CG : कागजों में ‘ सुशासन ‘ धरातल पर बदहाली ! 2 डिप्टी CM की फटकार ने अफसरशाही के दावों की खोली पोल, पूछे श्री साव -मुख्य मार्ग के ब्रीजों का ये हाल बनाकर रखे हैं, क्या आप लोग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे है ?”

रायपुर । छत्तीसगढ़ में सरकारी सिस्टम की जमीनी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि ये सवाल विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि सरकार के ही दो डिप्टी सीएम के हालिया औचक निरीक्षण और नाराजगी से सामने आए हैं। एक दिन पहले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने हाईवे पर मवेशियों को देखकर अफसरों को फटकार लगाई, तो अब उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सरगुजा में जर्जर पुल को देख भड़क गये और बीच सड़क पर ही अफसरों की क्लास लगा दी। जर्जर पुल की सड़क पर निकले राॅड को देख डिप्टी सीएम ने अफसरों से यहां तक कह दिया कि…“मुख्य मार्ग के ब्रीजों का ये हाल बनाकर रखे है, क्या आप लोग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे है ?”

जानकारी के मुताबिक आज गुरूवार कोसरगुजा प्रवास के दौरान डिप्टी सीएम अरुण साव ने प्रतापपुर-अंबिकापुर-खड़गवां मार्ग पर महानदी पुल का औचक निरीक्षण किया। पुल पर सड़क की स्थिति देखने के बाद उन्होंने अधिकारियों को तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए। साव ने अपने एक्स पोस्ट में अधिकारियों को दो टूक संदेश देते हुए कहा कि…अधिकारियों को मैदान में उतरकर काम करना होगा और सरगुजा के एसी कमरे वाले अधिकारी चेत जाएं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि उन्हें खुद मौके पर आकर यह बताना पड़ रहा है कि कहां गड़बड़ी है और कहां मरम्मत की जरूरत है। यानी सवाल अब यह है कि अगर विभागीय अधिकारी लगातार फील्ड मॉनिटरिंग कर रहे हैं, तो जर्जर पुल और सड़क की स्थिति डिप्टी सीएम के औचक निरीक्षण तक क्यों पहुंची ?

👉एक दिन पहले विजय शर्मा भी सड़क पर उतरकर हुए थे नाराज

इससे ठीक एक दिन पहले डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कवर्धा-बेमेतरा मार्ग पर सड़क के बीच बैठे मवेशियों को देखा, तो अपना वाहन रुकवा दिया। उन्होंने मौके से ही अधिकारियों से हाईवे पेट्रोलिंग की जानकारी ली और पेट्रोलिंग वाहन को भी बुलवाया। विजय शर्मा ने अधिकारियों से नियमित पेट्रोलिंग, पशु रेस्क्यू और सड़क सुरक्षा समिति के निर्देशों के पालन की जानकारी ली। उन्होंने साफ कहा कि हाईवे पर इस तरह की लापरवाही नहीं चल सकती और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

👉दोनों घटनाओं में एक ही सवाल- अफसरों की निगरानी कहां है ?

दोनों घटनाओं को साथ रखकर देखें तो सवाल सिर्फ एक पुल या सड़क पर बैठे मवेशियों का नहीं रह जाता। सवाल सरकारी मशीनरी की उस मॉनिटरिंग व्यवस्था पर है, जिसके तहत अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सड़क, पुल, हाईवे और सार्वजनिक सुविधाओं की नियमित निगरानी करनी होती है। अगर डिप्टी सीएम को खुद अचानक मौके पर पहुंचकर जर्जर सड़क और हाईवे पर बैठे मवेशी दिखाई दे रहे हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि संबंधित अधिकारियों की नियमित फील्ड विजिट और मॉनिटरिंग कितनी प्रभावी है।

विष्णु देव साय सरकार के कार्यकाल में विकास और सुशासन को लेकर लगातार दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कुछ सवाल अभी भी बने हुए हैं। प्रदेश के अधिकांश इलाकों में जर्जर सड़कें और पुल-पुलिया, बारिश के बाद खराब रास्ते, गांवों में पेयजल से जुड़ी शिकायतें और बिजली के बिल व टैरिफ को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता जैसे मुद्दे सरकार के सामने चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में आम आदमी के लिए सरकारी विकास का पैमाना सिर्फ योजनाओं और घोषणाओं से नहीं, बल्कि सड़क कितनी अच्छी है, पानी कितना साफ और नियमित है और बिजली का खर्च कितना पड़ रहा है, इससे तय होता है।

आज सरगुजा प्रवास के दौरान प्रतापपुर-अंबिकापुर खड़गवां मार्ग पर महानदी पुल का औचक निरीक्षण किया। पुल पर सड़क की स्थिति पर अधिकारियों को तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों को मैदान में उतरकर काम करना होगा, सरगुजा के एसी कमरे वाले अधिकारी चेत जाएं।

👉विपक्ष के लिए भी सरकार को घेरने का मौका

सरकार के ही मंत्रियों की ओर से अधिकारियों की कार्यशैली पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताए जाने से विपक्ष को भी सरकार पर सवाल उठाने का मौका मिल सकता है। हालांकि इन दोनों घटनाओं को सीधे तौर पर पूरे सरकारी सिस्टम की विफलता कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन ये घटनाएं ग्राउंड मॉनिटरिंग और अधिकारियों की जवाबदेही पर जरूर सवाल खड़े करती हैं।

👉अब असली सवाल—निरीक्षण के बाद बदलेगा सिस्टम?

अरुण साव का “AC कमरे वाले अधिकारी चेत जाएं” कहना और विजय शर्मा का सड़क पर मवेशियों को लेकर अधिकारियों को फटकारना, दोनों घटनाएं एक ही सवाल की ओर इशारा करती हैं—क्या सरकारी योजनाओं और फाइलों की मॉनिटरिंग के साथ-साथ उनका वास्तविक ग्राउंड निरीक्षण भी हो रहा है ? क्योंकि आम जनता के लिए सरकार का काम किसी फाइल, बैठक या प्रेस रिलीज में नहीं, बल्कि चलने लायक सड़क, सुरक्षित पुल, साफ पानी, सुरक्षित हाईवे और नियंत्रित बिजली खर्च के रूप में दिखाई देता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि दो दिन के भीतर दो डिप्टी सीएम की फटकार सिर्फ मौके की नाराजगी बनकर रह जाती है या अधिकारियों की जवाबदेही और जमीनी मॉनिटरिंग की व्यवस्था में स्थायी बदलाव भी दिखाई देता है।