CG : एक दूल्हे ने 2 दुल्हन के साथ लिए 7 फेरे, इस जिले की अनोखी शादी ने बटोरी सुर्खियाँ ….

कोंडागांव । जिले के फरसगांव ब्लॉक अंतर्गत बैलगांव में हाल ही में एक अनोखी शादी चर्चा का केंद्र बन गई है, जहां एक युवक ने दो युवतियों के साथ एक ही मंडप में विवाह रचाया। यह त्रिकोणीय विवाह क्षेत्र में कौतूहल और चर्चा का विषय बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार, बैलगांव निवासी हितेश यादव का दोनों युवतियों—फूलबती नाग और यामिनी देहारी—से पूर्व से ही प्रेम संबंध था। हितेश ने सबसे पहले शंकरपुर (फरसगांव) निवासी फूलबती को विवाह का प्रस्ताव दिया, लेकिन उस समय उसने मना कर दिया। इसके बाद हितेश ने बनियागांव (धनोरा) निवासी यामिनी को शादी के लिए प्रस्ताव दिया, जिसे उसने स्वीकार कर लिया।

हालांकि, बाद में फूलबती ने भी विवाह के लिए सहमति जताई। ऐसे में तीनों पक्षों और उनके परिवारों ने आपसी सहमति से इस अनोखे विवाह का निर्णय लिया। खास बात यह रही कि दोनों दुल्हनों के परिवार बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंचे और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न कराया गया।

इस विवाह में ओबीसी और आदिवासी समाज के लोगों सहित ग्रामीणों की भी बड़ी भागीदारी रही। बताया जा रहा है कि पूरे कार्यक्रम में सामाजिक सौहार्द और सहमति का माहौल देखने को मिला।

हालांकि, इस मामले को लेकर अभी तक किसी भी समाज की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इधर, यह अनोखी शादी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

👉शादी का कार्ड बना चर्चा का विषय

शादी से पहले दूल्हे ने बाकायदा ऐसा विवाह कार्ड छपवाया, जिसमें दोनों दुल्हनों के नाम शामिल थे। यही कार्ड सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ और इस अनोखी शादी को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ गई।

👉पूरे रीति-रिवाज से हुई शादी

हल्दी, बारात, भोज समेत सभी पारंपरिक रस्में पूरे विधि-विधान से निभाई गईं। शादी के बाद दूल्हा और दोनों दुल्हनों ने डीजे की धुन पर जमकर डांस भी किया, जिसमें बाराती और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

👉सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

यह अनोखी शादी अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं—कोई इसे परंपरा का हिस्सा बता रहा है तो कोई इसे बदलते समाज की नई तस्वीर के रूप में देख रहा है।
हालांकि इस तरह की शादियां बहुत कम देखने को मिलती हैं, लेकिन कुछ समुदायों में परंपरा और परिस्थितियों के अनुसार आज भी ऐसी प्रथाएं मौजूद हैं।