कोरबा। आकांक्षी जिला कोरबा में अधोसंरचनात्मक विकास कार्यों के लिए राशि तो जारी कर दी जा रही है लेकिन उस फंड की उपयोगिता को लेकर सतत समीक्षाएं नहीं होने की वजह से स्वीकृत कार्य कराए बगैर निर्माण एजेंसियां राशि आहरण कर बैठी हैं,जिससे लोगों को उक्त कार्यों का शासन -प्रशासन की मंशानुरूप लाभ नहीं मिल पा रहा है।सोमवार को कलेक्टोरेट में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया जहां ग्राम पंचायत नकिया के आश्रित ग्राम खम्होन के राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवाओं ने 6 साल से
बंद पड़े स्कूल व आंगनबाड़ी निर्माण को शुरू करा कर शासकीय राशि दबाने वालो पर कार्रवाई की मांग की है।

यहां बताना होगा कि जनपद पंचायत कोरबा अंर्तगत ग्राम पंचायत नकिया के आश्रित ग्राम खम्होन में 6 वर्ष पूर्व जिला खनिज संस्थान न्यास मद से आंगनबाड़ी व स्कूल भवन स्वीकृत हुआ था। निर्माण कार्य के लिए 40 प्रतिशत अग्रिम राशि भी बकायदा जारी किया गया था।लेकिन भ्रष्ट सरपंच व सचिव ने राशि निकालकर गड्ढा खोदकर छोड़ दिया है।जिससे शासन की मंशानुरूप उक्त अधोसंरचनात्मक कार्य का ग्राम को लाभ नहीं मिल सका। जनपद से राशि आहरित करने के बाद भी कार्य पूर्ण न होने से नाराज पहाड़ी कोरवा आदिवासियों ने कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर निर्माण कार्य को शुरू कराने और शासकीय राशि निकालकर निजी उपयोग करने वाले जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई की मांग की है।
शासन की मंशा पर लग रहा पलीता
स्कूल निर्माण में हो रही देरी से आदिवासियों के बच्चों को शिक्षित करने की सरकार की मंशा पर पलीता लगा रहा है। शिकायत करने वाले कोरवा आदिवासियों ने कहा कि समय पर स्कूल निर्माण पूर्ण न होने से बच्चे शिक्षा ग्रहण करने से वंचित हो गए हैं।
तो क्या दफ्तर में बैठे जिम्मेदार कर रहे मॉनिटरिंग
राशि जारी करने के बाद भी 6 साल से स्कूल व आगंनबाड़ी भवन निर्माण तैयार नहीं हो पाने में जितने शासकीय राशि डकारने वाले तत्कालीन सरपंच सचिव जिम्मेदार हैं उतने ही इन वर्षों में जनपद पंचायतों में पदस्थ रहे अफसर जिम्मेदार हैं। जिन्होंने उक्त कार्यों की सतत संवीक्षा करना और जिला प्रशासन को इससे अवगत कराना मुनासिब नहीं समझा ,नतीजन जहाँ लाखों रुपए डकार लिए गए वहीं आज ग्रामीण ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।