CG : DMF से ₹ 4536 करोड़ खर्चे ,फिर भी 44 % खनन प्रभावित गांव विकास से रह गए महरूम ! CAG की रिपोर्ट में हुए खुलासे से मचा हड़कम्प ,उठेंगे सवाल !

रायपुर। छत्तीसगढ़ में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाए गए जिला खनिज संस्थान न्यास (District Mineral Foundation-DMF) की कार्यप्रणाली पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ताजा प्रदर्शन लेखापरीक्षा (Performance Audit) रिपोर्ट के अनुसार ₹4,536 करोड़ से अधिक राशि खर्च होने के बावजूद राज्य के 44 प्रतिशत खनन प्रभावित गांवों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन गांवों को खनन गतिविधियों से सर्वाधिक प्रभावित माना गया था, उनमें से बड़ी संख्या अब भी शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। CAG ने इसे DMF के मूल उद्देश्य के विपरीत बताया है।

👉रिपोर्ट की प्रमुख बातें

  • ₹4,536 करोड़ खर्च, फिर भी 44% खनन प्रभावित गांवों को लाभ नहीं मिला।
  • कई जिलों में परियोजनाओं का चयन वास्तविक जरूरतों के बजाय अन्य आधारों पर किया गया।
  • कई विकास कार्य गैर-खनन प्रभावित क्षेत्रों में कराए गए।
  • ग्राम सभाओं की भागीदारी और स्थानीय जरूरतों के आकलन में कमी मिली।
  • परियोजनाओं की मॉनिटरिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और मूल्यांकन प्रभावी नहीं पाया गया।
  • रिकॉर्ड संधारण और वित्तीय प्रबंधन में भी खामियां सामने आईं।

👉 जानें क्या है DMF?

DMF (District Mineral Foundation) की स्थापना खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य खनन से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए खनन कंपनियों से प्राप्त राशि का उपयोग संबंधित जिलों में विकास कार्यों के लिए किया जाता है।

👉CAG की प्रमुख सिफारिशें

  • खनन प्रभावित गांवों की वैज्ञानिक और अद्यतन पहचान।
  • ग्राम सभाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
  • परियोजनाओं का चयन निर्धारित प्राथमिकताओं के आधार पर हो।
  • थर्ड पार्टी मूल्यांकन और नियमित मॉनिटरिंग।
  • ऑनलाइन निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत किया जाए।
  • DMF फंड के उपयोग में जवाबदेही बढ़ाई जाए।

👉इन जिलों पर रहेगा सबसे ज्यादा असर

कोरबा, रायगढ़, सरगुजा,बालोद,राजनांदगांव सूरजपुर, बलरामपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कबीरधाम, जशपुर और बस्तर जैसे प्रमुख खनन जिलों में DMF के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्य संचालित हो रहे हैं। ऐसे में CAG की रिपोर्ट इन जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर नई बहस छेड़ सकती है।

👉बढ़ेगी जवाबदेही?

विशेषज्ञों का मानना है कि CAG की रिपोर्ट केवल वित्तीय खर्च पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि यह भी संकेत देती है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए निगरानी, पारदर्शिता और योजना निर्माण की प्रक्रिया में व्यापक सुधार जरूरी है।