रायपुर । छत्तीसगढ़ अब अपनी पहचान सिर्फ खनिजों की खदानों और उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहता. राज्य सरकार की नजर अब खनिज से लेकर तैयार उत्पाद तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश में अन्वेषण, उत्खनन और प्रसंस्करण के साथ-साथ वैल्यू एडिशन, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा दिया जाएगा. नवा रायपुर में आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की आठवीं किश्त के रोड शो में मुख्यमंत्री ने निवेशकों से छत्तीसगढ़ के खनिज संसाधनों की संभावनाओं का लाभ उठाने और नीलामी में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की.
क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की नीलामी की आठवीं किश्त में देश के 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स शामिल हैं. इनमें 5 ब्लॉक्स छत्तीसगढ़ के हैं. सरकार के मुताबिक प्रदेश में कटघोरा और बस्तर में लिथियम और दुर्लभ मृदा तत्व, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम और गैलियम, बालोद में फास्फोराइट तथा महासमुंद में निकेल, क्रोमियम और ग्लाकोनाइट जैसे खनिजों की संभावनाएं हैं.मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन ब्लॉक्स की नीलामी को सिर्फ खदान हासिल करने के अवसर के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. इससे प्रदेश में प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, तकनीकी विकास और नए उद्योगों के लिए रास्ता खुल सकता है.
👉लिथियम और रेयर अर्थ पर सरकार की नजर

सरकार का फोकस ऐसे खनिजों पर है, जिनकी जरूरत भविष्य की टेक्नोलॉजी और रणनीतिक क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा उद्योग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, बैटरी, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग में क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका अहम है. लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, निकेल और क्रोमियम जैसे खनिजों की लगातार और सुरक्षित आपूर्ति भारत की आर्थिक प्रगति के साथ-साथ रणनीतिक जरूरतों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
👉सिर्फ खनिज निकालना नहीं, प्रदेश में ही होगा वैल्यू एडिशन

छत्तीसगढ़ सरकार अब खनिज निकालकर दूसरे राज्यों या देशों में भेजने के बजाय प्रदेश में ही उससे जुड़े उद्योग विकसित करने पर जोर दे रही है. सरकार का लक्ष्य है कि माइनिंग से प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक का इकोसिस्टम छत्तीसगढ़ में तैयार हो. नवा रायपुर में AI आधारित डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, जबकि राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं. सरकार का मानना है कि राज्य के खनिज संसाधन इन उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकते हैं.
👉400 करोड़ से 16 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंचा खनिज राजस्व

मुख्यमंत्री ने राज्य के बढ़ते खनिज राजस्व का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक छत्तीसगढ़ बनने के समय राज्य का खनिज राजस्व करीब 400 करोड़ रुपये था. ढाई साल पहले यह लगभग 12 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. सरकार का कहना है कि खनिज से मिलने वाले राजस्व को विकास और जनकल्याण के कामों में लगाया जा रहा है. जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के जरिए खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम किए जा रहे हैं.
👉ढाई साल में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू
खनिज विभाग के संचालक और CMDC के प्रबंध निदेशक रजत बंसल ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं. इस दौरान 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे भी पूरा किया गया. उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में छत्तीसगढ़ को करीब 16,700 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व मिला, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 98 फीसदी है. प्रदेश में अब तक 65 खनिज ब्लॉक्स की नीलामी हो चुकी है. इनसे करीब चार लाख करोड़ रुपये के संभावित राजस्व की उम्मीद जताई गई है.
👉देश में 56 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की सफल नीलामी
केंद्रीय खान मंत्रालय के सचिव केशव चंद्र ने बताया कि केंद्र सरकार अब तक 88 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी प्रक्रिया शुरू कर चुकी है. इनमें से 56 ब्लॉक्स की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है. उन्होंने बताया कि भारत का पहला लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक छत्तीसगढ़ का कटघोरा लिथियम एवं रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक रहा है.
👉ई-रेत संगवारी और टिन पोर्टल की भी शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल और टिन पोर्टल भी लॉन्च किया. ई-रेत संगवारी के जरिए प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था को आसान और पारदर्शी बनाने की कोशिश है. वहीं टिन पोर्टल के जरिए दंतेवाड़ा क्षेत्र में टिन से जुड़े आदिवासी समुदायों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का लक्ष्य है. कार्यक्रम में CMDC ने इंडियन ओवरसीज बैंक और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ समझौते भी किए. इनमें वित्तीय सहयोग के अलावा कोरन्डम कटिंग-पॉलिशिंग और कौशल विकास से जुड़े प्रावधान शामिल हैं.
👉सरकार का बड़ा लक्ष्य—खनन से मैन्युफैक्चरिंग तक
मुख्यमंत्री साय के संदेश का सार साफ है—छत्तीसगढ़ अब केवल ‘खनिज निकालने वाला राज्य’ नहीं रहना चाहता. सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में मौजूद क्रिटिकल मिनरल्स का इस्तेमाल करके माइनिंग से लेकर प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और आधुनिक विनिर्माण तक पूरी वैल्यू चेन तैयार की जाए. इससे सरकार को उम्मीद है कि निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग आएंगे और प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
