हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोरबा । पावर हाउस रोड स्थित सुनालिया पुल और चौक के पास संकरी सड़क त्यौहारी सीजन गणेशोत्सव के बीच शहरवासियों का सिरदर्द बढ़ा रही है।
गुणवताहीन मरम्मत कार्य की वजह से बरसात में पूरी तरह उखड़ चुकी सड़क में बजरी एवं गर्दा (धूल) उड़ने की वजह से राहगीर धूल फाँकने पर मजबूर हैं तो वहीं इस मार्ग में ट्रैक्टर,बसों के दिन में भी परिचालन की वजह से सुबह से शाम तक लग रही जाम से जनता हलाकान हो रही।

बुधवार को दोपहर
12.15 बजे करीब आधा घण्टे तक जाम लगा रहा। जिससे लोग खासकर दुपहिया वाहन चालक बेहद परेशान दिखे।एम्बुलेंस तक फंसी रही। आम जनता इन तमाम अव्यवस्थाओं के लिए स्थानीय निगम प्रशासन ,शासन को कोसते नजर आए। साथ ही लोगों ने हैरानी जताई कि जिला प्रशासन के जिम्मदार अधिकारियों के संज्ञान में यह अव्यवस्था कैसे नजर नहीं आ रही। पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा इस मार्ग में त्यौहारी सीजन में भारी वाहनों के दिन में परिचालन पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। लेकिन इस बार अब तक इस तरह की जनहितकारी कोई व्यवस्था नजर नहीं आ रही। गणेशोत्सव से शुरू हुई त्यौहारी सीजन अब लगातार 2 माह तक जारी रहेगी। शारदीय नवरात्रि, दीपावली,देवउठनी एकादशी तक बाजार में रौनक रहती है। ऐसे में इस मार्ग आमजन को इन अव्यवस्थाओं से दो चार होना पड़ेगा।

👉सुनालिया अंडरपास का काम 2 साल से अटका
पुराने शहर की शुरुआत टीपी नगर के बाद सुनालिया पुल से पावर हाउस रोड के जरिए होती है। कोरबा का यह पूरा इलाका व्यापार का केंद्र बिंदु है. बड़ा थोक व्यापार यही से होता है। पूर्व सांसद, पूर्व महापौर से लेकर पूर्व मंत्री और वर्तमान महापौर का निवास भी पुराने शहर में है। ग्रामीण क्षेत्र से भी बड़ी तादात में लोग पुराने शहर आते हैं। रेलवे स्टेशन पहुंचने के लिए भी लोग इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। हर दिन बड़ी तादात में लोग यहां से सफर करते हैं।
पिछले कुछ सालों से इस स्थान पर जाम की समस्या इतनी विकराल हो गई है कि वाहनों के पहिए सुनालिया पुल पर पहुंचते पहुंचते थम जाते हैं। यातायात का दबाव तेजी से बढ़ा है. खासतौर पर सुबह के समय जब मार्केट खुलता है और शाम 5 बजे के बाद वाहनों की गति यहां धीमी हो जाती है। छुट्टी वाले दिन और त्योहारी सी तो लोग यहां घंटों फंस जाते हैं।
इसी जाम को खत्म करने और लोगों को परेशानी से मुक्त करने 2 साल पहले सुनालिया फाटक पर अंडरपास के निर्माण की योजना बनी। इसके लिए 30 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृति दी गई, जिसकी नोडल एजेंसी पीडब्ल्यूडी की सेतु निगम है। अक्टूबर 2024 में अंडरपास के निर्माण के लिए मकानों को तोड़ा गया। 3 करोड़ 30 लाख रुपये का मुआवजा बांटा गया। लेकिन प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद भी अंडरपास का काम शुरू नहीं हो सका। अंडरपास की प्रक्रिया अभी फाइलों में फंसी हुई है।
👉रेलवे और नगर निगम के बीच फंसा अंडरपास
जानकारी के अनुसार रेलवे ने इस फाटक से अपने नेटवर्किंग और केबलिंग को हटा लिया है, यह काम पूर्ण हो चुका है। रेलवे लाइन के पास से नगर निगम की पाइपलाइन गुजर रही है, जिसे शिफ्ट किया जाना है। नगर निगम का कहना है कि इसके लिए रेलवे से अनुमति नहीं मिल रही है, जबकि रेलवे का कहना है कि सारी अनुमति दी जा चुकी है। एक सर्वे का काम शेष है, जो टेंडर जारी होने और वर्क ऑर्डर करने के बाद भी किया जा सकता है। अब राज्य शासन को काम आगे बढ़ाना है. इसमें 50-50 फ़ीसदी की हिस्सेदारी राज्य शासन और रेलवे की है। दो विभागों में सामंजस्य की कमी की वजह से अंडरपास की प्रक्रिया फंसी हुई है। अंडरपास की कुल लागत 30 करोड़ रुपए है।
