बिलासपुर । संभागायुक्त
कार्यालय बिलासपुर संभाग रेशम विभाग रायगढ़ की ढाल बनी हुई है।
वित्तीय वर्ष 2024 -25 में क्रय किए गए रैली -कोसा के भौतिक सत्यापन पपत्र एवं केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं के तहत 1 करोड़ 80 लाख की लागत से स्वीकृत कार्यों के भुगतान प्रक्रियाओं की व्यापक लोकहित में किए गए लिखित जांच अनुरोध को 6 माह से लटकाए रखा है। विभागीय एवं संभागायुक्त कार्यालय की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सीएम हाउस प्रकरण में कब संज्ञान लेकर जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश देती है।

यहाँ बताना होगा कि कार्यालय आयुक्त बिलासपुर संभाग,जिला -बिलासपुर (छग) के यहाँ पत्र क्रमांक 7602 दिनांक 10.09.2025 के माध्यम से व्यापक लोकहित में एक जांच अनुरोध /शिकायत पत्र प्रेषित किया गया था। प्रेषित पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया था कि कार्यालय उप संचालक रेशम रायगढ़ ,जिला -रायगढ़ (छ.ग.) के द्वारा वित्तीय वर्ष 2024 -25 में विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन के एवज में तकरीबन 1 करोड़ 80 लाख 27 हजार 431 रुपए से अधिक के कार्यों में वित्तीय अनियमितता की शिकायत विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त हो रही है।जिसको लेकर मेरे द्वारा सूचना के अधिकार के तहत तकरीबन 12 हजार रुपए की जानकारी प्राप्त कर विश्वस्त सूत्रों से परीक्षण करवाया गया है। महोदय आपको बताना चाहूंगा कि सबसे अधिक अनियमितता की शिकायत रेशम उत्पादन के कच्चे उत्पाद रैली-कोसा की व्यापारियों से खरीदी ,इसके गुणवत्ता परीक्षण एवं सत्यापन प्रमाण पत्र को लेकर आ रही है। विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिल रही है उसके अनुसार साल के वृक्षों में रैली कोसा -कोकून उत्पादन को बढ़ावा देने व्यापारियों से क्रय किए गए रैली कोसा के नाम पर निर्धारित नियमों को ताक में रखकर निहित स्वार्थों की पूर्ति की गई है। निर्धारित शेल भार से कम वाले रैली कोसा ग्रेड -2 एवं ग्रेड -3 रैली कोसा की साबुत ग्रेड-1 रैली कोसा, रैली कोसा-पोली ग्रेड-1 में की दर पर खरीदी कर ली गई है। जिसकी गुणवत्ता भी संतुष्टिजनक स्वीकार्य योग्य नहीं थी। गुणवत्ता परीक्षण सत्यापन प्रमाण पत्र जारी करते समय कमीशन की लालच में जिम्मेदार अफसरों एवं व्यापारियों की जुगलबंदी में भ्रष्टाचार का यह खेल खेला गया है। गुणवत्ता परीक्षण सत्यापन प्रमाण पत्र की जांच से विभागीय अफसरों के ईमान डोलने की पुष्टि हो जाएगी।
बात करें कोसा संग्राहक परिवार की तो उनसे भी छलावा किया गया है। बुनियादी बीज प्रगुणन एवं प्रशिक्षण केंद्र केन्द्रीय रेशम बोर्ड बोरईदार रायगढ़ द्वारा स्वस्थ डिम्ब समूह का कोसाफल लेकर निम्न ग्रेड का आंकलन कर भुगतान किए जाने की विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिल रही है।जिसकी अनियमितता उजागर हो जाए इस डर से देयक व्हाउचर देने के समय बड़ी चालाकी से उप संचालक रेशम रायगढ़ ने लिपिकों की सहायता से हमें समूहों के नाम वाले हिस्से को पूरी तरह छिपाकर एक साइड प्लेन कर जानकारी की सत्यप्रतिलिपि भेजी है। जिसमें 11 लाख 480 रुपए से अधिक के भुगतान की जानकारी इंद्राज है।उक्त कार्य उप संचालक रेशम रायगढ़ के छलकपट बईमान नीयत को प्रदर्शित करता है। इसकी मूल दस्तावेजों की जांच किए जाने से उपरोक्त अनियमितता स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।
बात करें केंद्र प्रवर्तित योजनाओं की तो यहाँ भी अनियमितताओं की शिकायत कम नहीं हैं। वित्तीय वर्ष 2024 -25 में ही केंद्रीय सिल्क समग्र – 2 योजनान्तर्गत रेशम विस्तार कृषक को पौधरोपण /सिंचाई सुविधा /कृमिपालन भवन ,उपकरण ,गृह निरोधीकरण सामाग्री हेतु दिए जाने वाले अनुदान राशि एवं उस अनुदान राशि के बंदरबाट की विश्वसनीय सूत्रों से शिकायत मिल रही थी। जिसको लेकर मांगी गई जानकारी में 136 पृष्ठों की जानकारी की सत्यप्रतिलिपि प्रदाय की गई है। जिसमें हितग्राहियों के प्रथम एवं द्वितीय किश्त के तौर पर 87 लाख 30 हजार रुपए का अनुदान दिया गया है। उक्त अनुदान राशि का का बंदरबाट किए जाने की विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिल रही है। लिहाजा हितग्राहियों ,हितग्राहियों को प्रदाय किए गए अनुदान राशि की उपयोगिता ,कराए गए कार्यों की गुणवत्ता ,बैंक खाता नंबर समेत हितग्राहियों के भौतिक सत्यापन की नितांत दरकार है।
इसके अलावा बात करें अध्यक्ष /सचिव रेशम एवं कृमिपालन स्व सहायता समूह छाल ,पीपीसी कनकबीस ,नरकालो,स्वावलंबन समूह सिंघारी ,सेल्फ हेल्प ग्रूप पीसीसी बर्रा ,शहतूत प्रगुणन समूह सम्बलपुरी ,टसर एवं कोसा विपणन समूह रायगढ़ ,स्वावलंबन समूह परियोजना केंद्र बर्रा
के द्वारा मलबरी प्रक्षेत्र ,कोसा पौधरोपित प्रक्षेत्र में कराए गए विभिन्न कार्यों के भुगतान में भी फर्जीवाड़े की विश्वसनीय सूत्रों से शिकायत मिल रही थी । विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी अत्यंत वृहद स्तर की थी। फिर भी हमारे द्वारा जिन देयक व्हाउचर ,पारिश्रमिक मांग पत्र का अवलोकन किया गया उसके अनुसार मलबरी प्रक्षेत्र ,कोसा पौधरोपित प्रक्षेत्र में किए गए स्ट्रेंच एवं काँटातार घेराव, अगिनरोधक पट्टी तैयार करने प्रक्षेत्र की साफ सफाई कार्य ,प्रक्षेत्र के पौधों पर समसामयिक गोबर रासायनिक खाद डालने, निदाई गुड़ाई ,टसर परिक्षेत्र में पौधों की जानवरों से सुरक्षा व चौकीदारी कार्य,कोसा छंटाई एवं गिनती,पौधों की प्रूनिंग का कार्य ,दवा रसायन छिंड़कांव
सन्टी हटाने ,कीटपालन उपकरणों की सफाई आदि कार्य के नाम पर 41 लाख 33 हजार 552 रुपए से अधिक की राशि का भुगतान किया गया है।उपरोक्त कार्यों की
भुगतान प्रक्रिया में भी भारी फर्जीवाड़ा किया गया है। इसकी विभाग से प्राप्त सत्यप्रतिलिपि से पुष्टि हो रही है। जनवरी से मार्च एवं अप्रैल – मई का महीना अमूमन सूखा रहता है। बावजूद इसके अनावश्यक घास की छिलाई,प्रक्षेत्र की साफ सफाई आदि कार्यों के नाम पर समूहों को लाखों का भुगतान हुआ है। साफ सफाई के कार्यों के नाम पर लाखों का भुगतान हुआ है।फर्जी श्रमिकों से कार्य कराए जाने की विश्वस्त सूत्रों से सूचना मिल रही। लिहाजा देयक व्हाउचर व श्रमिकों के बैंक खातों के जांच की नितांत दरकार है। विभाग के द्वारा आकस्मिकता देयकों के भुगतान में भी मनमाना आंकलन कर विभिन्न कार्यों के एवज में 1 लाख 64 हजार 354 रुपए का भुगतान किया गया है। खादी ग्रामोद्योग बोर्ड को रेशम गतिविधियों के लिए भुगतान किए गए 17 लाख 98 हजार 565 रुपए के भुगतान देयकों की भी जांच की दरकार है।
शिकायतकर्ता द्वारा उपरोक्त तथ्यों के साथ समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज संलग्न कर व्यापक लोकहित में उपरोक्त समस्त प्रकरणों की 30 दिवस के भीतर संभाग स्तरीय जांच दल गठित कर जांच कर जिम्मेदारों का चिन्हांकन कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित कर जांच प्रतिवेदन की एक प्रति पत्र व्यवहार के पते पर उपलब्ध कराने अनुरोध किया गया था। लेकिन आवेदन के 6 माह उपरांत भी आज पर्यन्त संबंधित प्रकरण में आयुक्त बिलासपुर संभाग बिलासपुर , जिला -बिलासपुर (छग)के यहाँ से कार्रवाई तो दूर एक जांच आदेश तक कि प्रतिलिपि शिकायतकर्ता को प्राप्त नहीं हुई। जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि संबंधित कार्यालय द्वारा प्रकरण में जिम्मेदारों को भावी कार्रवाई से बचाने पूर्णतः संरक्षण दिया जा रहा है।

आयुक्त (कमिश्नर) कार्यालय का यह कृत्य न केवल निंदनीय है वरन प्रशासनिक जवाबदेहिता के प्रति गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा है। साथ ही शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के प्रतिकूल कार्य व्यवहार
है।
उक्त शिकायत पत्र की कार्यालय सचिव ग्रामोद्योग प्रभाग ,मंत्रालय महानदी भवन अटल नगर नवा रायपुर (छग) एवं कार्यालय कलेक्टर एवं जिला -दण्डाधिकारी महोदय ,रायगढ ,जिला -रायगढ़ (छग)को प्रतिलिपि दी गई थी। बावजूद इसके प्रकरण की जांच की अनदेखी की गई । जिससे विभागीय जिम्मेदार अफसरों की संलिप्तता स्वतः परिलक्षित हो रहा है।
👉मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंची शिकायत
प्रकरण में संभागायुक्त
कार्यालय एवं विभागीय संरक्षण की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच गई है। सूबे के मुखिया विष्णुदेव साय से 09 अप्रैल को की गई शिकायत के माध्यम में प्रकरण में अंतर्विभागीय राज्य स्तरीय टीम गठित कर जिम्मेदारों का चिन्हांकन कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है। ताकि शासन की जीरो टॉलरेंस की नीति के प्रति आमजनमानस में विश्वास बना रहे। अब प्रकरण में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर निगाहें टिकी है।
