KORBA : HTPP के झाबू राखड़ डेम फूटा,मलबे में JCB समेत जिंदा समा गया चालक ,प्रबंधन की लापरवाही ने छीन लिया मां -बाप का सहारा , शोक मिश्रित रोष व्याप्त

कोरबा। उद्योग मंत्री के गृह जिला में हसदेव ताप विद्युत संयंत्र (सीएसईबी पश्चिम) के ग्राम झाबू नवापारा, थाना कटघोरा के अंतर्गत स्थित राखड़ बांध का एक किनारा फूट जाने से हुई घटना में जेसीबी ऑपरेट कर रहे चालक की राखड़ में दबकर मौत हो गई। वह एकाएक आए राख के सैलाब में जेसीबी सहित बह गया। जेसीबी के पलट जाने से उसमें फंसा चालक राख में समा गया और मौके पर ही उसका करुणान्त हो गया। काफी मुश्किलों से उसका देह बाहर निकाला जा सका। उसे कटघोरा के अस्पताल ले जाया गया जहां मृत घोषित कर दिया गया।

मृतक की पहचान उरगा थाना क्षेत्र के ग्राम संडेल कश्यप पारा निवासी अमित कुमार पिता हुलेश्वर कश्यप 22 वर्ष के रूप में हुई है। मृतक दो भाईयों में सबसे बड़ा था और पूरे परिवार की उस पर जिम्मेदारी थी। अमृत कुमार कश्यप की मौत की खबर मिलते ही गांव में शोक व्याप्त हो गया वहीं परिजन व परिचित दौड़े भागे कटघोरा पहुंचे। यहां अस्पताल में अमित कुमार की मृत देह मर्च्युरी में रखी गई है, कल पोस्टमार्टम होगा।

👉 किराए पर लाई गई थी जेसीबी…?

रविवार दोपहर लगभग 12 बजे हुए इस घटनाक्रम को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक पहले भी झाबू का यह राखड़ बांध क्षतिग्रस्त हो चुका है। अभी 4 दिन पहले ही इस डैम का एक किनारा क्षतिग्रस्त हुआ था जिसके मरम्मत के लिए आज विभागीय अधिकारी चीफ इंजीनियर (फ्लाई ऐश) देवेन्द्र नाथ, कार्यपालन अभियंता चंचल ध्रुव और सहायक अभियंता चंद्रहास साहू मौके पर ही मौजूद थे। साथ ठेका फ़र्म मेसर्स शंकर इंजीनियरिंग का प्रोपराइटर भी मौके पर उपस्थित था। सूत्र द्वारा बताया गया कि मरम्मत कार्य के लिए जेसीबी किराए पर मंगाया गया था लेकिन किससे किराए पर लिया गया था, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। जिस वक्त यह घटना घटित हुई, जेसीबी का चालक राखड़ बांध की मरम्मत में सहयोग कर रहा था कि एकाएक क्षतिग्रस्त किनारा तेज आवाज के साथ फूट पड़ा।

करीब 30 फीट के दायरे से राख का सैलाब ऐसा बहा कि कुछ सोचने-समझने, भागने का मौका ही नहीं मिला। जेसीबी को बहाते राख का सैलाब उमड़ पड़ा और जेसीबी के पलटते ही चालक दबकर राख में समा गया। इधर, मृतक के परिजनों को तात्कालिक व उचित सहायता राशि के साथ-साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की जा रही है। इस घटना को लेकर राखड़ बांध प्रभावित ग्रामवासियों के साथ-साथ मृतक के परिजनों और परिचितों में रोष मिश्रित शोक व्याप्त है।

👉 घटनाओं से सबक नहीं लेते,निगरानी भी कमजोर

एचटीटीपी के अधिकारियों और देखरेख व मरम्मत का ठेका लेने वाली फर्म के खिलाफ आक्रोश है। इन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनके द्वारा लापरवाही निरंतर बरती जा रही है। झाबू गांव का ऐश डेम पुराना हो चुका है और इसकी ऊंचाई पर ऊंचाई बढ़ाई जा रही है जिसके कारण यह राख का दबाव अब सह पाने में संभवत: सक्षम नहीं हो रहा है। तटबंध भी कमजोर साबित हो रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि विगत दो महीने में करीब चार बार किनारे कमजोर होने और लीकेज की घटना सामने आ चुकी है। हालांकि इन लीकेज ने कोई भयावह रूप नहीं लिया।बहरहाल, यह हादसा उन सभी पावर प्लांट के लिए एक सबक के तौर पर है जिनके फ्लाई ऐश से डेम भरते चले जा रहे हैं। मिट्टी डालकर उनकी ऊंचाई बढ़ा-बढ़ा कर राखड़ को निस्तार करने का कार्य जबरिया तौर पर किया जा रहा है। अधिकारियों की हठधर्मिता और लापरवाही की वजह से पहले भी ऐश डैम फूटने और राख बहने की घटनाएं हो चुकी है। कुछ मामलों में जनहानि भी हुई है लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर कार्य किया ही जा रहा है। इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति ना हो, इसके मद्देनजर स्थानीय प्रशासन से लेकर शासन और संबंधित विभाग के शीर्ष अधिकारियों को गंभीरता से कार्य एवं भराव क्षमता का निरीक्षण/ निगरानी का समय-समय पर अवलोकन करने की आवश्यकता है। इस घटना के बाद अब यह सवाल जायज है कि क्या घटना के लिए लापरवाह अधिकारियों और जिम्मेदारों पर कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज होगा या फिर मुआवजा और नौकरी की लीपापोती में सब कुछ राखड़ की तरह बह जाएगा..?