CG: तेलीबांधा चौक के नाम पर गरमाई सियासी फिजा ,भूपेश बघेल के आरोप के बाद CM साय का पलटवार, कहा – गलतफहमी में न रहें,नाम नहीं बदला जा रहा …

राजनीतिक विवादों के बीच

रायपुर । राजधानी रायपुर के तेलीबांधा चौक के नाम को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के स्पष्टीकरण के बाद नए मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री की ओर से तेलीबांधा चौक को ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के रूप में विकसित करने की बात सामने आने के बाद इसके नाम बदले जाने को लेकर चर्चा और विरोध शुरू हुआ था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे साहू समाज की पहचान और भावनाओं से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए थे। अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि तेलीबांधा चौक का नाम बदला नहीं जा रहा है, किसी भी प्रकार की गलतफहमी में न रहें।

सीएम साय के इस स्पष्टीकरण पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “चलिए… जल्दी सदबुद्धि आ गई। साहू समाज की नाराज़गी का ही असर है। समाज की एकता ही सबसे बड़ी ताक़त है।”

तेलीबांधा चौक का कोई नाम परिवर्तन नहीं किया जा रहा है। किसी भी प्रकार की गलतफहमी में न रहें।
वहाँ केवल सेवा ज्योति संकल्प के रूप में विकास कार्य किया जाएगा। चौक का न तो नाम बदला जा रहा है और न ही उसमें कोई छेड़छाड़ की जा रही है।

विष्णु देव साय ,मुख्यमंत्री छग शासन

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर को सेवा संकल्प अभियान के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के 38 स्थानों पर ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ विकसित किए जाने की बात कही थी। इनमें रायपुर के तेलीबांधा चौक का नाम भी शामिल बताया गया। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या शहर के इस प्रमुख चौक का नाम बदला जा रहा है। इसके बाद साहू समाज की ओर से विरोध के स्वर सामने आए। समाज से जुड़े प्रतिनिधियों ने तेलीबांधा नाम को सामाजिक पहचान और इतिहास से जुड़ा बताते हुए नाम परिवर्तन का विरोध किया। मामला राजनीतिक रूप लेने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री साय का वीडियो शेयर करते हुए सवाल उठाया था। बघेल ने कहा था कि तेलीबांधा सिर्फ एक चौक का नाम नहीं है, बल्कि साहू समाज की आस्था, पहचान और गौरव से जुड़ा है।

चलिए… जल्दी सदबुद्धि आ गई.

साहू समाज की नाराज़गी का ही असर है. समाज की एकता ही सबसे बड़ी ताक़त है.

👉अब CM साय ने साफ किया- नाम नहीं बदला जाएगा

विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि तेलीबांधा चौक का नाम नहीं बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि….“तेलीबांधा चौक का कोई नाम परिवर्तन नहीं किया जा रहा है। किसी भी प्रकार की गलतफहमी में न रहें। वहाँ केवल सेवा ज्योति संकल्प के रूप में विकास कार्य किया जाएगा। चौक का न तो नाम बदला जा रहा है और न ही उसमें कोई छेड़छाड़ की जा रही है।” मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश के 38 स्थानों को ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के तहत विकसित किया जा रहा है। तेलीबांधा चौक भी इसी योजना में शामिल है, लेकिन इसका मौजूदा नाम बरकरार रहेगा। इसे केवल ‘सेवा ज्योति संकल्प’ की भावना के अनुरूप विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री के स्पष्टीकरण के बाद भूपेश बघेल ने एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा- “चलिए…. जल्दी सद्बुद्धि आ गई। साहू समाज की नाराज़गी का ही असर है, समाज की एकता ही सबसे बड़ी ताक़त है।”

बघेल की इस प्रतिक्रिया को मुख्यमंत्री के स्पष्टीकरण पर राजनीतिक तंज के तौर पर देखा जा रहा है। यानी जिस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए थे, अब उसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री का पक्ष और स्थिति स्पष्ट होने के बाद सियासत का दूसरा दौर शुरू हो गया है। पूरे विवाद में दो बातें सामने आईं। पहली, ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के रूप में तेलीबांधा को विकसित करने की घोषणा के बाद इसे नाम परिवर्तन से जोड़कर देखा गया। दूसरी मुख्यमंत्री ने अब साफ कहा है कि तेलीबांधा नाम यथावत रहेगा। वहीं, नगर निगम से जुड़ी एक रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ का नामकरण रिंग रोड और तेलीबांधा थाना के समीप स्थित ट्रैफिक आइलैंड के लिए है, जबकि तेलीबांधा तालाब के दोनों ओर मौजूद चौकों के नाम बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

👉अब सवाल- नाम बदलेगा या सिर्फ विकास होगा ?

मुख्यमंत्री के बयान के बाद नाम परिवर्तन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है कि तेलीबांधा चौक का नाम नहीं बदला जाएगा। हालांकि, ‘सेवा ज्योति संकल्प’ के तहत वहां किस तरह के विकास और सौंदर्यीकरण के काम होंगे, यह आगे स्पष्ट होगा। यानी जिस मुद्दे ने राजधानी की राजनीति में कुछ ही समय में हलचल पैदा कर दी थी, उस पर मुख्यमंत्री की सफाई के बाद फिलहाल तस्वीर साफ है। तेलीबांधा नाम बरकरार रहेगा, जबकि चौक को ‘सेवा ज्योति संकल्प’ की भावना के अनुरूप विकसित किया जाएगा। अब राजनीतिक तौर पर देखना होगा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा की बयानबाजी आगे कितनी बढ़ती है और ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के विकास को लेकर सरकार की अगली कार्रवाई क्या होती है।