
पंजाब के DGP गौरव यादव ने पूरे मामले की वरिष्ठ स्तर पर जांच के आदेश दिए हैं। यादव ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने SSP को मामले की वरिष्ठ स्तर पर जांच कराने के लिए कहा है। यह कदम ऐसे समय में आया है, जब चंडीगढ़ में केस दर्ज हो चुका है और चंडीगढ़ पुलिस ने जांच अपने हाथ में ले ली है।
चंडीगढ़ की SSP कंवरदीप कौर ने कहा, “यह मामला हमारे पास करीब डेढ़ महीने बाद आया है। या तो पीड़िता को गाड़ी के बारे में पता था या आरोपी को, इनके अलावा कोई और नहीं जानता। हम इन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले का सबसे अहम सुराग गाड़ी है और वही अभी गायब है।”
