रायपुर । छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित डीएमएफ घोटाला प्रकरण में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी ने उन्हें रायपुर के विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया जहां सुनवाई के उपरांत न्यायालय ने 6 दिन की कस्टोडियल रिमांड मंजूर की। अब ईओडब्ल्यू की टीम 25 फरवरी तक उनसे विस्तृत पूछताछ करेगी।
प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। जांच में सामने आया है कि जिला खनिज न्यास कोरबा के फंड से विभिन्न निविदाओं के आवंटन में व्यापक वित्तीय अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में कुछ ठेकेदारों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा संकलित तथ्यों के अनुसार निविदा प्रक्रिया में संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी तथा कथित बिचौलियों मनोज कुमार द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर के साथ मिलकर अनियमित तरीके से धन अर्जित किया गया।
👉कमीशन वितरण का आरोप

जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि डीएमएफ के कार्य परियोजनाओं में कमीशन का बंटवारा किया गया। आरोपों के अनुसार, कलेक्टर को 40 प्रतिशत, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को 5 प्रतिशत, अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) को 3 प्रतिशत तथा उप अभियंता को 2 प्रतिशत तक कमीशन दिया गया। बताया गया है कि फंड खर्च के नियमों में संशोधन कर सामग्री आपूर्ति, प्रशिक्षण, कृषि उपकरण, खेल सामग्री एवं चिकित्सकीय उपकरण जैसी नई श्रेणियां जोड़ी गईं, जिससे आवश्यक विकास कार्यों को दरकिनार कर अधिक कमीशन वाले कार्यों को स्वीकृति दी जा सके।
👉575 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की जांच

कोरबा में 575 करोड़ रुपये से अधिक के डीएमएफ घोटाले की जांच के दौरान ये तथ्य उजागर हुए हैं। इसकी पुष्टि रायपुर न्यायालय में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा प्रस्तुत लगभग 6 हजार पृष्ठों के चालान से हुई है। फिलहाल ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही पूछताछ के बाद मामले में और भी अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
