कोरबा।प्रदेश की ऊर्जा राजधानी कोरबा में बिजली का मुद्दा अब सिर्फ बिल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सियासत का नया करंट बन गया है। स्मार्ट मीटर, महंगे बिजली बिल और महंगाई को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जिला कांग्रेस कार्यालय, टीपी नगर में हुई प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री नोबेल वर्मा, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल सहित कांग्रेस नेताओं ने सरकार की बिजली नीति पर जमकर निशाना साधा।
मुद्दा बिजली का था, लेकिन प्रेस वार्ता में सियासी वोल्टेज हाई नजर आया। कांग्रेस नेताओं ने स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार को घेरते हुए सवाल उठाए कि आखिर जिस कोरबा की पहचान ही बिजली उत्पादन से है, उसी पावर हब के उपभोक्ताओं को बिजली बिल और स्मार्ट मीटर को लेकर परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है?
👉‘बिजली-पानी हमारा, मीटर अडानी का’… नोबेल के बयान ने बढ़ाया करंट

स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर पूर्व मंत्री नोबेल वर्मा ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “बिजली-पानी हमारा, मीटर अडानी का।” बयान सामने आते ही स्मार्ट मीटर का मुद्दा सीधे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया।
कांग्रेस का आरोप है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था से आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। पार्टी नेताओं ने बिजली बिल में बढ़ोतरी और मीटर व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
👉पावर हब में ही ‘बिजली का झटका’, कांग्रेस ने पूछा सवाल
कोरबा में बड़े-बड़े बिजली संयंत्र हैं। यहां से निकलने वाली बिजली प्रदेश ही नहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचती है। ऐसे में कांग्रेस ने सरकार पर सवाल दागते हुए कहा कि जिस शहर की पहचान बिजली से है, वहां के आम उपभोक्ता ही बिजली बिल के बोझ से क्यों जूझें?
कांग्रेस नेताओं ने स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली, बिलिंग व्यवस्था और उपभोक्ताओं की शिकायतों को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
👉बिजली बिल से महंगाई तक, सरकार को घेरने की पूरी तैयारी
प्रेस वार्ता में कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर के साथ महंगे बिजली बिल और महंगाई को भी राजनीतिक हथियार बनाया। नेताओं ने कहा कि आम आदमी पहले ही महंगाई की मार झेल रहा है और ऐसे में बिजली बिल का बढ़ता बोझ उसकी परेशानी और बढ़ा रहा है।
कांग्रेस ने सरकार से बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता, स्मार्ट मीटर की शिकायतों की जांच और उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान की मांग की।
👉अब देखना है ‘करंट’ किस तरफ जाता है!
कोरबा में स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस के इस हमले ने बिजली के मुद्दे को फिर से सियासी सुर्खियों में ला दिया है। नोबेल वर्मा के ‘बिजली-पानी हमारा, मीटर अडानी का’ वाले बयान ने बहस को और चटपटा कर दिया है।
