रायपुर |छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्रतिष्ठित रामकृष्ण केयर अस्पताल (पचपेड़ी नाका) में मंगलवार की रात लापरवाही की बड़ी कीमत तीन बेगुनाह सफाईकर्मियों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। अस्पताल के पीछे बने सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस के रिसाव से तीन कर्मचारियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य की हालत नाजुक बनी हुई है। मृतकों की पहचान अनमोल मांझी (25), गोविंद सेंद्रे (35) और सत्यम कुमार (22) के रूप में हुई है।
👉 मौत का कुआं साबित हुआ सेप्टिक टैंक

जानकारी के मुताबिक, रात करीब 8 बजे बाहरी कॉन्ट्रैक्ट एजेंसी के माध्यम से इन कर्मियों को टैंक की सफाई के लिए बुलाया गया था। चश्मदीदों के अनुसार, जैसे ही पहला कर्मचारी टैंक के भीतर उतरा, वह जहरीली गैस की चपेट में आकर अचेत हो गया। उसे बचाने की कोशिश में उतरे उसके दो अन्य साथी भी मौत के जाल में फंस गए। चीख-पुकार मचने के बाद चौथे कर्मचारी को किसी तरह बाहर निकाला गया, जिसका उपचार जारी है।
👉सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ीं: परिजनों का फूटा गुस्सा

घटना की खबर मिलते ही मृतकों के परिजनों ने अस्पताल परिसर में धावा बोल दिया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार ने सफाईकर्मियों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण (गैस मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर या हार्नेस बेल्ट) के ही सीधे ‘मौत के टैंक’ में उतार दिया। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल के बाहर पत्थरबाजी की और जमकर नारेबाजी की। एक परिजन का विलाप सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं— “मेरा भाई मुझे लौटा दो, अस्पताल वालों ने उसे मार डाला।”
👉 देर रात तक चला तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा


हंगामे की सूचना मिलते ही टिकरापारा थाना पुलिस समेत भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए परिजनों को अस्पताल के भीतर जाने से रोका, जिसके बाद तनाव और बढ़ गया। शुरुआत में प्रबंधन केवल दो मौतों की बात कहता रहा, लेकिन अंततः तीन शव बरामद होने की पुष्टि हुई।
👉जांच के घेरे में अस्पताल प्रबंधन
सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद हाथ से मैला ढोने और बिना मशीनों के गटर की सफाई करवाने की इस घटना ने प्रशासन पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और लापरवाही के साथ-साथ सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जांच की जा रही है। टिकरापारा पुलिस का कहना है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
