दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में सड़क हादसे के एक मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। तेज रफ्तार और लापरवाही से बाइक चलाकर एक्टिवा को टक्कर मारने के मामले में सत्र न्यायालय ने बाइक चालक बेटे को 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बेटे को बाइक चलाने देने पर पिता को भी 3 महीने के साधारण कारावास से दंडित किया गया है। यह फैसला उन अभिभावकों के लिए चेतावनी है, जो अपने बच्चों को बिना लाइसेंस वाहन चलाने देते हैं।
👉तेज रफ्तार बाइक ने एक्टिवा को मारी टक्कर
अभियोजन के मुताबिक, घटना पिछले साल 4 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे कोलका स्थित इंदु आईटी स्कूल के पास हुई थी। आरोपी मोहित बघेल अपने दोस्त वासुदेव ठाकुर को पीछे बैठाकर तेज रफ्तार में बाइक चला रहा था। वह सड़क पर बाइक को लहराते हुए आगे बढ़ रहा था। वासुदेव ने उसे टोकते हुए दुर्घटना होने की आशंका भी जताई, लेकिन मोहित ने रफ्तार कम नहीं की।
👉हादसे में एक की मौत, दूसरा गंभीर घायल

इसी दौरान बाइक अनियंत्रित होकर विपरीत दिशा में चली गई और सामने से आ रही एक्टिवा से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक्टिवा सवार शादान अली के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई, जबकि उनके साथी उत्तम पांड गंभीर रूप से घायल हो गए।
👉बेटे को 5 साल और पिता को 3 महीने की जेल
मामले की सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर की अदालत ने बाइक चालक मोहित बघेल को 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं, बिना लाइसेंस बेटे को वाहन चलाने देने के मामले में उसके पिता को 3 महीने के साधारण कारावास से दंडित किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक द्रोण ताम्रकार ने पैरवी की।
👉बिना लाइसेंस वाहन देना अभिभावकों को भी पड़ सकता है भारी
मोटरयान अधिनियम के तहत वाहन मालिक द्वारा बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाले व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर वाहन चलाने देना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। ऐसे मामलों में वाहन मालिक पर भी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। दुर्ग की अदालत का यह फैसला अभिभावकों को अपने बच्चों को वाहन सौंपने से पहले उनकी कानूनी पात्रता और ड्राइविंग लाइसेंस सुनिश्चित करने का संदेश देता है।
👉3 साल में नाबालिग वाहन चालकों के 201 मामले
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ कुल 201 प्रकरणों में कार्रवाई की गई है। वर्ष 2024 में 13, वर्ष 2025 में 78 और वर्ष 2026 में अब तक 110 प्रकरण दर्ज किए गए। आंकड़े बताते हैं कि हर साल ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है। पुलिस कार्रवाई के बावजूद बिना लाइसेंस वाहन चलाने की समस्या बनी हुई है।
