0 प्रमुख अभियंता बदल गए नहीं बदला संरक्षण का रवैया
0 बूंद बूंद पानी के लिए जद्दोजहद कर रही जनता पूछ रही सवाल
0 कर्त्तव्य निर्वहन के बजाय जिम्मेदार आखिर क्यों बने हैं भ्रष्टाचारियों के पनाहगार
हसदेव एक्सप्रेस न्यूज रायपुर -जांजगीर -चाम्पा ।प्रधानमंत्री की हर घर नल के जरिए हर घर जल पहुंचाने की मंशा छत्तीसगढ़ में पीएचई के भ्रष्ट अफसरों एवं फर्मों की मिलीभगत महज एक ख्वाब ही रह गया । जल जीवन मिशन के तहत जांजगीर -चाम्पा जिले के 60 गांवों में स्वीकृत एकल ग्राम नलजल योजना हस्तातंरण प्रतिवेदन (हैंडओवर रिपोर्ट ) जारी करने में नियमों की अनदेखी कर फर्मों को मनमाना करोड़ों का भुगतान करने के मामले में दस्तावेजी शिकायत के उपरांत मुख्यमंत्री कार्यालय के जांच आदेश मुख्यमंत्री जनदर्शन में शामिल प्रकरण की साल भर बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी। प्रमुख अभियंता द्वारा मुख्य अभियंता को जांच का आदेश देकर महज कागजी औपचारिक ता का लगातार निर्वहन किया जा रहा है।जबकि ईएनसी स्तर से ही प्रकरण में संरक्षण दिए जाने की विश्वस्त सूत्रों से सूचना मिल रही है। जिसकी वजह से शिकायती प्रकरणों में जांच तक नहीं हो रही। इस तरह शासनादेश मजाक बनकर रह गया है। मुख्यमंत्री जनदर्शन में शामिल प्रकरण को ठंडे बस्ते में डालकर जिम्मेदार अफसरों ने मनमानेपन विभागीय संरक्षण का खुला प्रमाण दे दिया है।

गौरतलब हो कि 25 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को दस्तावेजी शिकायत कर जांजगीर चाम्पा जिले में शासन द्वारा जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत करोड़ों रुपए के सैकड़ों सिंगल विलेज स्कीम में दस्तावेजों में ही भ्रष्टाचार की गम्भीर शिकायत की गई थी। जिसके माध्यम से बताया गया था कि पीएचई के जिम्मेदार अफसरों ने फर्मों को भुगतान की हड़बड़ी में निर्धारित मानकों की अनदेखी कर एकल ग्राम नलजल योजना हस्तांतरण प्रतिवेदन गवाह के हस्ताक्षर , सहायक अभियंता के हस्ताक्षर के बगैर ही जारी कर दिया है ।वित्तीय वर्ष 2024 -25 में जल जीवन मिशन अंतर्गत पूर्ण एकल ग्राम नलजल योजना के हस्तांतरण प्रतिवेदन (हैंडओवर रिपोर्ट ) में इसका खुलासा हुआ है। सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत संबंधित कार्यालय के जनसूचना अधिकारी द्वारा प्रदत्त एकल ग्राम नलजल योजना हस्तांतरण प्रतिवेदन से इसकी स्वतः पुष्टि हो चुकी है।
प्रदाय किए गए एकल ग्राम नलजल योजना हस्तांतरण प्रतिवेदन के परीक्षण में हमें 60 ग्राम पंचायतों को जारी एकल ग्राम नलजल योजना हस्तांतरण प्रतिवेदन ऐसे मिले हैं जिस फार्मेट में सहायक अभियंता ,4 गवाह के हस्ताक्षर के लिए कॉलम तो तय किए गए हैं लेकिन उनमें दोनों के हस्ताक्षर ही नहीं हैं। किसी में सरपंच तो किसी में सरपंच सचिव दोनों के हस्ताक्षर हैं। लेकिन योजना हस्तांतरण (हैंड ओवर ) करने वाले सहायक अभियंता (एसडीओ) के दस्तखत पदमुद्रा नहीं होने से एवं गवाहों के दस्तखत नहीं होने से उक्त जारी प्रमाण पत्र पूर्णतया कूटरचित /फर्जी प्रतीत हो रही है। जारी सर्टिफिकेट में योजना के अधिग्रहणकर्ता सरपंच ,सचिव ,ग्राम के 4 गवाहों के अलावा योजना हैंडओवर करने हस्तांतरणकर्ता सहायक अभियंता (एसडीओ ) का हस्ताक्षर कॉलम में हस्ताक्षर होना अनिवार्य था ,लेकिन कागजों में योजना को पूर्ण बताने की , फर्मों को भुगतान करने की ऐसी जल्दबाजी रही या चालाकी कहें कि संबंधित पंचायतों के गवाहों ,सहायक अभियंता के हस्ताक्षर के बगैर योजना का हस्तांतरण प्रतिवेदन जारी हो गया।
हैंडओवर सर्टिफिकेट ने कार्य की भौतिक स्थिति पर अविश्वास के बीज बो दिए हैं। सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या सिर्फ फर्मों को त्वरित भुगतान करने की होड़ में इस तरह के कारनामे किए गए हैं ? जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों का इसके पीछे निहित स्वार्थ स्पष्ट परिलक्षित हो रहा है।
👉करीब 60 गांवों के 30 करोड़ की योजना में फर्जीवाड़े की शिकायत ,हस्तांतरण प्रतिवेदन में एसडीओ व गवाह के ही दस्तखत नहीं



लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जांजगीर चाम्पा के द्वारा सूचना के अधिकार के तहत प्रदाय किए गए जल जीवन मिशन अंतर्गत एकल ग्राम नलजल योजना के हस्तांतरण प्रतिवेदन में 60 ग्राम पंचायतों के प्रतिवेदन में एसडीओ व गवाह के ही दस्तखत नहीं हैं। इन ग्राम पंचायतों में विकासखण्ड पामगढ़ के ग्राम जोगीडिया ,
ग्राम कुटराबोड,कोसीर ,हिर्री,मुड़पार (च)चुरतेला ,कमरीद,कोड़ाभांट ,देवरघटा, मेहंदी ,भदरा शामिल है। विकासखण्ड अकलतरा के ग्राम कोटगढ़,बरगवां,अर्जुनी,अमलीपाली ,पचरी,करहीडीह ,कल्याणपुर ,चंदनिया ,मधुवा,
पोंडीदल्हा ,पचरी ,दर्रीडांड ,बिरकोनी ,
करधरी, खोड शामिल है। विकासखण्ड नवागढ़ के ग्राम दर्री,दहिया,भडेसर ,पोंडी (राछा ),गोधना ,कांसा,देवरी,उदयभांठा,
बरभांठा ,पेंड्री,सलखन ,मोहतरा,चौराभाठा,बरगांव पिपरा,कर्रा ,दुरपा शामिल हैं। बलौदा विकासखण्ड के ग्राम केराकछार, ढोरला,नवागांव ,कुरमा ,कटरा,खोहा ,
लछनपुर ,कुरदा,बसंतपुर ,हरदीविशाल,
कंड्रा, अंगारखार,परसदा एवं मड़वा शामिल हैं।



प्रत्येक योजना तकरीबन 50 लाख रुपए की इस तरह देखें तो तकरीबन 30 करोड़ की एकल नलजल योजना की फर्जी हैंडओवर सर्टिफिकेट जारी किए जाने के आसार हैं।जिसकी जांच की नितांत दरकार है। मामले में छत्तीसगढ़ में जीरो टॉलरेंस की नीति बनाए रखने पत्र प्राप्ति के 30 दिवस के भीतर उपरोक्त 60 ग्राम पंचायतों के जारी एकल ग्राम नलजल योजना हस्तांतरण प्रतिवेदन का राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय टीम गठित कर जांच कराने ,तकनीकी मापदंडों का परीक्षण कर भौतिक सत्यापन कराने आदेशित करने फर्मों को किए गए भुगतान मूल्यांकन पत्रक (एमबी )की भी जांच सुनिश्चित कर ,आधी अधूरी अपूर्ण योजना पाए जाने पर शासकीय धनराशि की वसूली सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया गया था ,
ताकि भाजपा सरकार के प्रति आमजनमानस में भरोसा/विश्वास बना रहे।
👉मुख्यमंत्री जनदर्शन में शामिल प्रकरण 1 साल से जांच लंबित ,प्रमुख अभियंता बदल गए पर प्रकरण ठंडे बस्ते में, उठ रहे सवाल



मुख्यमंत्री जनदर्शन में शामिल प्रकरण 2500726011104 ,मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा दिए गए जांच आदेश के बाद 9 माह उपरांत भी दस्तावेजी शिकायत प्रकरण में कार्रवाई नहीं होने पर मुख्यमंत्री को पुनः पत्र क्रमांक 8713 दिनांक 20 अप्रैल 2026 को स्मरण पत्र भेजकर प्रकरण में जिम्मदारों को संरक्षण प्रदान किए जाने की शिकायत की गई थी। जिस पर मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देश पर प्रमुख अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग श्री के.के.मरकाम ने 11जून 2026 को मुख्य अभियंता लोक लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग बिलासपुर को प्रकरण में निर्देशानुसार / नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही कर कृत कार्यवाही से संबंधित आवेदक को अवगत कराने एवं की गई कार्रवाई की संक्षिप्त जानकारी की प्रविष्टि मुख्यमंत्री जनदर्शन वेबसाईट में करने का निर्देश दिया गया गया है। लेकिन मुख्य अभियंता संजय सिंह आज पर्यन्त उक्त निर्देशों का परिपालन सुनिश्चित नहीं कर सके। प्रकरण में आज पर्यंत जांच आगे नहीं बढ़ी। प्रमुख अभियंता के पद पर ओंकेश चंद्रवंशी की जगह के.के.मरकाम आ गए पर अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण कहें कि विभागीय निक्कम्मेपन की आज पर्यंत जांच तक शुरू नहीं हो सकी। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो प्रमुख अभियंता के.के.मरकाम के प्रश्रय की वजह से ही जल जीवन मिशन के कार्यों में दस्तावेजी शिकायतों पर भी जिम्मदारों को जांच की आंच नहीं आ रही । जांच आदेश निकालकर महज कागजी औपचारिकता का निर्वहन किया जा रहा है। रिटायरमेंट की कगार पर खड़े(6 माह बाद सेवानिवृत्त होने वाले) प्रमुख अभियंता के भ्रष्टाचार के मामलों में बरती जा रही ढिलाई से उनकी कार्यशैली पर सीधे सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री के गृह जिला जशपुर में तो 65 गांवों में फर्जी हर घर जल की प्रमाणित शिकायत और पुष्टि के बाद भी जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार तक को शिकायत के उपरांत भी जांच लंबित है। महासमुंद,दंतेवाड़ा,जगदलपुर की भी शिकायतें भी ठंडे बस्ते में पड़ी है। बहरहाल पूरे मामले में अब प्रधानमंत्री कार्यालय को सीधे दस्तावेजी शिकायत की जा रही है,जिसमें जल्द जांच के आसार हैं।
