प्रतिबंध के बावजूद हसदेव अरण्य में परसा कोल ब्लॉक के दूसरे चरण के लिए एक बार फिर पेड़ों की कटाई शुरू,तिरंगे , लाठियां लेकर प्रस्तावित खदान के पास डटे ग्रामीण,बड़ी संख्या में फोर्स तैनात

प्रतिबंध के बावजूद हसदेव अरण्य में परसा कोल ब्लॉक के दूसरे चरण के लिए एक बार फिर पेड़ों की कटाई शुरू,तिरंगे , लाठियां लेकर प्रस्तावित खदान के पास डटे ग्रामीण,बड़ी संख्या में फोर्स तैनात

रायपुर। हसदेव अरण्य में मनाही के बावजूद परसा कोल ब्लॉक के दूसरे चरण के लिए एक बार फिर पेड़ों की कटाई शुरू की गई है। इससे आंदोलन कर रहे आदिवासियों ने नाराजगी जताई है और वे महिलाओं और बच्चों के साथ तिरंगे और लाठियां लेकर प्रस्तावित खदान के पास डट गए हैं, वहीं भारी संख्या में पुलिस फोर्स खदान के भीतर रुकी हुई है।

कटाई रोकने की पुरजोर कोशिश

हसदेव बचाओ आंदोलन के संयोजक उमेश्वर आर्मो ने बताया कि मंगलवार को करीब तीन सौ की संख्या में पुलिस बल ने कटाई के लिए मजदूरों को लेकर घाटबर्रा में घुसने की कोशिश की। जब ग्रामीणों का विरोध हुआ तो उन्होंने परसा कोल ब्लॉक के फेस वन से एक नया रास्ता मजदूरों से तैयार करवाया, लेकिन आंदोलनकारी वहां भी पहुंच गए हैं। मौका देखते ही पुलिस की मदद से कंपनी के लोग पेड़ों की कटाई शुरू करने की तैयारी में है।

पेड़ों की कटाई के लिए दर्जनों मशीनें

पुलिस फोर्स के साथ पेड़ों की कटाई के लिए करीब 35 मशीनों को भी लाकर रख दिया गया है। पेड़ों की कटाई में फेस वन में काम कर रहे मजदूरों के अलावा छत्तीसगढ़ से बाहर के भी मजदूरों को बुलाया गया है। इस समय भी पुलिस बल और मजदूरों को खदान के भीतर रोक कर रखा गया है। आर्मो ने कहा कि हसदेव के जंगलों से पेड़ों की कटाई किसी भी कीमत पर नहीं होने दी जाएगी। गांव के लोग रात दिन यहां पहरा दे रहे हैं।

हाथों में तिरंगा और संविधान की प्रतियां

यहां कटाई के लिए प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने हाथ में तिरंगा और संविधान की प्रतियां ले रखी हैं, जिसमें जंगल पर आदिवासियों के अधिकार को सर्वोपरि बताया गया है। गौरतलब है कि विगत 2 मार्च 2022 से ही हसदेव खदान के विरोध में हरिहरपुर गांव में स्थानीय लोग अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे है।

अवैध कटाई के खिलाफ आंदोलन की तैयारी

रायपुर में छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन से जुड़े लोगों की बैठक हुई जिसमे हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन के लिए जंगल की कटाई की पुन: तैयारियों की तीखी निंदा की गई और इसके खिलाफ जन प्रतिरोध आन्दोलन शुरू करने का फैसला किया गया। पेड़ों की कटाई का फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब 2 मार्च 2022 से ही हसदेव में हरिहरपुर गांव में स्थानीय लोग अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे है। राज्य की विधानसभा ने भी सर्वसम्मति से हसदेव की सारी खदानों को रद्द करने का संकल्प पारित किया था। इस प्रस्ताव के बावजूद वनों की कटाई की पुन: तैयारी दिखाती है कि सरकार पर कॉर्पोरेट दबाव हावी है और सरकार अडानी के पक्ष में लाखों पेड़ों की कटाई के लिए तैयार है।इस संबंध में जारी बयान में कहा गया है कि अब यह कटाई उस पेसा कानून के भी खिलाफ़ है, जिसके बारे में सरकार ने यह प्रचारित किया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदाय किसी भी प्रकार का निर्णय लेने के लिए सशक्त एवं स्वतंत्र है, जबकि स्थानीय आदिवासी समुदाय इस खनन के खिलाफ खड़ा है।रायपुर में आयोजित इस बैठक में हसदेव बचाओ आंदोलन से प्रथमेश मिश्रा, साकेत तिवारी, बी.आर.कौशिक, चन्द्र प्रदीप वाजपेयी, श्रेयांश बुधिया, एस. वर्मा, ग्रीन आर्मी रायपुर से गुरदीप टुटेजा, प्रसिद्ध रंगोली आर्टिस्ट प्रमोद साहू, रायपुर एवेंजर से समीर वेंस्यानी, इसके साथ ही रायपुर से प्रियंका उपाध्याय, ओमेश बिसेन, एस आर नेताम एवं छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन से बिजय भाई, संजात पराते और आलोक शुक्ला शामिल हुए।

रायपुर