0लक्ष्मी का सिर्फ पुत्र बना जा सकता है स्वामी नहीं ,जिसने स्वामी बनने की कोशिश की उसका विनाश हुआ
हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोरबा ।माता पिता धरती पर साक्षात ईश्वर का रूप होते हैं। जो अपने माता की निस्वार्थ बिना कहे सेवा को सदैव तत्पर रहते हैं वो सपूत कहलाते हैं,जो माता -पिता के कहने पर उनकी सेवा करे वो पूत कहलाते हैं और जो कहने पर भी माता पिता की सेवा से विमुख हो जाए संसार में वो कपूत कहलाते हैं। यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपने कार्य व्यवहार से इनमें से किस श्रेणी के संतान कहलाने का हकदार बनते हैं।


उक्त बातें टेमर सक्ती से पधारे पंडित देवकृष्ण शर्मा ने रवि शंकर शुक्ल नगर कोरबा स्थित कपिलेश्वरनाथ मंदिर प्रांगण में श्री बयचंद साहू ,श्रीमती अनिता साहू द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ महोत्सव के छठवें दिवस शुक्रवार को आयोजित कथा प्रसंग के दौरान कही।
रुक्मणी कृष्ण विवाह कथा का प्रभावपूर्ण वर्णन करते हुए कथाव्यास पं.देवकृष्ण शर्मा ने उपस्थित श्रोताओं को बताया कि
लक्ष्मी का सिर्फ पुत्र बना जा सकता है स्वामी नहीं ,लक्ष्मी के स्वामी सिर्फ नारायण हैं , जिस किसी ने लक्ष्मी का स्वामी बनने की कोशिश की उसका विनाश हुआ। कथा प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से हरिकृपा तक आयोजित की जा रही। उक्त पुनीत आयोजन से पंडित रविशंकर शुक्ल नगर में भक्ति की बयार बह रही है।
👉रुक्मणी कृष्ण विवाह पर निकली भव्य झांकी ,बाराती बनकर झूमे श्रद्धालु
संगीतमय कथा प्रसंग के दौरान रुक्मणी कृष्ण विवाह की कथास्थल पर ही भव्य झांकी निकाली गई। बारात निकाली गई । जिसमें दूल्हा बने द्वारिकाधीश के साथ बाराती नाचे गाते झूमते कथा प्रांगण स्थल पर पहुंचे। जहां द्वारकाधीश समेत बारातियों का भव्य स्वागत हुआ।

कथाव्यास पं.देवकृष्ण शर्मा जी ने रुक्मणी -कृष्ण जी की विवाह संपन्न कराई।तदोपरांत विवाह की तरह हल्दी चढ़ाकर टिकावन आदि वैवाहिक रस्म निभाई गई। रुक्मणी -कृष्ण विवाह में उपस्थित हजारों श्रोता झूम उठे।
