CG : नंदराज पर्वत पर खनन को लेकर फिर बढ़ा विरोध , 18 गांवों के ग्रामीण हुए लामबंद , 7200 पेड़ों की कटाई ,ग्रामसभा की भूमिका पर उठे सवाल,राशन पानी के साथ आंदोलन की चेतावनी …

दंतेवाड़ा । छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में बैलाडीला के डिपॉजिट-13 और नंदराज पर्वत क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर एक बार फिर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। नंदराज पर्वत में खनन की अनुमति को लेकर एक तरफ जहां विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर बना हुआ है। वहीं दूसरी तरफ रविवार को पहाड़ियों के पीछे बसे तामोड़ी गांव में संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति की बैठक हुई। इस बैठक में गमपुर, डोलीगुड़ा और हिरोली समेत 18 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में नंदराज पर्वत को बचाने, पेड़ों की कटाई रोकने और आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की गयी।

गौरतलब है कि नंदराज पर्वत में खनन को लेकर सूबे में सियासत गरमाया हुआ है। पूर्ववती कांग्रेस शासनकाल में उक्त खनन पर रोक लगाने के निर्णय के बाद अब दोबारा अनुमति दिये जाने को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। वहीं बैलाडीला के डिपॉजिट-13 और नंदराज पर्वत क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर स्थानीय ग्रामीण एक बार फिर आंदोलन के मूड में नजर आ रहे है। बताया जा रहा है कि रविवार को आयोजित बैठक में डिपॉजिट-13 की पहाड़ी तक रास्ता बनाने के लिए पेड़ों की कटाई का मुद्दा प्रमुखता से उठा। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 7200 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है और वन विभाग ने काटे जाने वाले पेड़ों की मार्किंग भी कर दी है।

समिति से जुड़े लोगों का आरोप है कि ठेकेदार के जरिए पेड़ों की कटाई शुरू कराने की तैयारी है। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने विरोध तेज करने की बात कही है। हाल के दिनों में 7200 पेड़ों की कटाई की अनुमति को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक विरोध भी सामने आया है। हालांकि, 7200 पेड़ों की अनुमति और कटाई की मौजूदा स्थिति से जुड़े दावों पर संबंधित विभाग या परियोजना प्रबंधन की आधिकारिक स्थिति इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

👉2019 में भी हुआ था बड़ा आंदोलन

डिपॉजिट-13 को लेकर ग्रामीणों का विरोध नया नहीं है। संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति से जुड़े लोगों के अनुसार, वर्ष 2019 में किरंदुल स्थित एनएमडीसी चेकपोस्ट के सामने करीब पांच दिनों तक प्रदर्शन किया गया था। उस आंदोलन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए थे। समिति का दावा है कि उस दौरान एनएमडीसी की शिफ्ट बसों को भी रोका गया था और आंदोलन के चलते कंपनी का उत्पादन प्रभावित हुआ था। समिति से जुड़े लोगों ने उस समय कंपनी को 100 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का दावा किया है। यह आंकड़ा समिति का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

2019 में डिपॉजिट-13 को लेकर आदिवासी आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने परियोजना से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। उस समय ग्रामीणों ने नंदराज पर्वत को धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र बताते हुए खनन का विरोध किया था। स्थानीय आदिवासी समुदाय लंबे समय से नंदराज पर्वत को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जोड़कर देखता है। डिपॉजिट-13 में प्रस्तावित खनन को लेकर पहले भी यह सवाल उठता रहा है कि विकास परियोजना और स्थानीय समुदाय के धार्मिक एवं पारंपरिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा।

तामोड़ी में हुई बैठक में पर्यावरण बचाओ मंच, मूलवासी बचाओ मंच और आदिवासी समाज के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। समिति ने फैसला लिया कि नंदराज पर्वत और डिपॉजिट-13 से जुड़े मुद्दों को अब गांव-गांव तक ले जाया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ों की कटाई और खनन से जुड़े सवालों पर अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाएगा। समिति जल्द ही आंदोलन की अगली तारीख और स्थान की घोषणा करने की बात कह रही है।

👉ग्रामसभा की भूमिका पर भी सवाल

बैठक में अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा के अधिकार और उसकी भूमिका का मुद्दा भी उठाया गया। ग्रामीणों ने मांग की कि ग्रामसभा की कार्यवाही सार्वजनिक की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि परियोजना से संबंधित फैसलों में ग्रामसभा की क्या भूमिका रही है। ग्रामीणों ने जमीन की लीज, उसकी शर्तों और लीज में हुए बदलावों से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग की है।
हाल के दिनों में डिपॉजिट-13 से लौह अयस्क का सैंपल नगरनार भेजे जाने की खबरों के बाद भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक हिरोली में हुई बैठक में ग्रामीणों ने सैंपल भेजे जाने को लेकर विरोध जताया था। वहीं कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि डिपॉजिट-13 से संबंधित शुरुआती गतिविधियां जुलाई 2026 में शुरू होने की जानकारी सामने आई थी। परियोजना की मौजूदा वैधानिक स्थिति और सभी आवश्यक अनुमतियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।

👉राशन-पानी के साथ आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों का कहना है कि नंदराज क्षेत्र से जुड़ी लीज और खनन गतिविधियों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। अब राशन-पानी लेकर धरने पर बैठने और आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल तामोड़ी की बैठक के बाद आंदोलन की अगली तारीख का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन 18 गांवों की बैठक और गांव-गांव संपर्क की तैयारी से साफ है कि डिपॉजिट-13 और नंदराज पर्वत का खनन विवाद एक बार फिर बड़े ग्रामीण आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।