KORBA :SECL कुसमुंडा खदान में नहीं थम रहे हादसे , 2 ट्रेलरों की टक्कर में ड्राइवर की मौत , DGMS नियमों का कागजों में हो रहा पालन …

कोरबा । एसईसीएल की कोयला खदानों में सुरक्षा को लेकर DGMS के कड़े नियम और मानक लागू हैं, लेकिन कुसमुंडा खदान में हुए ताजा हादसे ने इन नियमों के जमीनी स्तर पर पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसों का सिलसिला लगातार जारी रहने से खदानों में सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ताजा मामला एसईसीएल के मेगा प्रोजेक्ट कुसमुंडा कोल माइंस का है, जहां दो ट्रेलरों के बीच हुई जोरदार टक्कर में एक चालक वाहन के केबिन में बुरी तरह फंस गया। काफी मशक्कत के बाद रेस्क्यू कर चालक को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। कुसमुंडा खदान में हुए इस हादसे ने एक बार फिर वाहनों की आवाजाही, निर्धारित गति सीमा और DGMS के सुरक्षा नियमों के जमीनी स्तर पर पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक हादसा शनिवार को कुसमुंडा परियोजना के खदान क्षेत्र में हुआ। बताया जा रहा है कि खदान के भीतर कोयला परिवहन का काम नीलकंठ कंपनी को SECL की ओर से दिया गया है। इस कार्य का कुछ हिस्सा नीलकंठ कंपनी ने PKS नामक कंपनी को पेटी पर दे रखा है। शनिवार दोपहर दोनों कंपनियों के ट्रेलर खदान के भीतर कोयला परिवहन में लगे हुए थे। इसी दौरान तेजी से कोयला शिफ्ट करने की होड़ में दोनों ट्रेलरों के बीच जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक ट्रेलर का चालक केबिन के अंदर बुरी तरह फंस गया। हादसे के बाद मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद ट्रेलर के केबिन को काटकर चालक को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। हादसे में दूसरे ट्रेलर का चालक भी घायल हुआ, जिसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।

मृतक चालक की पहचान ग्राम रेलिया निवासी विश्व प्रसाद उर्फ बिट्टू के रूप में हुई है। हादसे की जानकारी मिलते ही खदान में बड़ी संख्या में कर्मचारी और ग्रामीण मौके पर जुट गए। लोगों ने कंपनी प्रबंधन और खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए विरोध शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर कुसमुंडा थाना प्रभारी मृत्युंजय पांडे भी मौके पर पहुंचे और आक्रोशित लोगों को समझाइश दी। वहीं, मृतक चालक के परिजनों ने उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग रखी। बताया जा रहा है कि प्रबंधन की ओर से मांगों पर सहमति दिए जाने के बाद लोगों का विरोध समाप्त हुआ।

👉DGMS ने खुद जताई है गंभीर चिंता

DGMS की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट में ओपनकास्ट कोयला खदानों में डंपर और टिपर से जुड़े कई हादसों का उल्लेख किया गया है। इनमें एक टिपर का दूसरे टिपर से टकराना और चालक की मौत होना भी शामिल है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई हादसों को वैधानिक प्रावधानों और सुरक्षित संचालन प्रक्रियाओं के पालन से रोका जा सकता था। DGMS ने स्पीड लिमिट के भीतर वाहन चलाने, सुरक्षित संचालन प्रक्रिया यानी SOP का पालन करने, वाहन में जरूरी सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित ऑपरेटर सुनिश्चित करने जैसे प्रावधानों का उल्लेख किया है।

👉DGMS का नियम हैं तो पालन कितना ?

कुसमुंडा खदान में हुआ भीषण हादसा अब इसी सवाल को सामने ला रहा है कि खदान के भीतर निर्धारित स्पीड लिमिट, ट्रैफिक मैनेजमेंट, वाहन की तकनीकी सुरक्षा, चालक की ट्रेनिंग और सुरक्षित संचालन प्रक्रिया की वास्तविक निगरानी कितनी प्रभावी है? अगर हादसे की जांच में तेज रफ्तार, ओवरटेकिंग, राइट ऑफ वे का उल्लंघन, वाहन की तकनीकी खराबी या सुरक्षा प्रक्रिया की अनदेखी सामने आती है, तो यह केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि खदान की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर समीक्षा का विषय होगा। इस मामले में यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि दोनों ट्रेलर किस कंपनी के थे, उनकी निर्धारित गति क्या थी, हादसे के समय वास्तविक गति कितनी थी, दोनों चालकों की ट्रेनिंग और अधिकृत संचालन की स्थिति क्या थी तथा वाहनों में DGMS द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपकरण काम कर रहे थे या नहीं।