0 101 गवाहों और 100 आरोपियों के बयानों के बाद कोर्ट ने सुरक्षित रख लिया था फैसला
दिल्ली -जगदलपुर । देश के बड़े राजनीतिक नरसंहारों में शामिल छत्तीसगढ़ में झीरम घाटी हमले के केस की एनआईए स्पेशल कोर्ट में बुधवार को सुनवाई पूरी हो गई। 31 अगस्त को अदालत मामले में निर्णय सुनाएगी।

एनआईए ने वर्ष 2015 में लगभग एक हजार पृष्ठ की चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी। 11 साल तक चली सुनवाई के बाद यहां जिला व सत्र न्यायालय स्थित एनआईए के स्पेशल कोर्ट में विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने अंतिम दौर की सुनवाई की।
बीते 3 दिनों में एनआईए की ओर से विशेष लोक अभियोजन दिनेश पाणिग्रही और बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी दोनों ने लगभग 11 घंटे चली बहस में अपनी-अपनी दलीलें रखीं। बुधवार शाम बहस पूरी हो गई। 31 अगस्त की तिथि निर्णय सुनाने के लिए तय की गई है।
एनआईए ने इस केस में 11 लोगों को आरोपित बनाया था, जिनमें एक की मौत हो चुकी है। बाकी 10 सेंट्रल जेल जगदलपुर में बंद हैं। कोर्ट में बहस के दौरान तीनों दिन ये सभी आरोपित भी उपस्थित थे। लोक अभियोजन की ओर से केस में 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए हैं।
25 मई 2013 को सुकमा से केशलूर लौट रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर जगदलपुर से 42 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर दरभा की झीरम घाटी में माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था।
इस घटना में मौके पर 27 लोगों की मौत हुई थी। 38 लोग घायल हुए थे। बाद में मौतों का आंकड़ा बढ़कर 32 हो गया।
👉छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सभी बड़े नेता मारे गए

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से जगदलपुर लौट रही थी. इसी यात्रा के दौरान दरभा झीरम घाटी में घात लगाए नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला कर दिया.
इस बड़े नक्सली हमले में बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, तत्कालीन PCC अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार समेत कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं की जान चली गई थी. हमले में कई सुरक्षा जवान भी शहीद हुए थे. वहीं आम नागरिक की भी मौत हुई थी.
👉NIA की जांच पर भूपेश बघेल का बड़ा बयान
कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम घाटी कांड पर आज आने वाले फैसले पर बड़ा बयान दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा-” NIA ने जांच सही नहीं की है. दरभा थाने में जिनके नाम पर FIR दर्ज किया गया, जो धाराएं लगी थी, जिन लोगों के नाम थे, उनसे पूछताछ नहीं हुई. NIA कोर्ट ने गुडसा उसेंडी से बयान लेने कहा, लेकिन उन्होंने बयान नहीं लिया. साथ ही झीरम घाटी कांड में जो लोग मौके पर मौजूद थे, उन सब से भी पूछताछ नहीं किया गया. एनआईए ने षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया. जब जांच सही तरीके से नहीं हुई है तो के फैसला भी उसी आधार पर आएगा. “
👉भाजपा सरकार पर मामले को दबाने का आरोप
पूर्व सीएम ने आगे कहा “मैंने मुख्यमंत्री रहते हुए मध्यक्षेत्र की बैठक के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री से कहा था कि आप जांच नहीं कर पा रहे है तो हमें दे दीजिए, लेकिन नहीं दिया गया, जब हमने एसआईटी गठित की तो NIA हाईकोर्ट पहुंच गई. बघेल ने कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट में अपील की तो राज्य सरकार के पक्ष में फैसला आया, तब तक हमारी सरकार चली गई. लेकिन इसके बाद आई वर्तमान सरकार ने ना ही जांच के आदेश दिए न कुछ किया, जिसे देखकर लगता है कि भाजपा मामले को दबाने का काम कर रही है.” बस्तर संभाग के ब्लॉक अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने कांकेर पहुंचे पूर्व सीएम ने ये बातें कही.
