CG : चारागाह की भूमि पर कथित कब्जे को लेकर बवाल ,शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने हार्वेस्टर से कटवा डाली धान की फसल ..

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में चारागाह की जमीन पर कथित कब्जे को लेकर विवाद सामने आया है। राजिम क्षेत्र के जेंजरा पंचायत अंतर्गत मूड़तरई गांव में ग्रामीणों ने गांव के ही एक व्यक्ति पर चारागाह की जमीन पर कब्जा कर धान की फसल लगाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बावजूद प्रशासन ने समय पर कार्रवाई नहीं की। इससे नाराज ग्रामीण खेत में पहुंचे और हार्वेस्टर से धान की फसल कटवा दी। घटना की सूचना मिलने के बाद तहसीलदार और पुलिस बल मौके पर पहुंचे।

जानकारी के मुताबिक ये पूरा मामला राजिम क्षेत्र के ग्राम पंचायत जेंजरा अंतर्गत आने वाले मूड़तरई गांव का है। ग्रामीणों के मुताबिक, चारागाह की जमीन गांव के पशुओं के चरने के लिए उपयोग में लाई जाती है। आरोप है कि इस जमीन पर गांव के ही एक ग्रामीण ने दबंगई पूर्वक कब्जा कर धान की फसल लगा दी गई। ग्रामीणों ने इसे सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अतिक्रमण का मामला बताते हुए नाराजगी जताई है। चारागाह की जमीन पर कब्जे की शिकायत जिला प्रशासन में भी की गयी। लेकिन प्रशासन और राजस्व विभाग ने ग्रामीणों की शिकायत पर गंभीरता नहीं दिखाई।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें खुद मैदान में उतरना पड़ा। इसी विरोध के बीच ग्रामीण खेत में पहुंचे और हार्वेस्टर की मदद से फसल कटवा दी। इस कदम के बाद मामला और गंभीर हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम में ग्रामीणों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कथित अतिक्रमण पर कार्रवाई की जाती, तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। ग्रामीण अब चारागाह की जमीन से कब्जा हटाने और उसे गांव के सामुदायिक उपयोग के लिए मुक्त कराने की मांग कर रहे हैं।

👉मौके पर पहुंचे तहसीलदार और पुलिस

घटना की जानकारी मिलने के बाद तहसीलदार और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। अब प्रशासन के सामने जमीन की वास्तविक स्थिति, राजस्व रिकॉर्ड और कथित अतिक्रमण की जांच करने की चुनौती है। फिलहाल, संबंधित व्यक्ति का पक्ष और प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है। मूड़तरई गांव की यह घटना सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि राजस्व विभाग जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है और ग्रामीणों की चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग पर क्या फैसला लिया जाता है।