KORBA : जिले में मनरेगा के तहत “नवा तरिया आय के जरिया” अभियान शुरू, सीईओ ने मनरेगा, एनआरएलएम एवं लाइन विभागों की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश …

कोरबा। जिले में जल संरक्षण एवं ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “नवा तरिया आय के जरिया” अभियान की शुरुआत की गई है। इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री दिनेश कुमार नाग ने जिला पंचायत सभागार में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा विभिन्न लाइन विभागों की संयुक्त समीक्षा बैठक ली।

बैठक में सीईओ श्री नाग ने जल संरक्षण एवं जल संवर्धन संरचनाओं के निर्माण को प्राथमिकता देते हुए नवीन तालाबों (तरिया) के निर्माण तथा उनसे जुड़े आजीविका गतिविधियों को विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के बेहतर अभिसरण से ग्रामीणों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है।

बैठक में कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य, मनरेगा, एनआरएलएम एवं बी आर एल एफ की कर्मदक्ष टीम के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। “मोर गांव, मोर पानी, नवा तरिया आय के जरिया” अभियान को राज्य शासन की मंशा के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।

सीईओ ने नवीन तालाबों के मेड़ों पर आजीविका गतिविधियों जैसे मछली पालन, उद्यानिकी एवं कृषि आधारित कार्यों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। साथ ही अभियान से संबंधित ऑडियो संदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण इस पहल से जुड़ सकें।

बैठक में क्लैट ऐप के उपयोग पर भी चर्चा की गई तथा इसे फील्ड स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए।

मनरेगा एवं एनआरएलएम के समन्वय से “नवा तरिया आय के जरिया” अभियान की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिसमें विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने पर बल दिया गया है।

इसी क्रम में जनपद पंचायत कोरबा के ग्राम पंचायत जिलगा एवं कटकोना के तकनीकी अधिकारी, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में “नवा तरिया” के लिए स्थल चयन किया गया। इस दौरान दो नए तालाबों का चयन किया गया तथा उनसे संबंधित आजीविका गतिविधियों जैसे मछली पालन, सिंचाई, उद्यानिकी एवं कृषि योजना का प्रारंभिक खाका तैयार किया गया।

सीईओ श्री नाग ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण करते हुए अभियान को जनआंदोलन का रूप दें, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित हो सके।