KORBA : एक ही नंबर पर 2 गाड़ी ! युवक ने दिखाई सूझबूझ ,पकड़कर किया पुलिस के हवाले ,आरोपी गिरफ्तार …

कोरबा। एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर दो अलग-अलग गाड़ियां चलाने का मामला सामने आया है। बिक चुकी एक्टिवा का नंबर प्लेट हीरो होंडा स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर लगाकर घूम रहे अरुण सिंह को शिकायतकर्ता लोकेश अग्रवाल ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। मामले में मानिकपुर पुलिस ने मोटरसाइकिल जब्त कर आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।

जानकारी के मुताबिक, 27 अक्टूबर को लोकेश अग्रवाल ग्राम दादर की ओर से रविशंकर नगर कॉलोनी की तरफ आ रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर एक हीरो होंडा स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर पड़ी, जिस पर सीजी 12 बीपी 4887 नंबर की प्लेट लगी हुई थी। यह नंबर उनके भाई अंचल अग्रवाल द्वारा खरीदी गई सेकंड हैंड एक्टिवा का है।

एक ही नंबर की प्लेट दूसरी गाड़ी पर देखकर लोकेश को संदेह हुआ। उन्होंने बाइक सवार का पीछा किया और रास्ते में उसे रोक लिया।

बाइक चला रहे अरुण सिंह से पूछताछ करने पर वह कथित तौर पर नशे की हालत में था और ठीक से जवाब नहीं दे पा रहा था। इसके बाद लोकेश उसे लेकर मानिकपुर पुलिस चौकी पहुंचे। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके भाई अंचल अग्रवाल ने अरुण सिंह से ही एक्टिवा खरीदी थी, जिसका पंजीयन नंबर सीजी 12 बीपी 4887 है। इसके बावजूद इसी नंबर की प्लेट स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर लगाकर चलाई जा रही थी।

👉दूसरे की गाड़ी पर आ सकती थी आंच

एक ही नंबर की प्लेट दो अलग-अलग वाहनों पर इस्तेमाल किए जाने से किसी हादसे या आपराधिक वारदात की स्थिति में वाहन के वास्तविक मालिक को परेशानी हो सकती थी। इसी आशंका को देखते हुए लोकेश अग्रवाल ने पुलिस से संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लोकेश ने बताया कि उसके भाई अभी रायपुर में हैं जिनके पास यह एक्टिवा है और उसके नंबर लगी बाइक कोरबा में चल रही है।

मानिकपुर पुलिस चौकी प्रभारी परमेश्वर राठौर के मुताबिक, पुलिस ने मोटरसाइकिल जब्त कर अरुण सिंह के खिलाफ कार्रवाई की है। शराब के नशे में वाहन चलाने के मामले में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 तथा फर्जी नंबर प्लेट लगाकर वाहन चलाने के मामले में धारा 50 और 177 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। इसके अलावा धारा 170 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई है। आरोपी को गिरफ्तार कर वैधानिक कार्रवाई की गई।

👉नंबर प्लेट गिरने पर लगाया दूसरी गाड़ी का नंबर

लाल घेरे में आरोपी अरुण सिंह
पुलिस के अनुसार, अरुण सिंह ने अपनी एक्टिवा अंचल अग्रवाल को बेच दी थी। इसके बाद उसने करीब 40 हजार रुपये में किसी अन्य व्यक्ति से स्प्लेंडर मोटरसाइकिल खरीदी थी। अरुण का कहना था कि मोटरसाइकिल की वास्तविक नंबर प्लेट रास्ते में कहीं गिर गई थी। बिना नंबर प्लेट वाहन चलाने पर कार्रवाई से बचने के लिए उसने घर पर मौजूद अपनी पुरानी एक्टिवा की नंबर प्लेट मोटरसाइकिल पर लगा ली थी।
पुलिस ने अरुण सिंह को हिदायत दी है कि वह मोटरसाइकिल पर उसका वास्तविक पंजीयन नंबर लगाकर ही वाहन चलाए। अरुण ने भी आगे से सही नंबर प्लेट लगाकर ही मोटरसाइकिल चलाने का भरोसा दिया है।