हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोरबा – (भुवनेश्वर महतो)। सुशासन के सरकार में राजस्व विभाग के मेहरबानी की बदौलत आकांक्षी जिला कोरबा के झाबर (दीपका)में शासकीय पट्टे की भूमि बिना चौहद्दी के रजिस्ट्री हो गई ,यही नहीं बिना कलेक्टर की अनुमति के बिक्री भी हो गई। टुकड़ों टुकड़ों में मुख्य मार्ग से लगी करीब 2 एकड़ जमीन पट्टास्वामी ने बेच डाला । मामले में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से शासकीय पट्टे की बेची गई जमीन पर व्यवसायिक काम्प्लेक्स तैयार हो रहा।

जी हां यह नजारा नगर पालिका दीपका से लगे पाली मुख्य मार्ग पर स्थित झाबर में देखा जा सकता है । पटवारी हल्का नंबर 32 (पूर्व हल्का 49) ग्राम पंचायत झाबर में खसरा नंबर 224 / 6 में छतराम पिता जगतराम निवासी ग्राम खम्हरिया को कृषि भूमि पट्टा (पत्र) प्रदान किया गया है। भू-स्वामी को जीविकोपार्जन के लिए शासन द्वारा पट्टा प्रदान किया गया था लेकिन भू स्वामी ने शासन के नियमानुसार 5 वर्ष के भीतर पट्टे की 75% भूमि को कृषि योग्य भूमि में परिवर्तित कर उपयोग में नहीं लाया जिससे नियमानुसार पट्टा स्वमेव निरस्त हो जाना चाहिए लेकिन पट्टा निरस्त नहीं हुआ। यही नहीं 4 साल पूर्व पट्टाधारी हितग्राही ने पिछले कुछ वर्षों से उक्त भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में बिक्री कर दिया । झाबर ग्राम में हितग्राही को दीपका पाली मार्ग से लगी हुई जमीन का पट्टा प्रदान किया गया है। नगर पालिका दीपका से लगे होने की वजह से उक्त क्षेत्र के भूमि की कीमतों में वर्तमान में बेतहाशा वृद्धि हो चुकी है जिसका फायदा उठाकर भू-स्वामी द्वारा पट्टे की भूमि को कलेक्टर की अनुमति के बिना अवैधानिक रूप से प्लाट काटकर बिक्री कर दी ।
👉बिना चौहद्दी हो गई रजिस्ट्री ,तत्कालीन नायब तहसीलदार ने कर दिया नामांतरण
हैरानी की बात तो यह है कि बिना चौहद्दी के उक्त भूमि की उपपंजीयक हरदीबाजार की मिलीभगत से रजिस्ट्री पूरी हो गई वहीं तत्कालीन नायब तहसीलदार दीपका शशि भूषण सोनी के द्वारा आंख मूंदकर नामांतरण भी कर दिया गया। जबकि उनके पूर्व पदस्थ रहे तत्कालीन नायब तहसीलदार वीरेंद्र श्रीवास्तव ने नामांतरण की अर्जी खारिज कर उच्च अधिकारियों का विधि सम्मत कार्रवाई हेतु ध्यान आकृष्ट भी कराया था। लेकिन उनका तबादला होते ही इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया।
👉बड़े झाड़ खड़े थे फिर भी बना रहे थे मकान ,शिकायत के बाद खड़ा कर दिया था दीवाल,आज तन गई व्यवसायिक काम्प्लेक्स

शिकायत के बाद भी क्रेता को नियमों कार्रवाई का डर नहीं था।4 साल पूर्व किसी की परवाह ना करते हुए शासकीय पट्टे की भूमि पर बड़े झाड़ लगे होने के बावजूद मकान तैयार किया जा रहा था। शुरुआती दौर में विशाल दरवाजा व दीवार खड़ी कर ली गई थी । ताकि उसके बाद चुपके से पेंड काटा जा सके।लेकिन शिकायत के बाद भी राजस्व अमले की संरक्षण की बजह से आज वहाँ व्यवसायिक काम्प्लेक्स तैयार हो रही।

👉पट्टाधारी का पुत्र कोटवार ने किया था खेला
शासकीय पट्टा धारी का पुत्र दिलहरण ग्राम झाबर का दिवंगत कोटवार था । जो पट्टे में प्राप्त करीब 3 एकड़ भूमि में से करीब 2 एकड़ भूमि छोटे छोटे टुकड़ों में दर्जनों लोगों को बेच चुका था ।4 वर्ष पूर्व करीब एक एकड़ जमीन शेष था जिसे शासकीय मद में अंतरित करने की कार्रवाई करनी चाहिए थी। इस बीच कोटवार भी चल बसा। और उक्त जमीन की भी खरीद फरोख्त के आसार हैं।
👉दीपका में लंबे अर्से से चल रहा खेल ,क्या कलेक्टर कसेंगे नकेल!
नगर पालिका दीपका में एक एक इंच जमीन के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। एसईसीएल गेवरा व दीपका परियोजना के 5 हजार से अधिक कर्मचारियों के अलावा निजी पॉवर प्लांट कोल वॉशरी आदि यहां स्थापित हैं। जो लोगों को रोजगार के भी अवसर सुलभ कराते हैं। नतीजन विभिन्न प्रान्तों के लोग यहां आकर बसे हैं। नगर पालिका बनने के बाद यहां सुविधाओं में भी बढोत्तरी हुई है। लिहाजा सेवानिवृति के बाद कर्मचारियों से लेकर अन्य लोग यहां आशियाना बनाकर सपरिवार जीविकोपार्जन का भी सपना संजोए रहते हैं। सस्ती दर पर जमीन की तलाश में रहते हैं और लोग इनकी इन्हीं जरूरतों का फायदा उठाकर शासकीय जमीन बेहद कम दर पर बेच दे रहे। क्रेता इसकी विधिवत पड़ताल भी नहीं कर रहे। दीपका में शासकीय पट्टे की भूमि का यह एकमात्र मामला नहीं है ऐसे दर्जनों प्रकरण दीपका में मिल जाएंगे। जिसकी जांच आवश्यक है। वोट बैंक की राजनीति की वजह से अब तक ऐसे लोगों पर आंच नहीं आ पा रही। वहीं प्रकरण में जिले के तेज तर्रार कलेक्टर पर भी लोगों की निगाह है कि उनका रुख ऐसे मामलों में क्या होगा। कलेक्टर भू माफियाओं पर नकेल कसेंगे या फिर यह सिलसिला ऐसा ही चलता रहेगा।
