KORBA : पहले न्याय फिर जनसुनवाई ,SECL मानिकपुर खदान विस्तार से आक्रोशित ग्रामीणों का अल्टीमेटम ,पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का मिला साथ , CMD को लिखा पत्र …

कोरबा।।छत्तीसगढ़ के कोरबा में एसईसीएल की मानिकपुर विस्तार परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रभावित आठ गांवों के ग्रामीणों ने पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले पुराने विस्थापन, मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े मामलों का समाधान करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने तक वे जनसुनवाई का विरोध करेंगे।

ग्रामीणों ने मंगलवार को पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताईं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन का अर्जन 1964 में किया गया था, लेकिन छह दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कई परिवार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

👉पहले न्याय, फिर खदान विस्तार

ग्रामीणों के मुताबिक जमीन जाने के बाद कई परिवारों को अपेक्षित पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार नहीं मिल पाया। कुछ परिवारों की जमीन पर खदान शुरू हो चुकी है, जबकि कुछ प्रभावितों की जमीन का हिस्सा अभी भी उनके कब्जे में है। ग्रामीणों ने शेष जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया और प्रस्तावित मुआवजे पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि उनके परिवारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है।

ग्रामीणों ने कहा कि पुराने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार के मामलों का समाधान किए बिना पर्यावरणीय जनसुनवाई कराना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने विरोध को लेकर कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो वे लाठी-डंडे खाएंगे और जेल जाने को भी तैयार हैं।

👉पूर्व मंत्री ने SECL CMD को लिखा पत्र

ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने एसईसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन को पत्र भेजा है। उन्होंने मानिकपुर विस्तार परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। अग्रवाल ने कहा कि पहले प्रभावित परिवारों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। पुनर्वास, मुआवजा, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े पुराने लंबित मामलों का निराकरण होने के बाद ही खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

👉विकास के विरोध में नहीं, अन्याय के खिलाफ

पूर्व मंत्री ने कहा कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय करके नहीं चुकाई जानी चाहिए।उन्होंने आठों गांवों के पुराने और नए प्रभावित परिवारों की बैठक बुलाकर उनकी समस्याएं सुनने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि समस्याओं के समाधान से पहले जनसुनवाई कराई गई तो ग्रामीणों की ओर से इसका और अधिक जोरदार विरोध हो सकता है।

👉62 साल पुराना विस्थापन का दर्द

मानिकपुर विस्तार का मुद्दा प्रभावित ग्रामीणों के लिए सिर्फ नई खदान परियोजना का मामला नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि 1964 में जमीन जाने के बावजूद विस्थापन और अधिकारों से जुड़े कई सवाल आज भी कायम हैं। अब ग्रामीणों की मांग है कि नई परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले पुराने मामलों का समाधान किया जाए और जमीन देने वाले परिवारों को पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार का उनका हक मिले।