CG : राजधानी में RERA की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कम्प , बिना पंजीयन प्लॉट बेच रहे डेवलपर पर लगाया 8 लाख का अर्थदंड …

रायपुर । बिना RERA पंजीयन के प्लॉटेड ले-आउट में भूखंडों की बिक्री करना महागणपति डेव्हलपर्स को भारी पड़ गया। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए डेवलपर पर ₹8 लाख का अर्थदंड लगाया है। साथ ही संबंधित परियोजना को RERA के तहत पंजीकृत कराने के निर्देश दिए गए हैं। मामला सामने आने के बाद CGRERA ने खुद संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू की। प्राधिकरण के सामने यह तथ्य आया कि महागणपति डेव्हलपर्स की ओर से एक प्लॉटेड ले-आउट परियोजना विकसित कर उसमें भूखंडों का विक्रय किया जा रहा था, जबकि परियोजना का RERA में पंजीयन नहीं कराया गया था।

जानकारी के मुताबिकप्रकरण की सुनवाई के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच की गई। इसके बाद प्राधिकरण ने पाया कि यह RERA अधिनियम की धारा 3 के प्रावधानों का उल्लंघन है। RERA के तहत पंजीयन योग्य किसी परियोजना का प्राधिकरण में पंजीयन कराए बिना उसका विज्ञापन, मार्केटिंग, बुकिंग या बिक्री के लिए प्रस्ताव करना प्रतिबंधित है। इसी प्रावधान के उल्लंघन को देखते हुए CGRERA ने महागणपति डेव्हलपर्स पर 8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सिर्फ जुर्माना लगाने तक मामला सीमित नहीं रहा। प्राधिकरण ने संबंधित परियोजना को RERA के तहत पंजीकृत कराने के निर्देश भी दिए हैं। इसका उद्देश्य परियोजना के विकास और भूखंडों की बिक्री को कानूनी प्रावधानों के अनुरूप लाना और खरीदारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

👉बिना पंजीयन प्लॉट बेचने वालों को CGRERA की चेतावनी

CGRERA ने स्पष्ट किया है कि पंजीयन योग्य परियोजनाओं में बिना RERA पंजीयन के प्लॉट या अन्य इकाइयों का विज्ञापन, मार्केटिंग, बुकिंग या विक्रय करना कानून का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में प्राधिकरण स्वप्रेरणा से संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकता है। दोषी पाए जाने पर प्रमोटरों के खिलाफ अर्थदंड के साथ अधिनियम में निर्धारित अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

👉प्लॉट खरीदने से पहले RERA रजिस्ट्रेशन जरूर जांचें

इस कार्रवाई के बाद रियल एस्टेट खरीदारों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश है। किसी प्लॉटेड प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से पहले परियोजना का RERA पंजीयन, प्रमोटर की जानकारी और परियोजना से जुड़े दस्तावेजों की जांच करना जरूरी है। इससे बिना पंजीयन वाली परियोजनाओं में निवेश के जोखिम को कम किया जा सकता है।