2 करोड़ की नकली दवाओं के साथ 6 गिरफ्तार , 50 करोड़ रुपये के फर्जी इनवॉइस और कई शेल कंपनियों का खुलासा

👉नामी ब्रांड के जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर नकली मैन्युफैक्चरिंग, स्टोरेज और डिस्ट्रिब्यूशन में शामिल एक ऑर्गेनाइज्ड इंटरस्टेट नेटवर्क बेनकाब, जानें नेटवर्क कैसे करता है काम …

दिल्ली । क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने नकली जीवन रक्षक दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग, स्टोरेज और डिस्ट्रिब्यूशन में शामिल एक बहुत ही ऑर्गेनाइज्ड इंटरस्टेट नेटवर्क को पकड़ा है। नकली इनवॉइस बनाने और गैर-कानूनी कारोबार को लॉन्ड्रिंग करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली फर्जी GST फर्मों के एक पैरेलल रैकेट का भी पर्दाफाश किया है।

इस ऑपरेशन में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 1.2 लाख से ज्यादा नकली टैबलेट/कैप्सूल जब्त किए हैं। एक गैर-कानूनी दवा बनाने वाली यूनिट का भंडाफोड़ हुआ है। 50 करोड़ के नकली GST बिलिंग नेटवर्क का भी पता चला है।

आरोपियों की पहचान शाहदरा के बिहारी कॉलोनी निवासी निखिल अरोड़ा (होलसेलर), गाजियाबाद शिवम त्यागी (सप्लायर), मोदी नगर के मयंक अग्रवाल (सप्लायर), हरिद्वार रुड़की के मोहित कुमार शर्मा (उत्तराखंड से मुख्य सप्लायर), मुरादनगर के शाहरुख (फर्जी GST फर्मों के प्रोवाइडर) और दिल्ली के स्वरूप नगर निवासी राहुल (फर्जी GST फर्मों के प्रोवाइडर) के तौर पर हुई है। बरामद दवाओं की कीमत करीब 2 करोड़ रुपये है। जिन दवाओं के नाम पर ये नकली दवाइयां बनाई जा रही थीं, वे आमतौर पर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती हैं।

👉बड़ी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में गिरोह चला रहा था अवैध दवा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट
यह यूनिट करीब 1000 वर्ग गज में फैली थी। यहीं बड़े पैमाने पर नकली दवा बना रहे थे आरोपी
नकली दवाओं का थोक कारोबारी गिरफ्तार

डीसीपी आदित्य गौतम के मुताबिक 11 मार्च को मिली सूचना के आधार पर भागीरथी पैलेस स्थित बाबा श्याम मेडिकोज पर छापा मारा गया। यहां से निखिल अरोड़ा उर्फ सनी को गिरफ्तार किया, जो नकली दवाओं का थोक कारोबार चला रहा था। बरामद दवाओं में कई नामी ब्रैंड के नाम पर नकली दवाई की पैकिंग मिली। जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट करने के लिए नकली जीएसटी फर्मों का सहारा लिया जा रहा था।

👉फर्जी जीएसटी फर्मों और मैसेजिंग ऐप्स से चलता था नेटवर्क

इन फर्जी कंपनियों के जरिए नकली बिल बनाए जाते थे, जिससे गैर-कानूनी सप्लाई को वैध दिखाया जा सके। पुलिस के मुताबिक, शाहरुख और राहुल नाम के आरोपी टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के माध्यम से इस नेटवर्क को चला रहे थे। उनके मोबाइल फोन की जांच में लगभग 50 करोड़ रुपये के फर्जी इनवॉइस और कई शेल कंपनियों का खुलासा हुआ है।

👉जांच में दवाएं पूरी तरह नकली, लाइसेंस भी नहीं मिला

ड्रग कंट्रोल विभाग और फार्मास्युटिकल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने पुष्टि की है कि जब्त की गई सभी दवाएं पूरी तरह नकली हैं और इन्हें किसी अधिकृत कंपनी द्वारा न तो बनाया गया है और न ही सप्लाई किया गया है। इसके अलावा संबंधित स्थान पर दवाओं के स्टॉक या बिक्री का कोई वैध लाइसेंस भी नहीं मिला। पूछताछ के आधार पर पुलिस ने मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में एक अवैध दवा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का भी भंडाफोड़ किया।

👉आरोपियों को किया गया गिरफ्तार

यह यूनिट करीब 1000 वर्ग गज में फैली थी और बड़े पैमाने पर नकली दवाओं का उत्पादन कर रही थी। यहां से भारी मात्रा में कच्चा माल, आधुनिक मशीनरी और नकली पैकेजिंग सामग्री बरामद की गई। इस मामले में दिल्ली, गाजियाबाद, मोदीनगर और उत्तराखंड से जुड़े कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक मुख्य आरोपी फरार है। जांच जारी है, ताकि इस पूरे नेटवर्क के अन्य लिंक को भी उजागर किया जा सके।