CG : यह कैसा सुशासन ? महिला एवं बाल विकास विभाग में DMF के 2.9 करोड़ के फंड के बंदरबाट के शिकायत की कमिश्नर जांच आदेश कलेक्टर कोंडागांव ने ढाई साल से लटकाई , कमिश्नर ने रिमांडर भेज निभाई औपचारिकता ,कार्यशैली पर उठे सवाल …..

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोंडागांव । आदिवासी बाहुल्य कोंडागांव जिले में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास के यहाँ कांग्रेस शासन काल में वित्तीय वर्ष 2022 -23 में डीएमएफ के 2.9 करोड़ के फंड में पांच विकासखंडों के 8 परियोजना के 1473 आंगनबाड़ी एवं 354 मिनी आंगनबाड़ी में रेडी टू ईट फूड एवं मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत् प्राप्त खाद्यान्न के सुरक्षित रखरखाव हेतु प्रदाए किए गए प्लास्टिक कंटेनर की गुणवत्ता की जांच एवं भौतिक सत्यापन कराए जाने संबंधी अनुरोध पत्र के तारतम्य में हुई बंदरबाट के शिकायत की जांच कमिश्नर कार्यालय के आदेश के बावजूद भाजपा शासनकाल में 2 साल बाद भी पूरी नहीं हुई। शिकायतकर्ता के रिमांडर पत्र के बाद कमिश्नर कार्यालय ने कलेक्टर कोंडागांव को पुनः स्मरण पत्र भेज औपचारिकता पूरी की है। सुशासन के सरकार में सरकारी फंड में हुई अनियमितता के शिकायत की जांच कमिश्नर कार्यालय के आदेश के बावजूद 2 साल से लटकाकर जीरो टॉलरेंस के नीति वाली सरकार के प्रति कलेक्टर कोंडागांव अविश्वास की भावना उत्पन्न कर रहे ।

यहाँ बताना होगा कि कमिश्नर (आयुक्त) बस्तर संभाग, जगदलपुर
जिला- बस्तर (छ.ग.) के यहाँ दिनांक 29 .12.2023 के माध्यम से पत्र व्यवहार कर कार्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कांग्रेस शासनकाल में वित्तीय वर्ष 2022-23 में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) से प्राप्त आबंटन 2 करोड़ 9 लाख 81 हजार 580 रूपये की राशि से पांच विकासखंडों के 8 परियोजना के 1473 आंगनबाड़ी एवं 354 मिनी आंगनबाड़ी में रेडी टू ईट फूड एवं मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत प्राप्त खाद्यान्न के सुरक्षित रखरखाव हेतु प्रदाए किए गए प्लास्टिक कंटेनर की गुणवत्ता की जांच एवं भौतिक सत्यापन करने अनुरोध किया गया था।
जिसे संजीदगी से लेते हुए कार्यालय कमिश्नर बस्तर संभाग जगदलपुर ,जिला -बस्तर (छ.ग.)के
यहां से पत्र/ज्ञापन क्रमांक 3588 दिनांक 04.01.2024 को कलेक्टर जिला कोण्डागांव (छ.ग.) को पत्र लेख कर प्रेषित शिकायत पत्र के परिप्रेक्ष्य में नियमानुसार कार्यवाही किया जाकर आवेदक को अवगत कराने का निर्देश दिया गया था। जिसकी प्रतिलिपि शिकायतकर्ता को भी दी गई थी।

👉ढाई साल से कलेक्टर कार्यालय ने लटकाई जांच ,कार्यशैली पर उठ रहे सवाल ….

अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण ही कहें कि तय मियाद के लगभग ढाई वर्ष वर्ष बीतने के उपरांत भी आज पर्यन्त संदर्भित प्रकरण के जांच प्रतिवेदन की प्रतिलिपि आवेदक को प्राप्त नहीं हुई है जिससे आशंका है कि कलेक्टर कार्यालय ने संबंधित विभाग को सीधा खुला संरक्षण देते हुए कमिश्नर कार्यालय की लिखित जांच आदेश की अवहेलना कर दी। एक आई.ए.एस. स्तर के अधिकारी कलेक्टर होते हैं जिनके द्वारा कमिश्नर के आदेशों की अवहेलना घोर प्रशासनिक उदासीनता एवं संदर्भित प्रकरण में उनकी संरक्षण को बयां कर रही है। जिससे छत्तीसगढ़ शासन के जीरो टालरेंस की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

👉 स्मरण पत्र जारी, अनदेखी पर राज्यपाल के यहाँ पहुंचेगा कारनामा

प्रकरण में कार्यालय कमिश्नर बस्तर संभाग जगदलपुर को
पत्र क्रमांक 8712 दिनांक 17 /04 / 2026 को पुनः पत्र व्यवहार कर कलेक्टर कार्यालय के द्वारा प्रकरण में आज पर्यन्त जांच न कर अकर्मण्यता का परिचय दिए जाने के मामले में नियमानुसार जांच का अनुरोध किया गया था। पखवाड़े भर के भीतर (तय मियाद )में जांच नहीं होने पर राज्यपाल के यहाँ प्रकरण में शिकायत की बात कही गई थी। जिसकी प्रतिलिपि मुख्यमंत्री कार्यालय को भी दी गई थी। लिहाजा कार्यालय कमिश्नर कार्यालय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए पत्र क्रमांक 165 दिनांक 23 /04 /2026 के माध्यम से प्रकरण में कलेक्टर कोंडागांव को स्मरण पत्र जारी कर प्रकरण में जांच प्रतिवेदन अपने स्पष्ट अभिमत समेत कार्यालय कमिश्नर बस्तर संभाग ,जगदलपुर को प्रेषित करते हुए आवेदक को उपलब्ध कराने की बात कही है। अब पूरी निगाहें कलेक्टर कोंडागांव की कार्यशैली पर टिकी हुई है।

👉 हो गया है खेला,क्या होगी निष्पक्ष जांच ?

कार्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग को कांग्रेस शासनकाल में वित्तीय वर्ष 2022-23 में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) से प्राप्त आबंटन 2 करोड़ 9 लाख 81 हजार 580 रूपये की राशि में खेला हो गया है। पांच विकासखंडों के 8 परियोजना के 1473 आंगनबाड़ी एवं 354 मिनी आंगनबाड़ी में रेडी टू ईट फूड एवं मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत प्राप्त खाद्यान्न के सुरक्षित रखरखाव हेतु प्रदाए किए गए प्लास्टिक कंटेनर की गुणवत्ता अत्यंत दोयम दर्जे की है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो कई केंद्रों में फूड कंटेनर नियमानुसार दिए ही नहीं गए। जिसकी थर्ड पार्टी से सूक्ष्म जांच की दरकार है।