कोरबा । सत्ता में आने से पहले महिलाओं को 33 प्रतिशत भागीदारी देने का दम भरने वाली सरकार अब अपने ही फैसलों को लेकर सवालों के घेरे में है। ताजा मामला एल्डरमैन नियुक्ति का है, जहां 11 सदस्यीय सूची में सिर्फ दो महिलाओं को ही जगह मिली है। इस नियुक्ति के बाद राजनीतिक गलियारों में चटखारेदार चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।


चर्चा इस बात की है कि जब सरकार महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का दावा करती है, तो एल्डरमैन जैसी नियुक्तियों में महिलाओं की संख्या इतनी सीमित क्यों रही? 11 में से सिर्फ दो महिलाओं को मौका मिलने पर विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर भी दबे स्वर में सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि 33 प्रतिशत भागीदारी के दावे को गंभीरता से लागू किया जाता, तो कम से कम 3 से 4 महिलाओं को सूची में स्थान मिल सकता था। ऐसे में यह नियुक्ति सरकार के दावों और जमीनी फैसलों के बीच अंतर को उजागर करती नजर आ रही है।
फिलहाल नियुक्ति सूची जारी होने के बाद शहर की राजनीतिक चौपालों में यही चर्चा है कि “महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे आखिर नियुक्तियों तक आते-आते कमजोर क्यों पड़ जाते हैं?” आने वाले दिनों में यह मुद्दा स्थानीय राजनीति में और गर्मा सकता है।
