मुंबई । महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपने सख्त तेवर और बेबाक अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। मई 2026 में FDA कमिश्नर का पद संभालने के बाद से ही उन्होंने मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। बड़े रेस्टोरेंट और होटल से लेकर सरकारी संस्थानों की कैंटीन तक, FDA की कार्रवाई का असर दिखाई दे रहा है।

इसी बीच तुकाराम मुंढे ने एक इंटरव्यू में भ्रष्टाचार और रिश्वत को लेकर ऐसा बयान दिया, जो अब चर्चा में है। उनसे जब पूछा गया कि क्या कभी किसी ने उन्हें रिश्वत देने की कोशिश की, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कोई उन्हें रिश्वत देने की हिम्मत नहीं कर सकता। तुकाराम मुंढे ने कहा कि अगर कोई उन्हें रिश्वत देने की कोशिश करने के बारे में सोचता भी है, तो उसे ऐसा कदम उठाने से पहले कई बार सोचना पड़ेगा। उनका यह बयान उनके प्रशासनिक कामकाज की उस छवि को सामने रखता है, जिसके लिए वे लंबे समय से जाने जाते हैं।
मुंढे का कहना है कि उन्होंने अपने पूरे करियर में अपनी जिम्मेदारी और भूमिका के मुताबिक काम करने की कोशिश की है। उनके मुताबिक, अगर हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाए तो समाज को बेहतर बनाया जा सकता है। अपने काम करने के तरीके को लेकर होने वाली आलोचनाओं पर भी तुकाराम मुंढे ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि कई आलोचक उन्हें घमंडी कहते हैं, लेकिन उनका मानना है कि वह अपनी भूमिका और जिम्मेदारी के मुताबिक काम करने की कोशिश करते हैं। यानी सख्त फैसले लेने और नियमों के पालन को लेकर उनकी जो छवि बनी है, उसे वे अपनी कार्यशैली का हिस्सा मानते हैं।
👉FDA कमिश्नर बनने के बाद मिलावटखोरी पर सख्ती
मई 2026 में FDA कमिश्नर की जिम्मेदारी संभालने के बाद तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में खाद्य पदार्थों में मिलावट और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई का अभियान तेज हुआ है। रेस्टोरेंट, होटल, कैंटीन और खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों की जांच की जा रही है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जा रही है। उनकी कार्यशैली का फोकस सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित कराने पर भी है।
👉क्यों चर्चा में रहता है तुकाराम मुंढे का नाम ?
तुकाराम मुंढे का नाम महाराष्ट्र के उन अधिकारियों में लिया जाता है, जो अपने सख्त प्रशासनिक फैसलों और बेबाक कार्यशैली के लिए पहचाने जाते हैं। उनके करियर में कई ऐसे मौके आए हैं, जब उनके फैसलों और कार्रवाई ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया।हालांकि किसी अधिकारी को ‘देश के सबसे ईमानदार अफसरों में से एक’ कहना एक व्यापक सार्वजनिक धारणा है, कोई आधिकारिक रैंकिंग नहीं।
उनकी छवि मुख्य रूप से उनकी सख्त कार्यशैली, नियमों के पालन और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके सार्वजनिक रुख से बनी है। तुकाराम मुंढे की बात का सार यही है कि व्यवस्था में बदलाव सिर्फ कानून या कार्रवाई से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने से आएगा। FDA में उनकी मौजूदा भूमिका के बीच उनका रिश्वत को लेकर दिया गया यह बयान एक बार फिर उनकी सख्त और जीरो-टॉलरेंस वाली कार्यशैली को चर्चा में ले आया है।
