रायपुर । छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी घोटाले और आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित IAS अधिकारी समीर विश्नोई की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत रायपुर की विशेष अदालत ने विश्नोई दंपति को तगड़ा झटका दिया है।
👉पत्नी के नाम पर बनाई थीं फर्में, महासमुंद से नवा रायपुर तक फैला था जाल

ACB/EOW की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि विश्नोई ने अपनी पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम पर 3-4 फर्जी फर्में तैयार की थीं। इसी ‘शैल कंपनियों’ के जरिए काली कमाई को सफेद करने का खेल चल रहा था।
👉जब्त संपत्तियों का ब्यौरा:
- महासमुंद: लगभग 22 एकड़ की विशाल बेनामी भूमि।
- नवा रायपुर: प्राइम लोकेशन पर स्थित कीमती प्लॉट।
- गायत्री नगर: आलीशान मकान।
- रिश्तेदारों का सहारा: जांच में पाया गया कि कई निवेश करीबियों और परिचितों के नाम पर भी किए गए थे।
👉कोर्ट का कड़ा रुख: ₹20 करोड़ की संपत्तियां अब सरकारी शिकंजे में

विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने 17 अप्रैल को हुई सुनवाई के बाद इन संपत्तियों को अटैच करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया। अब इन बेनामी संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।
👉खास बात: इससे पहले ED भी विश्नोई की 5 संपत्तियां अटैच कर चुकी है, लेकिन ताजा जांच में 4 करोड़ की 9 अतिरिक्त संपत्तियों का खुलासा हुआ, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई है।
👉स्कैम की कड़ियाँ: कोयला लेवी से जुड़ा है तार

यह पूरी कार्रवाई अपराध क्रमांक 23/2024 के तहत की गई है। बता दें कि सौम्या चौरसिया के बाद अब समीर विश्नोई प्रशासन और कानून के रडार पर हैं। कोयला घोटाले की आंच ने अब इनके द्वारा बनाए गए अचल संपत्तियों के किलों को ढहाना शुरू कर दिया है।
