CG : आकांक्षी जिला कोरबा में वन विभाग जंगली जानवरों की प्यास बुझाने में नाकाम ,इस जंगल में 2 साल में 2 बूंद भी पानी नहीं हुई नसीब ,सुलगते अनुत्तरित सवाल !जंगल में जानवर प्यासा मरे-जेब इनकी भरे, जांच कौन करे..!

👉 रिहायशी इलाके में आ जाते हैं चीतल ,चली जाती है जान
👉सख्त कार्रवाई के अभाव में हौसले बुलंद,जिम्मेदार कब देंगे ध्यान

कोरबा। जंगल के भीतर वन्य प्राणियों के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने विभिन्न योजनाओं में पानी की तरह पैसा तो बहाया जा रहा है लेकिन पानी की बूंद नसीब नहीं हो पा रही है। जंगली जानवर रिहायशी इलाकों की ओर रुख करके अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। (कई घटनाएं उजागर हुईं)। विभागीय अधिकारी योजना में आधा-अधूरा काम करके/ योजना की मंशा के नाकाम रहने के बावजूद रुपए निकाल कर खर्च करने के रास्ते से अपनी जेब भरते हुए लंबी चादर तानकर सोए हुए हैं।

इधर, जानवर जंगल में प्यासा भटक रहे हैं। ऐसे ही नाकाम योजना का दंश ग्राम मड़वारानी-खरहरी के जंगल में विसरण करने वाले वन्य प्राणी झेल रहे हैं,विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि वन विभाग द्वारा डैम का पूर्व में निर्माण कराया गया था जिसमें गर्मी के दिनों में एक बूंद भी पानी नहीं रहता है। गर्मी के दिनों में हिरण,चीतल आदि पानी की तलाश में गांव की तरफ आते हैं जिससे आवारा कुत्तों द्वारा उनका शिकार कर लिया जाता हैं और पानी की तलाश में आये हिरणों/चीतल की मौत हो जाती है। इस समस्या का समाधान के लिए व जंगली जानवरों की पानी की वजह से मौत ना हो और उन्हें जंगल में ही पानी मिल जाए, वन मण्डल से परियोजना की स्वीकृति हुई लेकिन भ्रष्टाचार की भेंट चढ गई। इस परियोजना और राशि की बंदरबाट करके खाना पूर्ति कर दिया गया। आलम यह है कि दो वर्षों में दो बूंद पानी भी जानवरों के कोटना तक नहीं पहुंच पाया है।

👉 इस योजना में मिली स्वीकृति

छत्तीसगढ़ शासन वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग वन मंडल कोरबा के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पुरैना, वन परिसर बरपाली/महोरा वन परिक्षेत्र करतला के ग्राम मड़वारानी जंगल क्षेत्र में वन्य प्राणियों की प्यास बुझाने के लिए निर्माण की स्वीकृति हुई है।

एसईसीएल कोरबा क्षेत्र के मानिकपुर खदान हेतु प्रस्तावित रकबा 194.728 हेक्टर वन भूमि व्यपवर्तन के लिए स्वीकृत वन्य प्राणी प्रबंधन योजना अंतर्गत परियोजना अवधि 2024-25 में बोर खनन एवं पानी सप्लाई, सासर पिट, वॉटर टैंक निर्माण का कार्य कक्ष क्रमांक पी- 1165, पी-1164 व पी-1165 में स्वीकृत किया गया।

👉 वन प्रबन्धन समिति की बैठक में निर्णय

वन प्रबंधन समिति पुरैना की बैठक 2 जुलाई 2024 को ली गई। वन्य प्राणियों के लिए गर्मी में पेयजल हेतु सासर पंप, पानी टंकी, बोर व पाइप लाइन कार्य के लिए स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में अवगत कराया गया कि कक्ष क्रमांक पी-1165 मड़वारानी के जंगल में वन्य प्राणी चीतल व अन्य जीव पानी की तलाश में जंगल से निकाल कर रिहायशी इलाके में आते हैं। आवारा कुत्तों के द्वारा शिकार कर लिए जाते हैं। उनकी मौत हो जाती है, घायल हो जाते हैं। जंगल के भीतर जानवरों को पानी की व्यवस्था के लिए रेंज करतला के अधीन यह कार्य तो प्रारंभ किया गया लेकिन अंजाम तक नहीं पहुंच सका है और 2 साल बीतने को हैं।

👉 अमला से लेकर जनप्रतिनिधियों की खामोशी

इस तरह के मामलों में जहां डीएफओ, एसडीओ, रेंजर, डिप्टी रेंजर जैसे वन अधिकारियों की उदासीनता नजर आती है तो दूसरी तरफ क्षेत्रीय तमाम तरह के जनप्रतिनिधियों की खामोशी इन्हें संबल प्रदान करती है। पूर्व में भी इस तरह के कई मामले उजागर हुए हैं जिनमें शासन की महत्वाकांक्षी योजना-परियोजना अपने अंजाम तक नहीं पहुंच सकी किंतु राशि खर्च हो गई। क्या योजनाओं का सिर्फ एक ही मकसद है कि जैसा पाए वैसा काम कर दो, लाखों रुपए निकाल कर डकार जाओ, जिस कार्य के लिए योजना लाई गई इसका लाभ मिले या ना मिले! सूत्र बताते हैं कि एसडीओ के माध्यम से बंदरबांट की चिड़िया बिठाई जाती है। उदासीनता, मैदानी दौरा में लापरवाही की एक बड़ी वजह यह भी है कि यदि भूले-भटके किसी मामले में जांच बिठाई भी जाए तो इसमें पूरी शिद्दत के साथ लीपापोती होती है। दोषियों को बचाने के लिए प्रशासनिक व राजनीतिक एप्रोच जमकर लगाए जाते हैं। ऐसे हालात में न तो आप रिकवरी और ना ही एफआईआर की उम्मीद कर सकते हैं। कागजी जांच में यदि स्थानीय स्तर पर किसी को दोषी ठहरा भी दिया गया, तो वह अपने एप्रोच के बूते संभागीय अथवा राज्य कार्यालय से बेकसूर होने का प्रमाण पत्र ले आता है।

सोर्स – सत्यसंवाद डॉट कॉम