CG : विधानसभा चुनाव के 2 साल पहले छत्तीसगढ़ में तीसरे मोर्चे का शंखनाद ! 50 दलों ने मिलकर फूंका बिगुल ,BJP – CONGRESS के सामने नया राजनीतिक विकल्प बनाने की चुनौती …

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले एक नई राजनीतिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। राजधानी रायपुर में करीब 50 क्षेत्रीय दलों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक मोर्चों के प्रतिनिधियों ने एक मंच पर बैठकर तीसरे मोर्चे की नींव मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

तेलीबांधा स्थित होटल बेबीलॉन कैपिटल में हुई संयुक्त बैठक में भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही पारंपरिक दो ध्रुवीय राजनीति के सामने एक साझा राजनीतिक विकल्प खड़ा करने पर मंथन हुआ। बैठक में शामिल नेताओं ने छत्तीसगढ़ की स्थानीय अस्मिता, जल-जंगल-जमीन, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय अधिकारों को आगामी राजनीतिक एजेंडे का केंद्र बनाने की बात कही।

👉सत्ता की सियासत से आगे ‘छत्तीसगढ़ के मुद्दों’ की राजनीति!

तीसरे मोर्चे की कवायद में सबसे बड़ा जोर इस बात पर दिखाई दिया कि प्रदेश की राजनीति में स्थानीय मुद्दों और छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय अस्मिता को प्रमुखता दी जाए। नेताओं ने जल, जंगल और जमीन से जुड़े सवालों के साथ सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय अधिकारों को साझा एजेंडे में शामिल करने पर सहमति जताई।
यानी आने वाले समय में यह मोर्चा सिर्फ चुनावी गठजोड़ रहेगा या फिर छत्तीसगढ़ की स्थानीय राजनीतिक पहचान को केंद्र में रखकर एक व्यापक आंदोलन का स्वरूप लेगा, यह 25 अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक के बाद ज्यादा स्पष्ट हो सकता है।

👉50 दल एक मंच पर, अब सीटों का गणित बाकी

बैठक में बहुजन समाज पार्टी, छत्तीसगढ़िया पार्टी, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, भीम आर्मी/आजाद समाज पार्टी, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़, हमर राज पार्टी, बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा और छत्तीसगढ़ महतारी पार्टी समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सूत्रों के मुताबिक घटक दलों के बीच साझा घोषणापत्र और सीटों के बंटवारे को लेकर भी प्रारंभिक स्तर पर चर्चा चल रही है। अंतिम रूप अगले दौर की बैठक में दिए जाने की बात कही गई है।

👉चुनाव आयोग को लेकर भी उठे सवाल

बैठक में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी चिंता जताई गई। उपस्थित नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किए जाने की बात कही और निर्वाचन प्रक्रिया में नियमों तथा कानूनों के कड़ाई से पालन की मांग उठाई।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए हैं। कांग्रेस ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

25 अक्टूबर को होगा अगला बड़ा सियासी मंथन
तीसरे मोर्चे की अगली और व्यापक बैठक 25 अक्टूबर 2026 को होटल बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में प्रस्तावित है। इसी बैठक में गठबंधन के स्वरूप, साझा एजेंडे और चुनावी रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा होने की संभावना जताई गई है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं और अगला विधानसभा चुनाव 2028 में अपेक्षित है।

अब सवाल यही है कि करीब 50 दलों और संगठनों का यह जमावड़ा क्या स्थायी राजनीतिक गठबंधन का रूप लेगा? क्या जल-जंगल-जमीन, स्थानीय अस्मिता और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे इसे साझा मंच पर लंबे समय तक बांध पाएंगे? और सबसे बड़ा सवाल, क्या अलग-अलग राजनीतिक पहचान रखने वाले ये संगठन सीटों के बंटवारे और नेतृत्व के सवाल पर भी एकजुट रह पाएंगे?

25 अक्टूबर की बैठक इन सवालों के जवाब की दिशा तय कर सकती है।