बिहार । बिहार के नालंदा जिले में बिहारशरीफ के पास एक बड़ी घटना हो गई है। मघड़ा शीतला मंदिर के पास लगे मेले में अचानक भगदड़ मच गई है। हादसे में मरने वालों की संख्या के लगातार बढ़ते जाने की खबरें आ रही हैं।जानकारी के मुताबिक अभी तक 8 महिलाएं दम तोड़ चुकी हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
बताया जा रहा है कि 1 दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक दीपनगर थाना क्षेत्र में यह घटना हुई है। पूजा के दौरान यह हादसा हुआ है। दरअसल चैत माह का आखिरी मंगलवार होने की वजह से यहां भीड़ जुटी हुई थी।
👉क्यों मची नालंदा में भगदड़

बताया जा रहा है कि मघड़ा शीतला मंदिर में हद से ज्यादा भीड़ होने की वजह से यह दुखद हादसा हुआ है। आज चैत माह के आखिरी मंगलवार की पूजा थी और इसी वजह से बड़ी संख्या में महिलाएं यहां पर इकट्ठा थीं। बेकाबू भीड़ को प्रशासन रोकने में असफल रहा, जिसकी वजह से भगदड़ मच गई। प्रशासन ने मेला और मंदिर को बंद कर दिया है।
👉क्या पहले दर्शन करने के चक्कर में मची भगदड़
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मंदिर में काफी भीड़ हो गई थी और हर कोई पहले दर्शन के लिए धक्का-मुक्की करने की कोशिश में था। एक महिला ने बताया कि पहले दर्शन करने के चक्कर में लोग एक-दूसरे के ऊपर भी चढ़े जा रहे थे। कोई लाइन में नहीं लगना चाहता। इसमें प्रशासन की कमजोरी की वजह से यह हादसा हुआ है। इसी वजह से हालात बेकाबू हो गए। यहां हर मंगलवार को भीड़ जुटती है, लेकिन चैत का आखिरी मंगलवार होने की वजह से ज्यादा भीड़ थी।
👉राहत-बचाव कार्य जारी
नालंदा में आज राष्ट्रपति का भी कार्यक्रम है। ऐसे में प्रशासन उसकी तैयारियों में भी जुटा हुआ है। प्रशासन लोगों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। पुलिस बल मौके पर पहुंच गया है और बचाव और राहत कार्य जारी है।
👉चंद्रगुप्त के शासनकाल का है मंदिर
घायलों को इलाज के लिए मॉडल अस्पताल भेजा गया है। नालंदा जिले के बिहारशरीफ से कुछ किलोमीटर की दूरी पर यह मंदिर स्थित है। इस मंदिर की मान्यता न सिर्फ बिहार बल्कि देश-विदेश में है। मघड़ा गांव की पहचान सिद्धपीठ के रूप में की जाती है। कहा जाता है कि यहां कभी गुप्तकाल शासक चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान चीन के मशहूर यात्री फाह्यान ने भी पूजा की थी। जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित इस मंदिर में 10 मार्च से शीतला माता का अद्भुत मेला भी शुरू हुआ था। यह मेला तीन दिनों तक चला था।
