हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोरबा । प्रदेश में सुशासन तिहार के बीच आकांक्षी जिला KORBA में सोमवार को हैरान कर देने वाले दृश्य दिखे। जहाँ सालों से विकास कार्यों को लेकर चर्चा करने के इच्छुक जिला पंचायत अध्यक्ष व सदस्यों का जिला पंचायत सीईओ की उपेक्षा से सब्र का बांध टूट गया । और वे जिला पंचायत CEO को हटाने की मांग को लेकर जिला पंचायत के सामने ही धरने पर बैठ गए।

जहां एक ओर सरकार ‘सुशासन तिहार’ के जरिए प्रशासनिक पारदर्शिता और जनता की समस्याओं के समाधान का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आकांक्षी जिला कोरबा में जिला पंचायत के भीतर ही सुशासन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने जिला पंचायत CEO दिनेश कुमार नाग पर भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाते हुए जिला पंचायत के गेट पर ही सदस्यों के साथ धरने पर बैठ गये। जिला पंचायत परिसर में अध्यक्ष के साथ कई जिला पंचायत सदस्य भी धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान जिला पंचायत सीईओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई और पंचायत प्रतिनिधियों का गुस्सा खुलकर सामने आया।

गौरतलब है कि आज दोपहर कोरबा कलेक्टर कार्यालय में जिला खनिज न्यास संस्थान न्यास की शासी परिषद की बैठक आयोजित थी। लेकिन इस बैठक से ठीक पहले जिला पंचायत कार्यालय के बाहर एकाएक बवाल मच गचा। जिला पंचायत अध्यक्ष डाॅ पवन सिंह पंचायत सदस्यों के साथ मुख्य दरवाजे पर आकर धरने पर बैठ गये। और जिला पंचायत सीईओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जाने लगी। मीडिया से चर्चा में उन्होने आरोप लगाया कि जिला पंचायत CEO लगातार जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों को जानबूझकर रोका जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जिला खनिज न्यास मद से विकास कार्यों की स्वीकृति के लिए पंचायत सदस्य लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है। अध्यक्ष ने बताया कि DMF की बैठक से पहले उन्होंने सभी जिला पंचायत सदस्यों के साथ चर्चा करने और उनकी मांगों को बैठक में रखने के लिए CEO से समय मांगा था। लेकिन तीन घंटे तक इंतजार कराने के बाद भी CEO बैठक के लिए नहीं पहुंचे। इससे नाराज होकर जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों ने DMF बैठक का बहिष्कार कर दिया। धरने के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने जनपद पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों में कमीशनखोरी का भी बड़ा आरोप लगाया।
उनका कहना है कि अधिकारी ऊपर तक पैसा पहुंचाने का हवाला देकर ठेकेदारों और पंचायतों पर कमीशन का दबाव बना रहे हैं। शिकायतों के बावजूद जिला पंचायत CEO इस मामले में कभी भी संज्ञान नहीं लिया गया। डॉ. पवन सिंह ने चेतावनी दी कि यदि एक महीने के भीतर CEO दिनेश कुमार नाग के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो जिला पंचायत कार्यालय में ताला जड़ दिया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने सुशासन तिहार के बीच सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद को कैसे संभालती है और आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंचती है।

हसदेव एक्सप्रेस ने इस गंभीर प्रकरण में जिला पंचायत CEO दिनेश नाग से उनका पक्ष लेने उनके व्यक्तिगत मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। श्री नाग द्वारा कॉल रिसीव नहीं करने की वजह से उनका पक्ष नहीं आ सका है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ.पवन सिंह ने जिला पंचायत सीईओ पर पदस्थापना काल से ही निर्वाचित सदस्यों की उपेक्षा का आरोप लगाया है। हसदेव एक्सप्रेस से चर्चा करते हुए डॉ.पवन सिंह ने बताया कि जब भी वे अपने अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों को लेकर सामान्य सभा की बैठक से इतर चर्चा को लेकर सीईओ से मिलना चाहते हैं। सारे सदस्यों के बुलाने पर भी जिला CEO नहीं आते,वे दो टूक लहजे में कहते हैं कि जो भी चर्चा करनी है मेरे कक्ष में आकर करें ,या सामान्य सभा में करें। जिला पंचायत CEO का यह व्यवहार एक प्रशासनिक लोकसेवक के कर्तव्यों के सर्वथा विपरीत कार्य व्यवहार है। सीधा सीधा जनता द्वारा लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अपने क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर चुनकर भेजे गए जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा है । जिसकी शिकायत उन्होंने सदस्यों के साथ पूर्व कलेक्टर अजीत वसंत से की थी,लेकिन उनके विशेष लगाव की वजह से आज पर्यन्त जिला CEO पर कार्रवाई नहीं हो सकी। जिससे उनके मनोबल में बढोत्तरी हो गई है और वे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का अपमान कर रहे हैं। इसके पूर्व शुरुआत में ही उन्होंने सामान्य सभा में मीडिया की उपस्थिति पर पाबंदी लगा दी थी ,जो कि उनके अधिकार क्षेत्र से विपरीत कार्य व्यवहार था। सामान्य सभा की अध्यक्षता अध्यक्ष करता है जिला सीईओ पदेन सचिव होते हैं जिनका कार्य बैठक आहूत करना होता है। न कि अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र का दमन करना। मीडिया के पाबंदी की वजह से उनकी बात जनमानस तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही।
