CG : स्मार्ट मीटर पर फिर सियासी संग्राम, पूर्व CM बघेल ने सरकार पर साधा निशाना,कहा – भगवान के नाम पर लूटने वाले अब गरीब जनता को स्मार्ट मीटर के नाम पर लूट रहे ….

रायपुर । छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बागबाहरा के एक मामले को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए प्रदेश की साय सरकार पर निशाना साधा है। बघेल ने स्मार्ट मीटर से ज्यादा बिजली खपत दर्ज होने का आरोप लगाते हुए इसे आम जनता की जेब पर बोझ से जोड़ दिया। उन्होंने अपने पोस्ट में तंज कसते हुए लिखा— “स्मार्ट मीटर की चोरी, विष्णु सरकार की सीनाजोरी!!” उन्होने तंज कसते हुए आगे लिखा….“भगवान के नाम पर लूटने वाले अब गरीब जनता को मीटर के नाम पर लूट रहे!”

स्मार्ट मीटर की चोरी
विष्णु सरकार की सीनाजोरी!!

बागबाहरा में एक स्मार्ट मीटर से ज्यादा बिजली बिल आने की शिकायत करते हुए एक चेक मीटर लगाया गया.
सिर्फ़ एक हफ़्ते में जब दोनों मीटर की रीडिंग की तुलना की गई तो चेक मीटर में 390 यूनिट का कंजम्पशन दिखाया और वहीं स्मार्ट मीटर ने 408 यूनिट का कंजम्पशन दिखाया.
यानि कि एक हफ्ते के छोटे से समय में 18 यूनिट ज्यादा स्मार्ट मीटर ने बताया.
यह अपने आप में प्रमाण है कि स्मार्ट मीटर ज्यादा घूमता है और हो सकता है कि एक महीने में यह 100 यूनिट, 200 यूनिट ज्यादा रीडिंग बताता है.
बिजली चोरी और जनता की जेब की लूट का यह साक्षात प्रमाण है.

सावधान! भगवान के नाम पर लूटने वाले अब गरीब जनता को मीटर के नाम पर लूट रहे हैं.

आपको अपने स्मार्ट मीटर पर शक है तो आप भी चेक मीटर लगवाइए और शक सही निकले तो नए मीटर का विरोध कीजिए।

@vishnudsai @ChhattisgarhCMO

— Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) September 30, 2026

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर विपक्ष में बैठी कांग्रेस लगातार सवाल उठाने के साथ ही सरकार को घेर रही है। ऐसे में बागबहरा में स्मार्ट बिजली मीटर की जांच में सामने आये रिपोर्ट के बाद भूपेश बघेल ने सरकार पर सवाल उठाया है। भपूेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बिजली मीटर की जांच रिपोर्ट को सांझा करते हुए बताया कि…बागबाहरा में स्मार्ट मीटर से अधिक बिजली बिल आने की शिकायत के बाद एक चेक मीटर लगाया गया था। एक सप्ताह बाद दोनों मीटरों की रीडिंग की तुलना में चेक मीटर पर 390 यूनिट और स्मार्ट मीटर पर 408 यूनिट खपत दर्ज होने का दावा किया गया। यानी दोनों रीडिंग के बीच 18 यूनिट का अंतर बताया गया है।

इसी अंतर को आधार बनाकर पूर्व मुख्यमंत्री ने स्मार्ट मीटर की सटीकता पर सवाल उठाए हैं। भूपेश बघेल ने अपने पोस्ट में कहा कि एक सप्ताह के दौरान स्मार्ट मीटर ने चेक मीटर की तुलना में 18 यूनिट अधिक खपत दर्ज की। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यही अंतर पूरे महीने बना रहा, तो उपभोक्ताओं की रीडिंग में 100 से 200 यूनिट तक का अंतर आ सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने उपभोक्ताओं से भी अपील की कि यदि उन्हें अपने स्मार्ट मीटर की रीडिंग पर संदेह है, तो वे चेक मीटर लगवाकर दोनों की रीडिंग की तुलना कराएं। उन्होंने इस मामले को बिजली उपभोक्ताओं की जेब से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाए।

👉स्मार्ट मीटर को लेकर पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं कांग्रेस और सरकार

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर की स्थापना और बिजली बिल में कथित बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठाती रही है। कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद कुछ उपभोक्ताओं के बिल बढ़ने की शिकायतों का हवाला देते हुए इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। वहीं, बिजली वितरण कंपनी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि स्मार्ट मीटर के कारण बिजली की खपत अपने आप नहीं बढ़ती। कंपनी ने रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के घरेलू उपभोक्ताओं के आंकड़ों के आधार पर तुलनात्मक विश्लेषण का भी हवाला दिया था। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के बिजली आपूर्ति संहिता संबंधी प्रावधानों में चेक मीटर के जरिए स्मार्ट मीटर की रीडिंग का मिलान करने की व्यवस्था का उल्लेख है।
संबंधित प्रावधान के अनुसार, चेक मीटर को कम से कम तीन महीने तक लगातार लगाकर रखना और प्रत्येक बिलिंग चक्र में दोनों मीटरों की रीडिंग की तुलना करना निर्धारित है। ऐसे में बागबाहरा के मामले में सामने आया कथित अंतर जांच का विषय हो सकता है, लेकिन मीटर की सटीकता पर अंतिम निष्कर्ष के लिए अधिकृत तकनीकी परीक्षण और निर्धारित अवधि के आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे। एक सप्ताह की रीडिंग में अंतर अपने आप में जानबूझकर अधिक बिल वसूली या मीटर में गड़बड़ी साबित नहीं करता।

👉सियासी आरोपों के बीच उपभोक्ताओं को जवाब का इंतजार

बागबाहरा की रीडिंग का मामला सामने आने के बाद स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही बहस फिर तेज हो सकती है। भूपेश बघेल ने इसे सीधे जनता की जेब से जोड़ते हुए साय सरकार पर निशाना साधा है। दूसरी ओर, बिजली वितरण कंपनी पहले ही स्मार्ट मीटर से खपत बढ़ने के आरोपों को खारिज कर चुकी है। अब इस मामले में अहम सवाल यह है कि बागबाहरा में दोनों मीटरों की रीडिंग के अंतर की अधिकृत जांच हुई है या नहीं और जांच में क्या नतीजा सामने आता है। फिलहाल, बघेल के पोस्ट में किए गए दावे और मीटर की तकनीकी जांच से प्रमाणित निष्कर्ष के बीच अंतर करना जरूरी है।