0 3 सदस्यीय कमेटी गठित,7 दिनों मांगा गया रिपोर्ट ….
मध्यप्रदेश । जिले से चिकित्सा व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां के एक सरकारी अस्पताल में सर्दी, खांसी और आंखों में मामूली लाली का इलाज कराने आए 19 महीने के एक मासूम बच्चे की आंखों की रोशनी कथित तौर पर गलत दवा देने के कारण हमेशा के लिए चली गई।
यह घटना सीधे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के प्रभार वाले जिले में हुई है, जिसके बाद से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है और पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।
👉बंडा सिविल अस्पताल में दी गई गलत दवा

यह दर्दनाक घटना सागर जिले के बंडा सिविल अस्पताल की है, जहां भूसा कमलपुर गांव के निवासी इंद्रज विश्वकर्मा अपने 19 महीने के बेटे को मामूली सर्दी-खांसी की शिकायत पर दिखाने लाए थे। ड्यूटी पर तैनात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु वर्मा ने बच्चे की जांच के बाद आई ड्रॉप और पैरासीटामोल सहित कुछ अन्य दवाएं लिखीं।
परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान अस्पताल के स्टाफ ने बच्चे की आंखों में बलगम साफ करने वाली दवा डाल दी। इसके तुरंत बाद बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर उसे पहले सागर जिला अस्पताल और फिर तुरंत एम्स भोपाल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने पुष्टि की कि गलत दवा के गंभीर रिएक्शन और मेडिकल लापरवाही के कारण बच्चा अपनी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए खो चुका है।
👉जानें क्या है पूरी खबर
19 महीने के बच्चे को मामूली सर्दी, खांसी और आंखों में लाली के बाद बंडा सिविल अस्पताल लाया गया था।
आरोप है कि इलाज के दौरान बच्चे की आंखों में बलगम साफ करने वाली ड्रॉप डाल दी गई।
हालत बिगड़ने पर बच्चे को भोपाल एम्स ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके पूरी तरह दृष्टिहीन होने की पुष्टि की।
पीड़ित पिता ने बंडा पुलिस थाने में ड्यूटी डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
सागर के सीएमएचओ ने मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी बनाकर 7 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
👉सागर में लगातार सामने आ रहे हैं लापरवाही के मामले
सागर जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सीय लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे ठीक कुछ दिन पहले बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में देवेंद्र पाठक नामक मरीज की एनेस्थीसिया के ओवरडोज और समय पर सही इलाज न मिलने के कारण मौत हो गई थी, जिस पर खुद स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने संज्ञान लेकर जांच के आदेश दिए थे। अब इस नए मामले ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों अपने-अपने स्तर पर इस संवेदनशील मामले की कानूनी व तकनीकी जांच कर रहे हैं।
