रायपुर । छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को रियायती दर पर दवा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की जा रही ‘अमृत फार्मेसी’ योजना विवादों में घिर गई है। सरकारी अस्पतालों में अमृत फार्मेसी के संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनी एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड (HLL Lifecare Limited) को सौंपे जाने और अस्पताल परिसरों में निशुल्क जगह उपलब्ध कराने संबंधी विभागीय पत्र सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

जानकारी के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में पहले से ‘हमर लैब’ का संचालन कर रही एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को अब अमृत फार्मेसी चलाने की जिम्मेदारी भी दी गई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कंपनी को अमृत फार्मेसी संचालित करने के लिए निशुल्क स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था के जरिए मरीजों को बाजार मूल्य से 30 से 50 प्रतिशत तक कम कीमत पर दवाएं मिल सकेंगी।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे इलाज का खर्च कम होगा और सरकारी अस्पतालों में दवा उपलब्धता की व्यवस्था मजबूत होगी। उधर इस फैसले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि अमृत फार्मेसी और पैथोलॉजी सेवाओं का संचालन बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए निजी कंपनी को सौंपा गया है। कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने आरटीआई के हवाले से आरोप लगाया है कि नियमों की अनदेखी कर निजी कंपनी को लाभ पहुंचाया गया।
विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि पहले हमर लैब और अब अमृत फार्मेसी का संचालन भी निजी एजेंसी को सौंपा जा रहा है, जिससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इस बीच, स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों ने भी सवाल उठाए हैं कि अमृत फार्मेसी शुरू होने के बाद सरकारी अस्पतालों में पहले से संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र, धनवंतरी योजना और सीजीएमएससी के जरिए होने वाली दवा आपूर्ति का समन्वय किस तरह किया जाएगा।
उनका मानना है कि इन योजनाओं के संचालन को लेकर सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता है। फिलहाल, सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना है, जबकि विपक्ष इसे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की दिशा में एक और कदम बता रहा है। ऐसे में अब इस पूरे मामले पर सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
